Shiv Puja Fal: शिव पुराण के अनुसार मिट्टी के शिवलिंग का पूजन करने से क्या फल मिलता है?
Parthiv shivling puja karne se kya hota hai: पार्थिव शिवलिंग भगवान शिव का मिट्टी से निर्मित एक अस्थायी स्वरूप है। सावन महीने में इसका निर्माण और पूजन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। जानें शिव पुराण के अनुसार, मिट्टी के शिवलिंग का पूजन करने से क्या फल मिलता है।

Mitti ke shivling banakar puja karne ke labh: इस समय सावन चल रहा है। सावन माह में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। महादेव की कृपा पाने के लिए शिव भक्त सावन में कई उपाय करते हैं। कई लोग प्रतिदिन शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, जबकि कुछ लोग प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग का पूजन करते हैं। मिट्टी से बने शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहा जाता है। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए भक्त रुद्राभिषेक कराते हैं। इस अनुष्ठान में भी मिट्टी से बने शिवलिंग की पूजा और अभिषेक किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिव पुराण के अनुसार मिट्टी से बने शिवलिंग का पूजन करने से क्या फल मिलता है और पूजन के बाद पार्थिव शिवलिंग का क्या करना चाहिए। आइए जानें।
मिट्टी के शिवलिंग का पूजन करने से क्या फल मिलता है:
शिव पुराण के अनुसार, मिट्टी से बनाए हुए शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा का पूजन करने से मनुष्य के सभी मनोरथ सफल हो जाते हैं और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। इससे अभीष्ट फलें की प्राप्ति होती है। भगवान शिव के पार्थिव स्वरूप का विधि-पूर्वक पूजन करने से पापों से मुक्ति मिलती है और दुख-दर्द मिटते हैं। मनुष्य सभी सुखों को प्राप्त करते अंत में मोक्ष को जाता है।
शिव पुराण में वर्णित है कि देवी उमा जगत की माता हैं और नाद स्वरूप भगवान शिव पिता हैं। जो व्यक्ति इनकी सेवा करता है उस पर इनका कृपा नित्य बढ़ती जाती है। मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा करने से ऐश्वर्य मिलता है। जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति पाने के लिए भक्ति भाव के साथ शिवलिंग का पूजन करना चाहिए।
पार्थिव शिवलिंग के पूजन के बाद क्या करना चाहिए:
शिव पुराण के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग के पूजन के बाद उनका विधि पूर्वक विसर्जन सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। पूजन संपन्न होने के तुरंत बाद सूर्यास्त से पहले या पूजा समाप्त होने के बाद शिवलिंग को जल में विसर्जित कर देना चाहिए। पार्थिव शिवलिंग को घर में लंबे समय तक या अगले दिन के लिए रखना शुभ नहीं माना जाता है।
पार्थिव शिवलिंग पूजा नियम:
शास्त्रों में पार्थिव शिवलिंग से जुड़े कुछ नियम वर्णित हैं। पार्थिव शिवलिंग का निर्माण हमेशा शुद्ध मिट्टी से ही करना चाहिए। शिवलिंग का निर्माण करते समय मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए। शिवलिंग का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। यह अंगूठे के पर्व के बराबर या अधिकतम 12 अंगुल ऊंचा होना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Saumya Tiwariसंक्षिप्त विवरण
सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।
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सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।
इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।
इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।
विशेषज्ञता
ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
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