अगस्त माह का दूसरा एकादशी व्रत कब है? जानें श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत डेट, पूजन और पारण का समय
Sawan putrada ekadashi 2026 kab hai: हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी को व्रत किया जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। जानें श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी व्रत कब रखा जाएगा।

Sawan putrada ekadashi 2026 Date: हर महीने दो एकादशी व्रत पड़ते हैं। हर एकादशी व्रत का अलग महत्व होता है। इस समय सावन माह का शुक्ल पक्ष है। सावन शुक्ल पक्ष में श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाता है। शास्त्रों में पुत्रदा एकादशी व्रत का खास महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत समस्त पापों से मुक्ति दिलाने वाला है और जीवन में सुख-शांति और खुशहाली लाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान सुख प्राप्त होता है। जानें श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी व्रत कब है, पूजन का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय।
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कब है:
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 22 अगस्त को रात 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी और 23 अगस्त को देर सुबह 12 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा।
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत पूजन मुहूर्त:
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। कुछ भक्त इस दिन भगवान शिव की पूजा भी करते हैं। इस दिन पूजन के शुभ मुहू्र्त इसप्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:34 बजे से सुबह 06:14 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 01:25 बजे से दोपहर 02:21 बजे तक।
विजय मुहूर्त- शाम 04:12 बजे से शाम 05:08 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- रात 08:51 बजे से रात 09:11 बजे तक।
अमृत काल - सुबह 07:03 बजे से सुबह 08:51 बजे तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 06:54 बजे से दोपहर 02:14 बजे तक।
रवि योग- सुबह 06:54 बजे से दोपहर 02:14 बजे तक।
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत पारण का समय-
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण 24 अगस्त 2026, सोमवार को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 19 मिनट से सुबह 09 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 07 बजकर 19 मिनट है।
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व:
पद्म पुराण के अनुसार, श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति दिलाता है। इस व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु की कृपा से संतान प्राप्ति, संतान के संकटों का निवारण और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Saumya Tiwariसंक्षिप्त विवरण
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव
सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।
इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान


