शनि की साढ़ेसाती से मेष राशि वालों को कब मिलेगी मुक्ति? अभी करना होगा इंतजार, जानें कब खत्म होगा शनि का प्रभाव

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। जून 2027 में शनि के मेष राशि में प्रवेश से दूसरा चरण शुरू होगा, जबकि अक्टूबर 2027 में शनि के वक्री होने पर कुछ समय के लिए पहला चरण लौटेगा। फरवरी 2028 से फिर मध्य चरण शुरू होगा।

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Shani Sade Sati on Aries: शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में चिंता बढ़ जाती है। ज्योतिष में शनि को कर्मफल और न्याय का ग्रह माना गया है। शनि की चाल धीमी होने के कारण एक राशि से दूसरी राशि में जाने में काफी समय लगता है। यही वजह है कि शनि के राशि परिवर्तन का असर भी लंबे समय तक देखने को मिलता है। साढ़ेसाती भी शनि की ऐसी ही लंबी अवधि है, जो किसी राशि पर करीब साढ़े सात साल तक रहती है। फिलहाल शनि मीन राशि में विराजमान हैं। ऐसे में मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। इस वजह से मेष राशि के जातक यह जानना चाहते हैं कि शनि की साढ़ेसाती से उन्हें आखिर कब राहत मिलेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मेष राशि वालों को अभी पूरी तरह राहत मिलने में समय लगेगा।

2027 में बदलेगा शनि की साढ़ेसाती का चरण

शनि 3 जून 2027 को मीन राशि छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। शनि के मेष राशि में पहुंचते ही मेष राशि वालों की साढ़ेसाती का दूसरा चरण शुरू हो जाएगा। साढ़ेसाती के इस चरण को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान शनि सीधे मेष राशि में गोचर करेंगे। हालांकि शनि का यह गोचर कुछ ही समय के लिए रहेगा। शनि की वक्री चाल के कारण अक्टूबर 2027 में वह वापस मीन राशि में लौटेंगे। इसके बाद कुछ समय के लिए मेष राशि वालों पर साढ़ेसाती का पहला चरण दोबारा प्रभावी होगा।

फरवरी 2028 से फिर मेष में आएंगे शनि

शनि 23 फरवरी 2028 को एक बार फिर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद मेष राशि वालों की साढ़ेसाती का मध्य चरण शुरू होगा। इस दौरान शनि का प्रभाव सीधे मेष राशि पर रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, साढ़ेसाती के मध्य चरण को सबसे ज्यादा प्रभाव वाला चरण माना जाता है। इस अवधि में मेष राशि वालों को अपने काम और आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। नौकरी या कारोबार में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। वहीं धन से जुड़े मामलों में किसी भी फैसले को जल्दबाजी में लेने से बचना बेहतर माना जाता है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। जन्म कुंडली में शनि की स्थिति और अन्य ग्रहों की दशा के आधार पर परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।

2030 में शुरू होगा साढ़ेसाती का आखिरी चरण

मेष राशि में गोचर पूरा करने के बाद शनि वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही मेष राशि वालों की साढ़ेसाती का अंतिम चरण शुरू होगा। इस चरण में शनि मेष राशि से दूसरी राशि यानी वृषभ में रहेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि के वृषभ राशि में प्रवेश के बाद मेष राशि वालों के लिए साढ़ेसाती का अंतिम पड़ाव शुरू होगा। इस दौरान पहले के मुकाबले परिस्थितियों में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से चली आ रही जिम्मेदारियों और चुनौतियों का असर भी कम होने की उम्मीद मानी जाती है।

मई 2032 के आसपास मिलेगी पूरी राहत

मेष राशि वालों को शनि की साढ़ेसाती से पूरी तरह मुक्ति मई 2032 के आसपास मिलने की बात कही जाती है। यानी वर्तमान समय से देखें तो मेष राशि वालों को साढ़ेसाती के पूरे चक्र से बाहर आने में अभी कई साल बाकी हैं। इस तरह मेष राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती को तीन चरणों में समझा जा सकता है। पहला चरण मार्च 2025 में शुरू हुआ। जून 2027 में शनि के मेष राशि में आने के साथ दूसरा चरण शुरू होगा। इसके बाद करीब 2030 में अंतिम चरण आएगा और मई 2032 के आसपास साढ़ेसाती समाप्त हो जाएगी।

ज्योतिष में साढ़ेसाती को केवल परेशानी का समय नहीं माना जाता। शनि को कर्म का ग्रह कहा जाता है और माना जाता है कि इस अवधि में व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार परिणाम मिलते हैं। इसलिए मेष राशि वालों के लिए इस दौरान धैर्य बनाए रखना, मेहनत करना और जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटना महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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