पुत्रदा एकादशी पर करें तुलसी से ये काम, संतान सुख, परिवार की खुशहाली की मान्यता

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख, उनकी खुशहाली और परिवार की शांति के लिए इस व्रत को खास माना जाता है। पूजा में भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल और चंदन अर्पित कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है।

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Sawan Putrada Ekadashi 2026: एकादशी का व्रत रखने वालों के लिए सावन की पुत्रदा एकादशी इस बार 23 अगस्त को पड़ रही है। नाम से ही साफ है कि इस एकादशी को संतान से जुड़ी कामनाओं के लिए खास माना जाता है। लेकिन इस दिन की पूजा का महत्व सिर्फ संतान प्राप्ति तक सीमित नहीं है। संतान की सुख-समृद्धि, परिवार की शांति और भगवान विष्णु की कृपा के लिए भी लोग यह व्रत रखते हैं। यही वजह है कि पुत्रदा एकादशी पर पूजा के दौरान किए जाने वाले कुछ कामों को विशेष महत्व दिया जाता है।

तुलसी चढ़ाना क्यों माना जाता है खास

पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा है। विष्णु पूजा में तुलसी का अलग स्थान है और एकादशी के दिन इसे अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी चढ़ाकर उनके मंत्र का जाप किया जाता है। संतान के लिए व्रत रखने वाले लोग पूजा में संतान के अच्छे स्वास्थ्य, सुख और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। एकादशी के व्रत में केवल भोजन से दूरी रखना ही पूरी साधना नहीं है। इस दिन मन, वाणी और व्यवहार में संयम रखना भी उतना ही जरूरी माना गया है। इसलिए पूजा के साथ भगवान विष्णु का स्मरण और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना इस दिन के भाव से जुड़ा है।

पुत्रदा एकादशी का नाम कैसे पड़ा

इस एकादशी से जुड़ी कथा राजा महीजित की है। धार्मिक कथा के अनुसार राजा के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने ऋषियों से इसका कारण पूछा तो उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह मिली। राजा ने विधि से व्रत किया और उसके पुण्य के प्रभाव से संतान सुख मिलने की कथा कही गई है।

इसी कथा के कारण पुत्रदा एकादशी को संतान से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए खास माना जाने लगा। हालांकि आज इसे सिर्फ पुत्र प्राप्ति के व्रत के रूप में देखना सही नहीं होगा। परिवार की खुशहाली और संतान के सुख की कामना भी इससे जुड़ी हुई है।

23 अगस्त को ही क्यों रखा जाएगा व्रत

पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 को रात करीब 2 बजे शुरू होगी और 24 अगस्त की सुबह करीब 4:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा।

पूजा में क्या करें

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। भगवान को पीले फूल, चंदन, फल और तुलसी दल चढ़ाएं। इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ और एकादशी की कथा का श्रवण भी किया जा सकता है। संतान की मंगलकामना रखने वाले लोग भगवान विष्णु के सामने प्रार्थना करें और पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।

व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

एकादशी पर चावल और अनाज का सेवन नहीं करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार कर सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो शरीर पर दबाव डालकर कठोर व्रत रखने की जरूरत नहीं है। इस दिन मांसाहार और शराब से दूर रहने के साथ क्रोध, विवाद और कटु वाणी से बचने की भी सलाह दी जाती है। एकादशी के व्रत का उद्देश्य केवल खान-पान पर नियंत्रण नहीं, बल्कि दिनभर संयम और भगवान की भक्ति में मन लगाना भी माना जाता है।

24 अगस्त को होगा पारण

23 अगस्त को व्रत रखने के बाद 24 अगस्त को द्वादशी में पारण किया जाएगा। पारण का सही समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना चाहिए। उपलब्ध पंचांग गणना में दिल्ली के लिए पारण का समय दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक दिया गया है। पारण के दिन पहले भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत खोलने की परंपरा है। इसके बाद सात्विक भोजन किया जाता है। सामर्थ्य के अनुसार अन्न, फल या भोजन का दान भी किया जा सकता है।

संतान सुख के लिए क्या उपाय करें

पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करना सरल उपाय माना जाता है। संतान की सुख-समृद्धि के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा कर प्रार्थना की जा सकती है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन दान और जरूरतमंद की सहायता को भी शुभ माना गया है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

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योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


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