शनि जयंती और बड़मावस पर ‘त्रिगुणी योग’ का दुर्लभ संगम, पूजा का मुहूर्त भी पढ़ें, शनि दोषों से मिलेगी मुक्ति
वैसे तो प्रतिमाह की अमावस्या तिथि को पूजन दान आदि और पितरों के निमित्त समर्पित किया गया है लेकिन वर्षभर में होने वाली बारह अमावस्या में से ज्येष्ठ मास की अमावस्या विशेष रूप में मनाई जाने वाली होती है।

वैसे तो प्रतिमाह की अमावस्या तिथि को पूजन दान आदि और पितरों के निमित्त समर्पित किया गया है लेकिन वर्षभर में होने वाली बारह अमावस्या में से ज्येष्ठ मास की अमावस्या विशेष रूप में मनाई जाने वाली होती है। ज्योतिष के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को ही वट-अमावस्या या बड़-मावस कहा जाता है। इसमें विशेष रूप से वट-वृक्ष का पूजन किया जाता है। ज्योतिषचार्य विभोर इंदुसुत के अनुसार इस बार वट अमावस्या 16 मई शनिवार के दिन है। वट अमावस्या के दिन विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और स्वस्थ समृद्ध जीवन के लिए व्रत रखती है जिसे वट सावित्री व्रत कहते हैं।
शुभ मुहूर्त
शुभ योग प्रातः 07:11 से 08:53 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 से 12:44 बजे तक
लाभामृत योग दोपहर 01:59 से 05:23 बजे तक
शनैश्चरी अमावस्या-शनि जयंती का शनिवार के दिन होना अपने आप में शुभ संयोग
अगर किसी भी माह में अमावस्या शनिवार के दिन हो तो ये शनि प्रधान अमावस्या होती है, जिसे शनैश्चरी अमावस्या कहते हैं और इस दिन किए गए दान पूजन धार्मिक कार्यों से पितरों के आशीर्वाद के साथ साथ शनि देव की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस बार 16 मई को अमावस्या और शनिवार के संयोग से शनैश्चरी अमावस्या का ये विशेष संयोग भी बन रहा है।ज्योतिषचार्य विभोर के अनुसार पौराणिक कथाओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को ही शनि जयंती के रूप में भी माना गया है। इसलिए प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या को श्रद्धा और उत्साह के साथ शनि देव का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार 16 मई शनिवार को शनि देव की जयंती मनाई जाएगी। शनि जयंती का शनिवार के दिन होना अपने आप में शुभ संयोग है। इसलिए …जो लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा में संघर्ष का सामना कर रहे हैं उनके लिए इस बार शनि जयंती पर की गई शनि देव की पूजा उपासना अमृत तुल्य परिणाम देगी।
वट सावित्री व्रत पूजन का शुभ समय
वट सावित्री व्रत के दिन व्रती स्त्रियों द्वारा वट वृक्ष का पूजन और वट सावित्री व्रत कथा सुनने की परंपरा है। वट सावित्री पूजन के लिए सुबह 7:10 बजे से 8:52 बजे के बीच शुभ चौघड़िया और इसके बाद दोपहर 12:16 बजे से 3:39 बजे के बीच चर और लाभ चौघड़िया का शुभ मुहूर्त होगा।
कई शुभ योग हैं साथ
ज्योतिषचार्य भारत ज्ञान भूषण के अनुसार शनि देव का जन्म शनिवार व ज्येष्ठ अमावस्या को ही हुआ था। इस बार भी वही योग है और अति विशेष भी है। इसमें ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या 16 मई को पूरा दिन रात व्याप्त रहेगी। इस प्रकार सूर्योदनी ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या 16 मई दिन शनिवार को है। भरणी नक्षत्र, सौभाग्य योग, बुधादित्य योग में होगी बड़मावस व शनि जयंती इस जेठ अमावस पर इस तिथि पर देव पितृ कार्य अमावस्या बड़ पूजन, वट सावित्री व्रत शनि जयन्ती के साथ सन्त ज्ञानेश्वर जयन्ती भी मनाई जाएगी।
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।
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