Sawan Shiv Puran Katha: जब भगवान शिव ने ली विष्णु जी की कठिन परीक्षा, बाद में दिया था ये वरदान

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Shiv ji ki kahani, Shiv Puran katha: भगवान शिव से असुरों-दैत्यों ही नहीं बल्कि देवताओं ने भी वरदान प्राप्त किया था। क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव ने भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी।

how did lord Vishnu get the sudarshan chakra from shiva
भगवान शिव ने विष्णु जी को क्यों दिया था सुदर्शन चक्र?

How did lord Vishnu get the sudarshan chakra from shiva: इस समय सावन चल रहा है। सावन का महीना भगवान शिव को अतिप्रिय है। सावन के सोमवार का विशेष महत्व है। आज 10 अगस्त 2026 को सावन का दूसरा सोमवार है। मान्यता है कि इस दिन शिव जी का विधि-विधान से पूजन करने से मनुष्य की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। भगवान शिव को 'भोलेनाथ' भी कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करना आसान है। एक बार भगवान शिव की कृपा पाने के लिए भगवान विष्णु ने घोर तपस्या की थी। जिसके परिणामस्वरूप भगवान शिव ने विष्णु जी को अद्भुत और दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र क्यों दिया था, पढ़ें पौराणिक कहानी।

भगवान विष्णु को शिव जी से कैसे मिला सुदर्शन चक्र

शिवमहापुराण के कोटि रुद्रसंहिता के अध्याय 34 में भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। एक बार दानवों-दैत्यों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। तब सभी देवता परेशान होकर भगवान विष्णु के पास आए। तब भगवान विष्णु ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कैलाश पर्वत पर उनकी विधिपूर्वक उपासना की थी। विष्णु जी भगवान शंकर के हजार नामों की स्तुति करने लगे। प्रत्येक नाम पर एक कमल पुष्प महादेव को अर्पित करते। तब भगवान शिव ने उनकी परीक्षा लेने के लिए उनके द्वारा लाए गए हजार कमल में से एक कमल का पुष्प छिपा दिया।

भगवान शिव ने रची लीला

भगवान शिव की यह लीला भगवान विष्णु को पता नहीं चली। एक पुष्प कम मिलने पर भगवान विष्णु उसकी खोज करने लगे। लेकिन भगवान शिव की माया के कारण वह ढूंढ नहीं सके। भगवान विष्णु को ‘कमलनयन’ भी कहा जाता है। तब विष्णु जी ने एक फूल की पूर्ति करने के लिए अपना एक नेत्र निकालकर भगवान शिव को अर्पित कर दिया।

भगवान विष्णु की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उनकी आंख वापस करते हुए वरदान मांगने के लिए कहा। तब भगवान विष्णु ने दानवों और दैत्यों को नाश करने के लिए अजेय शस्त्र का वरदान मांगा था। तब भगवान शिव ने विष्णु जी को अपना सुदर्शन चक्र प्रदान किया।

विष्णु जी ने किया दैत्यों का विनाश

विष्णु जी ने सुदर्शन चक्र से दैत्यों का विनाश किया। इस प्रकार भगवान शिव के दिए सुदर्शन चक्र से विष्णु जी से दैत्यों से सृष्टि की रक्षा की थी और यह सुदर्शन चक्र सदा के लिए विष्णु जी के स्वरूप के साथ जुड़ गया।

सावन में शिव की आराधना से क्या फल मिलता है:

शिव पुराण के अनुसार, सावन में जो मनुष्य भगवान शिव सच्चे मन और भक्ति भाव के साथ आराधना करता है उसे मानसिक शांति, अरोग्य और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस दौरान भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से आध्यात्मिक ऊर्जा और सुख-शांति मिलती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

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फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
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