सत्यनारायण व्रत 2026: 1 या 2 अप्रैल कब करनी है पूजा? ये है सही डेट और प्रभावशाली मंत्र, विष्णुजी को लगाएं ये भोग

Garima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Satyanarayan Puja: पूर्णिमा पर सत्यनारायण की पूजा और व्रत करना काफी शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि इसके महत्व के बारे में और साथ ही जानेंगे कि इस दिन किन 3 मंत्रों का उच्चारण हमें करना चाहिए?

सत्यनारायण व्रत 2026: 1 या 2 अप्रैल कब करनी है पूजा? ये है सही डेट और प्रभावशाली मंत्र, विष्णुजी को लगाएं ये भोग

हिंदू धर्म में पूर्णिमा के दिन को काफी शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिन सच्चे मन से व्रत रखकर स्नान-दान करने से कई लाभ मिलते हैं। साथ ही इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। भक्त इस दिन सुबह से शाम तक व्रत रखते हैं और पूरे विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बता दें कि पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में मन को शांति मिलती है। धर्म-शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए अच्छे काम का फल कई गुना मिलता है। साथ ही सत्यनारायण का व्रत विशेष रूप से रखने से फायदा मिलता है।

1 या 2 अप्रैल कब रखा जाए व्रत?

पंचांग तिथि की शुरुआत 1 अप्रैल की सुबह 7 बजकर 6 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि की समाप्ति 2 अप्रैल की सुबह 7 बजकर 41 मिनट को होगी। ऐसे में चंद्रोदय 1 अप्रैल को माना जा रहा है जोकि शाम को 6 बजकर 11 मिनट पर होगा। ऐसे में इसी दिन व्रत रखा जाएगा। कल यानी 1 अप्रैल के दिन सत्यनारायण का व्रत रखा जाएगा और इस दिन विधि-विधान से पूजा की जाएगी। आइए अब समझते हैं कि इस व्रत का महत्व क्या है और इसकी पूजा विधि क्या है?

सत्यनारायण व्रत और पूजा का महत्व

सत्यनारायण की पूजा और व्रत सच्चे मन से संकल्प लेकर ही करनी चाहिए। ये पूजा और व्रत भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप को समर्पित होता है। इस दिन मंत्रों के उच्चारण और पूजा-पाठ में मन लगाने से सब कुछ अच्छा होता है। ज्योतिषीय मान्यता है कि पूर्णिमा वाले दिन चंद्रमा की विशेष किरणें पृथ्वी पर आती हैं और ऐसे में मन शांत होता है और सब कुछ स्थिरता की ओर बढ़ता हुआ नजर आता है। सत्यनारायण का व्रत रखने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

सत्यनारायण की पूजा और व्रत विधि

पूर्णिमा वाली सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। इसके बाद पीले रंग के साफ कपड़े पहन लें। अब व्रत और पूजा का संकल्प सच्चे मन से करें। पूजा घर की सफाई करके एक चौकी लगाएं। इस पर पीले रंग का आसन बिछा दें। अब यहां पर भगवान विष्णु की मूर्ति या फिर फोटो रखें। इसी के साथ मां लक्ष्मी की फोटो या फिर मूर्ति रख दें। आप चाहें तो यहां पर श्री यंत्र रख दें। इस पूजा में तुलसी के पत्ते को जरूर शामिल करना चाहिए। वहीं भगवान को इस दौरान पंजीरी, पंचामृत और केले का भोग लगाएं। इसके बाद आरती करें और चंद्रमा को जल अर्पित करें। आखिरी में भगवान से भूल-चूक के लिए माफी मांगकर प्रसाद को बांट दें और इसे ग्रहण करके खुद का व्रत खोल लें।

सत्यनारायण पर करें इन मंत्रों का उच्चारण

1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

2. श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव

3. हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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