पूजा में हर रोज बजाते हैं शंख? ये है सही समय और मंदिर में रखने के 7 जरूरी नियम
पूजा के दौरान शंख बजाया जाए तो इसे काफी शुभ माना जाता है। शंख बजाने से घर में पॉजिटिविटी आती है लेकिन इसे रखने के 7 जरूरी नियम बहुत कम ही लोग जानते हैं।

हिंदू धर्म में पूजा के दौरान शंख बजाने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि शंख से निकलने वाली ध्वनि आसपास के वातावरण को पवित्र बनाती है और इससे पॉजिटिव एनर्जी भी आती है। कई लोग पूजा में रोज शंख बजाते हैं लेकिन इसे सही जगह पर रखना उतना ही जरूरी है। मान्यता है कि शंख को अगर सही दिशा और सही तरीके से ना रखा जाए तो इसका सकारात्मक प्रभाव कम होता है। ऐसे में पूजा वाली जगह पर शंख रखते वक्त कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। शंख को सही तरीके से रखा जाए तो इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। आज जानेंगे शंख को घर में रखने के 7 जरूरी नियमों के बारे में। साथ ही ये भी जानेंगे कि इसे बजाने के सही समय क्या है?
शंख को बजाने का सही समय
बात करें शंख को बजाने के सही समय की तो इसे घर में होने वाली सुबह और शाम वाली पूजा के दौरान बजाना शुभ मानते हैं। माना यही जाता है कि इससे घर में नेगेटिविटी नहीं आती है। इसकी ध्वनि से पॉजिटिव एनर्जी आती है। हालांकि देर रात इसे बजाने से बचना चाहिए। वहीं इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि घर में बिना वजह बार-बार शंख ना बजाया जाए।
घर के मंदिर में शंख रखने के ये हैं 7 नियम-
इस दिशा में रखें
वास्तु शास्त्र के हिसाब से शंख को हमेशा घर के ईशान कोण में रखना चाहिए। ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिशा में सबसे ज्यादा पॉजिटिविटी होती है और यहां पर शंख रखने से ये एनर्जी और भी मजबूत होती है।
इस मूर्ति के पास रखें शंख
शंख को हमेशा भगवान विष्णु या फिर माता लक्ष्मी की मूर्ति के पास रखना चाहिए। नियम के अनुसार यही पर शंख रखना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर की खुशहाली बनी रहती है और हर चीज में बरकत होती है।
शिवलिंग के पास रख सकते हैं शंख?
आम तौर पर लोग मंदिर में शंख रख तो देते हैं लेकिन कई बार सही नॉलेज ना होने की वजह से गलतियां हो जाती हैं। नियम है कि शंख को कभी भी शिवलिंग या फिर भगवान शिव की मूर्ति के आसपास नहीं रखा जाता है। घर के मंदिर में इसे हमेशा शिवजी की मूर्ति से दूर ही रखना चाहिए।
जमीन पर ना रखें शंख
शंख को कभी भी सीधा जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इसका एक स्टैंड आता है, उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपको स्टैंड का इस्तेमाल नहीं करना है तो इसे लाल कपड़े के आसन पर रख दें।
किस ओर रखें शंख का मुंह?
शंख की दिशा तो पता चल गई लेकिन अब शंख का मुंह वाला हिस्सा ऊपर रखें या नीचे इसे लेकर अक्सर लोगों में कन्फ्यूजन होता है। बता दें कि शंख के मुंह को हमेशा ऊपर की ओर ही रखना चाहिए। मान्यता है कि इससे घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है।
खाली ना रखें शंख
ये नियम कम ही लोग जानते हैं। लोग शंख को कई बार खाली ही मंदिर में रख देते हैं लेकिन ये तरीका सही नहीं है। नियम है कि जिस शंख का इस्तेमाल पूजा में होता है उसे कभी भी खाली नहीं रखा जाता है। ऐसे शंख में हमेशा थोड़ा सा जल रखना चाहिए। इसके अलावा इसमें चावल और फूल भी रखना चाहिए। ऐसा करना शुभ माना जाता है।
साफ जगह पर ही रखें शंख
आप पूजा घर में जहां पर भी शंख रखते हैं वहां की रोजाना साफ-सफाई भी जरूरी है। कोशिश करें कि शंख वाली जगह पर कभी गंदगी ना हो और ना ही धूल जमे। इन नियमों का पालन करने से शंख घर में और भी बरकत ला सकता है।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
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