घर पर क्यों नहीं रखी जाती है शनिदेव की मूर्ति? जान लें पूजा करने का सबसे आसान तरीका

Jan 31, 2026 10:17 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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शनिवार का दिन भगवान शनिदेव के नाम होता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम उनकी मूर्ति को घर में क्यों नहीं रखते हैं? साथ ही जानें कि बिना मूर्ति के घर में उनकी पूजा कैसे की जाती है?

घर पर क्यों नहीं रखी जाती है शनिदेव की मूर्ति? जान लें पूजा करने का सबसे आसान तरीका

हिंदू धर्म में आज यानी शनिवार का दिन भगवान शनिदेव को समर्पित होता है। इस खास दिन पर शनिवदेव की पूजा की जाती है। आम तौर पर कई लोग शनि का नाम सुनते ही डरने लगते हैं। लोगों को लगता है कि शनिदेव हमेशा गलत ही करते हैं लेकिन ऐसा नहीं है क्योंकि उन्हें न्याय के देवता के रूप में देखा जाता है। शनिदेव हमेशा सभी को कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। अगर किसी ने अच्छा काम किया है तो उसे हमेशा अच्छा ही मिलेगा। वहीं जिसके कर्म बुरे हैं उसे शनिदेव दंड करते हैं। अब ऐसे में सवाल आता है कि शनिदेव की मूर्ति को घर में क्यों नहीं रखा जाता है? नीचे जानें कि ऐसा क्यों होता है और साथ ही जानें कि शनिवार के दिन घर पर उनकी पूजा कैसे की जाए?

घर में क्यों नहीं रखते हैं शनिदेव की मूर्ति

किसी भी घर में आपने शनिदेव की मूर्ति को नहीं देखा होगा। दरअसल ऐसा कहा जाता है कि एक बार शनिदेव को ये श्राप मिला था कि वो अगर किसी को भी देखेंगे तो उसका बुरा ही होगा। इसी वजह से घर में बाकी देवी-देवताओं के साथ शनिदेव की मूर्ति या फिर तस्वीर नहीं रखी जाती है। अगर आप मंदिर जाकर भी शनिदेव की पूजा करते हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि उनकी मूर्ति के ठीक सामने नहीं खड़ा होना है। अपनी मनोकामनाएं को कहते वक्त भी उनकी आंखों में नहीं बल्कि पैरों की ओर देखना चाहिए।

घर पर ऐसे करें शनिदेव की पूजा

वैसे तो शनिदेव के मंदिर जाना ही सही रहता है। वहीं अगर आप घर में ही शनिदेव की पूजा करना चाहते हैं तो भगवान हनुमान की तस्वीर के सामने ही उनका स्मरण कर सकते हैं। शनिवार का संबंध भगवान हनुमान के साथ भी है। ऐसे में आप उनकी तस्वीर के सामने ही शनिदेव को याद कर सकते हैं। पूजा घर में सरसों के तेल जलाएं। साथ ही काला तिल औक काले उदड़ की दाल को अर्पित करें। इन चीजों के साथ काले रंग के वस्त्र को मंदिर में ले जाकर दान कर दें। मान्यता है कि अगर सच्चे मन से ये पूजा की जाए तो भगवान शनिदेव अपनी कृपा बरसाते हैं। आप चाहे तो इस दिन शनिदेव के मंदिर में नजर भी उतरवा सकते हैं। नजर दोष हटाने के लिए शनिवार का दिन सबसे अच्छा माना जाता है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

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Garima Singh

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गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


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गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


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गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


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