Shani Pradosh Vrat Katha: यहां पढ़ें शनि प्रदोष व्रत कथा
Shani Pradosh Vrat Katha in Hindi: शनि प्रदोष व्रत में कथा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत कथा पढ़ने या सुनने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और संतान सुख के साथ धन-धान्य की प्राप्ति होती है।

Shani Pradosh Vrat Katha in Hindi: हिंदू धर्म में शनि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। 27 जून 2026 को शनि प्रदोष व्रत है। यह दिन भगवान शंकर के साथ ही शनिदेव की कृपा पाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में शिव पूजन और मंत्रों का जाप अत्यंत शुभ और लाभकारी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो शनि प्रदोष व्रत का संयोग बनता है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत में पूजन के समय व्रत कथा का पाठ या सुनना जरूर करना चाहिए। प्रदोष व्रत कथा के बिना अधूरा माना जाता है। मान्यता है जो व्यक्ति शनि प्रदोष व्रत करता है उसे खोए धन की प्राप्ति होती है। जीवन में सफलता मिलती है और संतान सुख प्राप्त होता है। आइए यहां पढ़ें शनि प्रदोष व्रत कथा।
शनि प्रदोष व्रत की कथा यहां पढ़ें:
प्राचीन काल में एक निर्धन ब्राह्मण की स्त्री दरिद्रता से दुखी होकर शांडिल्य ऋषि के पास जाकर बोली- हे मुनिवर, मैं अत्यंत दुखी हूं और मेरे दुख का निवारण बताएं। मेरे दोनों पुत्र आपकी शरण में हैं। मेरे बडे़ पुत्र का नाम धर्म है कि राजपुत्र है और छोटे पुत्र का नाम शुचिव्रत है। हम दरिद्र हैं और आप हमारा उद्धार कर सकते हैं।
ऋषि ने प्रदोष व्रत करने के लिए कहा
ब्राह्मणी की बात सुनकर ऋषि ने उसे शनि प्रदोष व्रत करने के लिए कहा। तीनों नियमपूर्वक प्रदोष व्रत करने लगे। कुछ समय बाद प्रदोष व्रत आया तब तीनों ने संकल्प लिया। छोटा लड़का शुचिव्रत एक तलाब पर स्नान करने के लिए गया तो रास्ते में उसे सोने से भरा कलश मिला। जिसे वह घर लेकर आया। प्रसन्न होकर माता से कहा कि मां यह धन मुझे रास्ते में मिला है। धन देखकर माता ने शिव महिमा का वर्णन किया। राजपुत्र को अपने पास बुलाकर बोली देखो पुत्र, यह धन हमें शिवजी की कृपा से मिला है। इसे तुम दोनों पुत्र आधा-आधा बांट लो। माता की बात सुनकर राजपुत्र ने भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान किया और कहा- माता यह धन आपके पुत्र का ही है। मैं इसका अधिकारी नहीं हूं। जब मुझे भगवान शंकर और माता पार्वती देंगे तब लूंगा। इतना कहकर राजपुत्र अपनी पूजा में लग गया।
गंधर्व कन्या से राजकुमार की भेंट
एक दिन दोनों भाइयों को नगर भ्रमण का विचार हुआ। वहां उन्होंने कई गंधर्व कन्याओं को खेलते हुए देखा, उन्हें देखकर शुचिव्रत ने कहा- भैया हमें इससे आगे नहीं जाना है। इतना कहकर शुचिव्रत वहीं बैठ गया। लेकिन राजकुमार कन्याओं के बीच अकेला ही पहुंच गया। वहां एक सुंदर कन्या राजकुमार को देखकर मोहित हो गई और अपनी सखियों से बोली इस जंगल से भांति-भांति के फूल लेकर आओ। यह सुनकर गंधर्व कन्या की सखियां फूल चुनने चली गईं। वह अकेले ही सुंदर राजकुमार को देखती रही। इस राजकुमार भी उस कन्या पर मोहित हो गए। कन्या बोली- आप कहां रहते हैं? जंगल मैं कैसे आएं और किस राजा के पुत्र हैं? राजकुमार ने अपना परिचय देते हुए कि मेरा नाम अंशुमति है। मैं विदर्भ राजा का पुत्र हूं। आप अपना परिचय दें। कन्या बोली- मैं विद्राविक नामक गंधर्व की पुत्री हूं। मेरा नाम अंशुमति है। मैंने आपकी मन की स्थिति को जान लिया है कि आप मुझ पर मोहित हैं। विधाता ने हमारा संयोग मिलाया है।
राजकुमार को पहना दी मोतियों की माला
युवती ने मोतियों का हार उतारकर राजकुमार के गले में डाल दिया। राजकुमार ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि मैंने आपका प्रेम से दिया गया उपहार स्वीकार कर लिया है, लेकिन मैं निर्धन हूं। राजकुमार के वचनों को सुनकर गंधर्व कन्या बोली कि मैं जैसा कह चुकी हूं कि वैसा ही करुंगी। अब आप अपने घर को जाएं। इतना कहकर गंधर्व कन्या अपनी सखियों के पास चली गई और राजकुमार ने घर आकर सारा किस्सा शुचिव्रत को सुनाया। तब तीसरा दिन आया वह राजपुत्र शुचिव्रत को लेकर उसी वन में पहुंचा, वहीं गंधर्व राज अपनी कन्या के साथ पहुंचे।
गंधर्व राज ने सुनाया किस्सा
गंधर्व राज ने दोनों राजकुमारों को आसन दिया और कहा कि मैं कैलाश पर गया था। वहां भगवान शंकर ने मुझसे कहा कि मेरा धर्मगुप्त नाम का राजपुत्र है जो इस समय राज्य विहीन निर्धन है। मेरा परम भक्त है। तुम उसकी मदद करो। गंधर्व राज ने आगे कहा कि मैं भगवान शंकर की आज्ञा से कन्या को आपके पास लाया हूं। आप इसका निर्वाह करें। मैं आपको राजगद्दी दिलाने में मदद करुंगा। इस प्रकार राजकुमार और गंधर्व कन्या का विवाह हुआ। विशेष धन और सुंदर गंधर्व कन्या पाकर राजकुमार अति प्रसन्न हुआ। भगवान शंकर की कृपा से कुछ समय बाद वह अपने शत्रुओं को हराकर राज्य का सुख भोगने लगा।
शनि प्रदोष व्रत की दूसरी कथा:
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक सेठ धन-संपदा और वैभव से संपन्न था। सेठ अत्यंत दयालु था। उसके द्वार से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता था। वह हर किसी को खूब दान-दक्षिणा देता था। लेकिन दूसरों को खुशियां देने वाले सेठ-सेठानी खुद दुखी थे। उनके दुख का कारण संतान का नहीं होना था।
तीर्थ यात्रा पर जाने का फैसला
संतानहीनता से परेशान हर दिन बिना अग्नि अंदर ही अंदर जल रहे थे। एक दिन उन्होंने तीर्थयात्रा पर जाने का फैसला लिया और अपने काम-काज सेवकों को सौंपकर निकल पड़े। अभी वह नगर के बाहर निकले ही थे कि उन्हें एक विशाल वृक्ष के नीचे समाधि लगाए एक तेजस्वी साधु नजर आए। दोनों ने सोचा साधु महाराज का आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा शुरू की जाए।
पति-पत्नी दोनों समाधि में लीन साधु के सामने हाथ जोड़कर बैठ गए और उनकी समाधि टूटने की प्रतीक्षा करने लगे। सुबह से शाम और फिर रात हो गई लेकिन साधु समाधि में ही लीन रहें।
साधु ने व्रत का समझाया विधान
सेठ-सेठानी पूरे भक्ति भाव से साधु के सामने हाथ जोड़कर बैठे रहे। अंत में सुबह साधु समाधि से उठे। सेठ -सेठानी को देखकर मंद-मंद मुस्कुराए और हाथ उठाकर आशीर्वाद देते हुए कहा कि मैं तुम्हारी अंतर्मन की कथा जान गया हूं। मैं तुम दोनों के भक्ति भाव से अत्यंत प्रसन्न हूं।
साधु ने संतान प्राप्ति के लिए शनि प्रदोष व्रत कथा का विधान समझाया और भगवान शिव का पूजन समझाया। तीर्थयात्रा के बाद घर लौटकर सेठ-सेठानी नियम-पूर्वक शनि प्रदोष व्रत करने लगे। कुछ समय बाद सेठ की पत्नी ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। शनि प्रदोष व्रत के प्रभाव से उनके घर का अंधेरा खत्म हुआ और खुशियां आईं। दोनों आनंदपूर्वक रहने लगें।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Saumya Tiwariसंक्षिप्त विवरण
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।
इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान


