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शनिवार के दिन शनि भगवान को क्यों चढ़ाते हैं सरसों का तेल? जानें काले तिल का राज

शनिवार के दिन शनि भगवान को क्यों चढ़ाते हैं सरसों का तेल? जानें काले तिल का राज

संक्षेप:

Saturday Puja: शनिवार का दिन भगवान शनि को समर्पित होता है। इस खास दिन पर उन्हें सरसों का तेल और काला तिल अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि इन चीजों को चढ़ाने से शनिदेव काफी प्रसन्न होते हैं। 

Jan 09, 2026 09:48 pm ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Shani Dev Puja Rituals: हिंदू धर्म में हफ्ते के सातों दिन काफी मायने रखते हैं। हर एक दिन किसी ना किसी देवी या फिर देवता को समर्पित है। शनिवार के दिन भगवान शनि और हनुमान जी की पूजा की जाती है। बात करें शनिदेव की तो इनकी पूजा में खास चीजें लगती हैं। शनिवार की शाम शनिदेव को काले रंग की चीजें अर्पित की जाती है। मान्यता के अनुसार शनिदेव को काला रंग काफी प्रिय होता है और इसी वजह से इस रंग की चीजों को चढ़ाया जाता है। शनिदेव की पूजा में काले तिल और सरसों के तेल का बहुत महत्व है। कहा जाता है कि इन दोनों चीजों को शनिदेव पर चढ़ाने पर वो प्रसन्न होकर सारी मुश्किलें दूर कर देते हैं। बता दें कि इन दोनों चीजों का संबंध काफी पुराना है। नीचे विस्तार से जानें कि आखिर शनिदेव को ये दोनों चीजें इतनी प्रिय क्यों है?

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शनिदेव को क्यों अर्पित करते हैं सरसों का तेल?

इसे लेकर दो तरह की कथाएं प्रचलति हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान हनुमान और शनिदेव के बीच एक बार जंग छिड़ी। इस दौरान शनिदेव को काफी चोट आई। इसके बाद जब शनिदेव परेशान हो गए तब उन्होंने हनुमान जी से मदद मांगी। तभी उन्होंने शनिदेव को सरसों का तेल लगाया साथ ही वरदान दिया कि जब-जब कोई तुम्हें सरसों का तेल चढ़ाएगा, तब तुम्हारा दर्द और भी कम हो जाएगा। तभी से शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। माना जाता है कि इससे प्रसन्न होकर शनिदेव सारे कष्ट दूर कर देते हैं।

जानें सरसों के तेल से जुड़ी दूसरी कथा

दूसरी कथा ये प्रचलित है कि एक दफा रावण ने सभी नवग्रहों को अपने पास बंदी बना लिया था। जब हनुमान मां सीता की खोज करते हुए लंका पहुंचे थे। उसी दौरान उन्होंने शनिदेव को कष्ट में देखा और उन्हें सरसों का तेल लगाया। तब जाकर उनका दर्द खत्म हुआ। इस दौरान शनिदेव ने कहा कि जब भी कोई मुझे सरसों का तेल चढ़ाएगा तब मैं प्रसन्न हो जाऊंगा। साथ ही शनिवार के दिन जो लोग हनुमान की पूजा करेंगे, उन्हें मैं कभी भी कष्ट नहीं दूंगा। साथ ही उनकी सारी बाधाएं खत्म कर दूंगा।

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शनिदेव को क्यों चढ़ाते हैं काला तिल?

शास्त्रों में इस बात का वर्णन हैं कि एक बार ऐसा हुआ था कि गुस्से में आकर सूर्यदेव ने अपने तेज का इस्तेमाल करके शनिदेव के कुंभ को जलाकर भस्म कर दिया था। कुछ समय बाद ही उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है और वो शनिदेव से मिलने का सोचते हैं। जब वो मिलने आते हैं तो शनिदेव उन्हें काला तिल अर्पित करते हैं और इससे सूर्यदेव बहुत खुश होते हैं। बस उस दिन के बाद से शनिदेव को काला तिल भा गया। इसी वजह से माना जाता है कि अगर शनिवार के दिन सच्चे मन से अगर शनिदेव को काला तिल अर्पित किया जाए तो वो जल्दी प्रसन्न होते हैं और हर मनोकामना पूरी करते हैं।

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो


गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।


परिचय और अनुभव

गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।


करियर

गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।


एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच

गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।


व्यक्तिगत रुचियां

काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।


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