शनि प्रदोष व्रत पर करें ये काम, साढ़ेसाती और ढैय्या का असर हो सकता है कम
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत हर महीने दो बार, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव-पार्वती की विधि से पूजा करने पर भक्तों की परेशानियां कम होती हैं और मनचाही कामनाएं पूरी होने लगती हैं।

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत हर महीने दो बार, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव-पार्वती की विधि से पूजा करने पर भक्तों की परेशानियां कम होती हैं और मनचाही कामनाएं पूरी होने लगती हैं। जिस दिन त्रयोदशी पड़ती है, उसी वार के अनुसार प्रदोष व्रत का नाम रखा जाता है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी इस बार शनिवार को है, इसलिए इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस साल 14 फरवरी 2026 को शनि प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव के साथ शनि देव की पूजा का भी खास महत्व होता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष पर किए गए कुछ उपायों से साढ़ेसाती और ढैय्या का असर में कम हो जाता है। इस समय कुंभ, मीन और मेष राशि में शनि की साढ़ेसाती और सिंह, धनु राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या लगने पर व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं, शनि प्रदोष व्रत के दिन क्या उपाय करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम हो सकता है।
शनि प्रदोष व्रत पर क्या करें
काले और नीले रंग से जुड़ी चीजों का दान- शनि देव का संबंध काले और गहरे नीले रंग से माना जाता है। इस दिन उड़द की दाल, काले तिल या लोहे से बनी कोई छोटी वस्तु दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे शनि का अशुभ प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है।
शनि देव के बीज मंत्र का जप- “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जप इस दिन विशेष फल देता है। कोशिश करें कि कम से कम कुछ माला जप करें। नियमित मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और जीवन की रुकावटें धीरे-धीरे कम होती हैं।
पीपल के पेड़ की पूजा- शनि प्रदोष के दिन पीपल की जड़ में जल चढ़ाएं और शाम के समय दीपक जलाएं। इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की अड़चनों से राहत मिलने लगती है।
शनिवार को हनुमान जी की पूजा- शनिवार के दिन हनुमान जी की आराधना करने से शनि दोष शांत होता है। माना जाता है कि इससे डर, बाधा और परेशानियों में कमी आती है।
शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएं- शनि प्रदोष के दिन प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल और दूध से अभिषेक करें। साथ में बेलपत्र अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें। मान्यता है कि भोले बाबा की कृपा से शनि के कारण आ रही रुकावटें कम होने लगती हैं।
काले तिल से शिवलिंग का अभिषेक करें- शनिवार और शनि प्रदोष के संयोग में काले तिल का विशेष महत्व माना जाता है। शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अभिषेक करने से शनि दोष शांत होने की मान्यता है।
प्रदोष काल में शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ- शाम के समय प्रदोष काल में शिव चालीसा का पाठ करें या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। इससे मन को शांति मिलती है और लंबे समय से चल रही मानसिक थकान या परेशानी में राहत मिलती है।
शिव मंदिर में दीपक जलाकर गरीबों को भोजन कराएं- शिव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और जरूरतमंदों को भोजन या काली दाल का दान करें। मान्यता है कि दान-पुण्य से भोले बाबा प्रसन्न होते हैं और शनि से जुड़ी परेशानियों में कमी आती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





