Shani Jayanti 2026: शनि जयंती पर पूजा से ना चूकें ये 6 लोग, इन मंत्रों से तुरंत प्रसन्न होंगे शनिदेव
Shani Jayanti Puja: शनि जयंती पर जानिए किन 6 लोगों को शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए? इसी के साथ जानें शनिदेव को इस दिन किन मंत्रों से प्रसन्न किया जा सकता है?

शनि जयंती पर हर किसी को शनिदेव की पूजा करनी चाहिए लेकिन 6 लोग ऐसे हैं जिन्हें बिल्कुल भी नहीं चूकना चाहिए। आज इन 6 लोगों के बारे में ही जानेंगे। बता दें कि साल 2026 में शनि जयंती 16 मई को है। शनिदेव को न्याय देवता और कर्मफल दाता के रूप में जाना जाता है। शनि जयंती के दिन कई गई शनिदेव की पूजा जिंदगी में कई अच्छे बदलाव ला सकती है। वहीं कुछ राशियां ऐसी है जिनको इस दिन की पूजा का डबल फायदा हो सकता है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर शनि जयंती 2026 के दिन किन लोगों को पूजा जरूर करनी है और इस दिन शनिदेव को प्रसन्न करने का मंत्र कौन सा है?
शनि जयंती पर पूजा से ना चूकें ये 6 लोग, इन मंत्रों से तुरंत प्रसन्न होंगे शनिदेव-
कुंभ और मकर राशि
कुंभ और मकर राशि पर शनिदेव हमेशा मेहरबान रहते हैं। इन दोनों राशियों के स्वामी ग्रह शनिदेव ही हैं। ऐसे में शनि का सीधा असर इन राशियों की जिंदगी पर पड़ता है। शनिदेव की पूजा करने से इन दोनों राशियों के जातकों की जिंदगी में स्थिरता आती है। साथ ही जिंदगी में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। शनि जयंती के दिन इन दोनों राशियों के जातकों को शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए।
तुला राशि वालों पर शनिदेव होंगे मेहरबान
तुला राशि वालों को शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि इस राशि में उच्च के होते हैं। अगर इस राशि के जातक शनिदेव की हमेशा पूजा करें तो इनके मान-सम्मान और पद में वृद्धि होती है। वहीं शनि जयंती पर अगर तुला राशि वाले शनिदेव की पूजा सच्चे मन से करेंगे तो जिंदगी में यकीनन सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
मेष राशि वाले करें शनिदेव की पूजा
मेष राशि के लोगों को शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष राशि में शनि नीच के होते हैं। ऐसे में शनि इन लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करते हैं। ऐसे में जिंदगी में कई बाधाएं आती हैं और अनुशाषन में भी कमी होती है। मेष राशि वालों को नियमित रूप से शनिदेव की पूजा करनी चाहिए। वहीं शनि जयंती वाले दिन तो विधि-विधान से शनिदेव की पूजा-अर्चना करना जरूरी है।
साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान लोग
साढ़ेसाती और ढैय्या के समय शनिदेव व्यक्ति के धैर्य और उसके किए गए कर्मों की परीक्षा लेते हैं। इस दौरान कई लोगों को तनाव महसूस होता है। वहीं कुछ लोगों को पैसों से जुड़ी दिक्कत आ सकती है। साथ ही इससे सेहत भी थोड़ी कमजोर हो सकती है। हालाकि शनि जंयती के दिन पूजा करने से शनिदेव का ये असर थोड़ा कम हो सकता है। शनिदेव की पूजा से मुश्किल समय का सामना करने की ताकत मिलती है। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष है वो भी इस पूजा को कर सकते हैं। शनि जयंती पर पीपल के पेड़ के नीचे सरसों का तेल जरूर जलाएं। इसके अलावा शनि चालीसा का पाठ जरूर करें। पूजा के बाद आप जरूरतमंदों को दान भी करें।
शनि देव को प्रसन्न करने के 3 मंत्र
1. ॐ शं शनैश्चराय नमः
2. ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
3. ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥
काम की बात करें नोट
यहां पर ध्यान देने वाली बात ये है कि शनिदेव सिर्फ पूजा से नहीं बल्कि लोगों को कर्म से भी प्रसन्न होते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा तरीका है कि काम में ईमानदारी रखकर मेहनत की जाए और साथ ही दूसरों की मदद की जाए। वहीं अगर आपको अपनी राशि या कुंडली के बारे में ज्यादा नहीं पता है तो आप हनुमान भगवान की पूजा कर सकते हैं। दरअसल ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा करने वालों को शनिदेव कभी कष्ट नहीं देते हैं।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
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