Shani Sade Sati 2026: मीन, कुंभ और मेष राशि पर चल रहा असर, जानिए 3 चरण और आसान उपाय

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Shani Sade Sati 2026: शनि की साढ़े साती का नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं। लेकिन ज्योतिष में इसे सिर्फ मुश्किलों का समय नहीं माना जाता। कहा जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं।

Shani Sade Sati 2026: मीन, कुंभ और मेष राशि पर चल रहा असर, जानिए 3 चरण और आसान उपाय

Shani Sade Sati 2026: शनि की साढ़ेसाती का नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं। लेकिन ज्योतिष में इसे सिर्फ मुश्किलों का समय नहीं माना जाता। कहा जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। अगर कोई मेहनत और ईमानदारी से काम करता है तो साढ़े साती के दौरान भी उसे अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब शनि किसी व्यक्ति की चंद्र राशि से 12वीं, पहली और दूसरी राशि में रहते हैं, तब साढ़े साती चलती है। इस पूरे समय की अवधि करीब साढ़े सात साल होती है। इसलिए इसे साढ़े साती कहा जाता है।

साढ़ेसाती के तीन चरण होते हैं

साढ़ेसाती का पहला चरण तब शुरू होता है, जब शनि चंद्र राशि से 12वें भाव में पहुंचते हैं। इस समय खर्च बढ़ सकते हैं। मन थोड़ा परेशान रह सकता है। कुछ लोगों को कामकाज में भी दबाव महसूस हो सकता है।

दूसरा चरण तब आता है, जब शनि उसी राशि में गोचर करते हैं, जिसमें व्यक्ति का चंद्रमा होता है। इसे साढ़े साती का सबसे अहम चरण माना जाता है। इस दौरान नौकरी, कारोबार और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। कई बार काम पूरे होने में समय भी लगता है।

तीसरा और आखिरी चरण तब शुरू होता है, जब शनि चंद्र राशि से दूसरे भाव में आते हैं। इसे साढ़े साती का उतरता हुआ चरण कहा जाता है। माना जाता है कि इस समय धीरे-धीरे हालात बेहतर होने लगते हैं और रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं।

अभी किन राशियों पर चल रही है साढ़ेसाती?

इस समय शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। ऐसे में मीन, कुंभ और मेष राशि के जातक साढ़े साती के प्रभाव में माने जा रहे हैं।

मीन राशि वालों पर साढ़े साती का दूसरा चरण चल रहा है। कुंभ राशि वाले आखिरी चरण में हैं। वहीं मेष राशि वालों पर पहला चरण चल रहा है।

क्या साढ़ेसाती हमेशा खराब होती है?

शनि को न्याय का ग्रह माना जाता है। अगर व्यक्ति सही रास्ते पर चलता है और मेहनत करता है तो शनि अच्छे नतीजे भी दे सकते हैं। कई लोगों को इसी दौरान नौकरी में तरक्की, नई जिम्मेदारी या आर्थिक फायदा भी मिलता है।

साढ़ेसाती में क्या करना चाहिए?

मान्यता है कि रोज हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ रहता है। इसके अलावा “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।

जरूरतमंद लोगों की मदद करना, गरीबों को दान देना और बुजुर्गों का सम्मान करना भी अच्छा माना जाता है। शनिवार के दिन तेल या लोहे का दान करने की परंपरा भी काफी पुरानी है।

इन बातों का रखें ध्यान

साढ़े साती के दौरान गलत कामों से बचना चाहिए। किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। नशे जैसी आदतों से दूर रहना बेहतर माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस समय जितना ज्यादा धैर्य और अनुशासन रखा जाए, उतना ही अच्छा परिणाम आगे चलकर मिल सकता है।

शनि की साढ़े साती का नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं। लेकिन ज्योतिष में इसे सिर्फ मुश्किलों का समय नहीं माना जाता। कहा जाता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। अगर कोई मेहनत और ईमानदारी से काम करता है तो साढ़े साती के दौरान भी उसे अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब शनि किसी व्यक्ति की चंद्र राशि से 12वीं, पहली और दूसरी राशि में रहते हैं, तब साढ़े साती चलती है। इस पूरे समय की अवधि करीब साढ़े सात साल होती है। इसलिए इसे साढ़े साती कहा जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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