सावन के भौम प्रदोष पर मंगला गौरी व्रत का विशेष संयोग! नोट कर लें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि
सावन के आखिरी मंगला गौरी व्रत पर भौम प्रदोष का दुर्लभ संयोग! जानिए पंचांग के अनुसार, सही डेट, भ पूजा मुहूर्त, शिव-पार्वती और हनुमान जी की पूजन विधि और मनोकामना पूर्ति के उपाय।

प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हर महीने की त्रयोदशी को भगवान शिव की पूजा का यह विशेष अवसर आता है। इस बार श्रावण शुक्ल त्रयोदशी पर मंगला गौरी व्रत का भी संयोग बन रहा है। मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष भौम प्रदोष कहलाता है। ऐसे दुर्लभ संयोग पर व्रत करने से शिव, पार्वती और हनुमान जी तीनों की कृपा मिलने की संभावना रहती है। भक्तों के लिए यह दिन खास बन गया है।
मंगला गौरी व्रत का विशेष संयोग
सावन मास के मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां गौरी की पूजा का विधान है। सावन के अंतिम मंगला गौरी व्रत पर प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है, क्योंकि दोनों मंगलवार को पड़ रहे हैं। 25 अगस्त को व्रत रखने से दो व्रतों का फल एक साथ मिल सकता है। शिव जी, हनुमान जी और मां गौरी तीनों की कृपा प्राप्त होने का शुभ योग है। यह संयोग भक्तों के लिए दुर्लभ माना जाता है।
भौम प्रदोष व्रत की सही तारीख
पंचांग के अनुसार, श्रावण शुक्ल त्रयोदशी 25 अगस्त मंगलवार सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगी और 26 अगस्त बुधवार सुबह 8 बजे यह तिथि समाप्त हो जाएगी। 25 अगस्त को सूर्यास्त के समय त्रयोदशी मौजूद रहेगी, इसलिए प्रदोष व्रत इसी दिन रखा जाएगा। अगर प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है, तो भौम प्रदोष कहलाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में प्रदोष काल की पूजा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। 25 अगस्त को शाम 5 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक का समय पूजा के लिए उत्तम रहेगा। इस अवधि में भगवान शिव का अभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें। प्रदोष काल में की गई आराधना विशेष फल देती है। समय का ध्यान रखकर विधि-विधान से पूजा संपन्न करें।
व्रत और पूजा की विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। मन में व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। धूप-दीप और फूलों से पूजा करें। पूरे दिन उपवास रखें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग का गंगाजल, दही, शहद, घी से अभिषेक करें। बेलपत्र और फूल चढ़ाएं। माता पार्वती को शृंगार सामग्री अर्पित करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और प्रदोष कथा का पाठ करें। भौम प्रदोष व्रत पर हनुमान जी की भी पूजा करना चाहिए।
व्रत से मिलने वाले लाभ
इस विशेष संयोग पर किया गया व्रत तीनों देवताओं की कृपा दिलाने वाला माना जाता है। शिव-पार्वती की आराधना से जीवन में सुख-शांति आती है। हनुमान जी की कृपा से बाधाएं दूर होती हैं। मंगला गौरी व्रत से वैवाहिक सुख और सौभाग्य बढ़ने की मान्यता है। शुद्ध मन से व्रत रखने पर मन को शांति मिलती है। सही विधि और श्रद्धा से किया गया व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
सावन के भौम प्रदोष पर मंगला गौरी व्रत का यह दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए विशेष अवसर है। सही तारीख मुहूर्त और विधि का पालन करके व्रत रखें, तो शिव पार्वती और हनुमानजी की असीम कृपा प्राप्त होगी।


