सावन शिवरात्रि पर कैसे बनाएं पार्थिव शिवलिंग, कब और कैसे करें विसर्जन
सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर मिट्टी से शिवलिंग तैयार करने की आसान और शास्त्रसम्मत विधि जानें। शुद्ध मिट्टी का चयन, पूजन सामग्री, मंत्र जाप और सही समय पर विसर्जन करने का तरीका समझें। इससे घर में सुख-शांति और भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

सावन मास में आने वाली शिवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व है। साल 2026 में यह पर्व 11 अगस्त मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन शिव भक्त व्रत रखते हैं और जलाभिषेक करके भोलेनाथ की कृपा पाने की कामना करते हैं। शिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए पार्थिव शिवलिंग यानी मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पूजन करने का विधान सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है। इससे करोड़ों यज्ञों के समान पुण्य मिलता है और हर तरह के पाप से छुटकारा मिलता है।
सावन शिवरात्रि पर पार्थिव शिवलिंग का महत्व
सावन मास में आने वाली शिवरात्रि के दिन पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। मिट्टी से बना शिवलिंग सादगी और सच्ची भक्ति का प्रतीक माना जाता है। गृहस्थ जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है। निष्काम भाव से की गई यह पूजा जीवन के हर कष्टों का निवारण कर देती है। सावन शिवरात्रि पर यह विधि अपनाने वाले भक्तों को विशेष आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।
शिवलिंग के लिए मिट्टी लाने का नियम
पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए मिट्टी का चयन बहुत महत्वपूर्ण है। किसी पवित्र नदी के तट, बगीचे या साफ-सुथरे स्थान से मिट्टी लाएं, जहां गंदगी ना हो। मिट्टी घर लाते ही सबसे पहले उस पर गंगाजल या पवित्र जल का छींटा दें। अगर मिट्टी कुछ दिन पहले लाई गई हो, तो घर में प्रवेश कराते समय जल से प्रोक्षण जरूर करें। जिस दिन शिवलिंग बनाना हो, उससे पहले किचन में मटके के पास एक कलश में जल भरकर रखें। रसोई में अन्नपूर्णा और देवशक्तियों का वास माना जाता है, इसलिए वहीं के जल से मिट्टी गूंथना शुभ होता है।
पार्थिव शिवलिंग बनाने की सही विधि
मिट्टी में थोड़ा दूध या देसी घी और चुटकी भर भस्म मिलाएं। इससे शिवलिंग में दृढ़ता आती है। पूजन थाली में सबसे पहले एक बेलपत्र सीधा रखें, जिसकी डंडी उत्तर दिशा की ओर हो। बेलपत्र के ऊपर मिट्टी रखकर पहले शिवलिंग का मुख्य पिंड बनाएं। उसके बाद जलाधारी और जल बहने वाले मार्ग को तैयार करें। ध्यान रखें कि शिवलिंग में शिव परिवार का वास माना जाता है। जलाधारी का गोल भाग माता पार्वती का हस्तकमल, दायां भाग श्री गणेश, बायां भाग श्री कार्तिकेय और मध्य रेखा अशोक सुंदरी का स्थान प्रस्तुत करती है।
पार्थिव शिवलिंग की पूजन विधि
शिवलिंग बनाने के बाद उसे वेदी पर स्थापित करें। पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शहद और शक्कर तथा गंगाजल से इसे स्नान कराएं। इसके बाद चंदन, रोली, अक्षत, अबीर और गुलाल अर्पित करें। भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म चढ़ाएं। फल और मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें और अंत में आरती उतारें।
विसर्जन का सही समय
पार्थिव शिवलिंग के विसर्जन का भी शास्त्रोक्त नियम है। सामान्य दिनों में पूजन के बाद सूर्यास्त से पहले विसर्जन कर दिया जाता है। लेकिन सावन शिवरात्रि, महाशिवरात्रि या हरतालिका तीज जैसे बड़े पर्वों पर रात्रि पूजन के बाद अगले दिन सुबह या शास्त्रोक्त मुहूर्त में विसर्जन किया जाता है। सावन शिवरात्रि पर रातभर पूजा करके सुबह विसर्जन करना अधिक शुभ माना जाता है। समय का ध्यान रखकर विसर्जन करने से पूजा का फल पूरा मिलता है।
विसर्जन की विधि
पूजन और आरती समाप्त होने के बाद शिवलिंग को प्रणाम करें और अपनी मनोकामना दोहराते हुए उसे वेदी से थोड़ा आगे खिसकाएं। यह विसर्जन का भाव होता है। फिर किसी पवित्र नदी, तालाब या घर के बड़े गमले में स्वच्छ जलपात्र में शिवलिंग को विसर्जित करें। विसर्जन करते समय जलाधारी की उत्तर दिशा वाली धार अपनी दृष्टि के सामने रखें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए मनोकामना कहें। अगर घर के गमले में विसर्जन कर रहे हैं, तो वह मिट्टी पवित्र हो जाती है और बाद में उसमें तुलसी या कोई शुभ पौधा लगाया जा सकता है।
सावन शिवरात्रि पर श्रद्धा और पूर्ण विधि से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर पूजन करने से जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। सही विसर्जन से यह पूजा पूर्ण होती है और भोलेनाथ की असीम कृपा बनी रहती है।


