शनि प्रदोष व्रत कल, कर लें ये खास उपाय, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र से लेकर सबकुछ

Feb 13, 2026 06:04 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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प्रदोष व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को आता है- एक बार कृष्ण पक्ष में और एक बार शुक्ल पक्ष में। इस व्रत को भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं

शनि प्रदोष व्रत कल, कर लें ये खास उपाय, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र से लेकर सबकुछ

Shani Pradosh Vrat : हिंदू पंचांग के मुताबिक प्रदोष व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को आता है- एक बार कृष्ण पक्ष में और एक बार शुक्ल पक्ष में। इस व्रत को भगवान शिव की आराधना का विशेष दिन माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मन की इच्छाओं को दिशा मिलती है। जब त्रयोदशी शनिवार के दिन पड़ती है, तब इस प्रदोष को शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ शनि देव की पूजा का भी महत्व माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष पर की गई आराधना से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है। इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष का शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026 को पड़ रहा है। ऐसे में जो लोग लंबे समय से अड़चनों, मानसिक दबाव या रुकावटों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह दिन शिव भक्ति और संयम के साथ पूजा करने का अच्छा अवसर माना जाता है।

शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि- शनि प्रदोष के दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें। घर के मंदिर की सफाई करें और शिव परिवार की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं और फल, फूल, धूप व नैवेद्य अर्पित करें। शिव मंत्रों का जाप करें और आरती करें। शाम को प्रदोष काल में दोबारा स्नान करके शिव मंदिर जाना शुभ माना जाता है। वहां शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, भांग, शहद और गन्ना अर्पित करें। इसके बाद शनि प्रदोष व्रत की कथा सुनें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। पूजा के अंत में अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना जरूर करें।पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनिदेव की आराधना करें।

शनि प्रदोष पर किए जाने वाले खास उपाय

शिवलिंग का जलाभिषेक

जल में काले तिल और शमी पत्र मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि इससे शनि के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।

बेलपत्र अर्पण और दान

इस दिन शिवलिंग पर 108 बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। साथ ही उड़द दाल, काले वस्त्र, जूते और शनिदेव से जुड़ी चीजों का दान करना लाभकारी बताया जाता है।

शिव मंत्र- “ॐ नमः शिवाय”

महामृत्युंजय मंत्र- “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”

शनि बीज मंत्र- “ॐ शं शनैश्चराय नमः”

पूजा सामग्री- प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति/तस्वीर, गंगाजल या साफ जल, दूध, दही और शहद अभिषेक के लिए, घी या सरसों का तेल और रुई की बाती दीपक जलाने के लिए, धूप-अगरबत्ती, रोली, चंदन, अक्षत, बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, भांग, फल और मिठाई नैवेद्य के रूप में रखें। शनि प्रदोष के दिन काले तिल, उड़द की दाल, काले कपड़े का छोटा टुकड़ा, लोहे की कोई छोटी वस्तु और पीपल के नीचे दीपक जलाने के लिए सरसों का तेल भी साथ रखें, वहीं जप-पाठ के लिए रुद्राक्ष या सामान्य माला और शिव चालीसा/प्रदोष व्रत कथा की किताब रखना उपयोगी रहता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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