क्या आप जानते हैं कि सत्संग सुनने से क्या लाभ मिलता है?

Saumya Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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तुलसीदास ने ‘श्रीरामचरितमानस’ में कहा है- ‘बिनु सतसंग बिबेक न होई’ यानी सत्संग के बिना विवेक नहीं आता। जब तक व्यक्ति का विवेक जाग्रत नहीं होता, तब तक उसे जीवन में सच्चा सुख नहीं मिलता। 

क्या आप जानते हैं कि सत्संग सुनने से क्या लाभ मिलता है?

सत्संग संजीवनी बूटी है। इससे विवेक जाग्रत होता है। सत्संग ही वह औषधि है, जो मृतप्राय मनुष्य को भी शुभता संपन्न बना देती है। मनुष्य का कर्तव्य क्या है और अकर्तव्य क्या है? यह स्पष्ट विवेक केवल सत्संग से प्रकट होता है। भागवत के एकादश स्कंध में भगवान नारदजी से कहते हैं-

नाहं तिष्ठामि वैकुण्ठे, योगिनां हृदये न च। मद्भक्ता यत्र गायन्ति, तत्र तिष्ठामि नारद॥

‘हे नारद! मैं यज्ञ, वेद, तीर्थ, तप और त्याग से वश में नहीं होता, किंतु सत्संग से शीघ्र ही अपने भक्तों के अधीन हो जाता हूं।’ संसार के प्रति सभी आसक्तियां सत्संग नष्ट कर देता है। सत्संग से ही संयम जैसे दिव्य गुण- धैर्य, सदाचार, सेवा और स्नेह का प्राकट्य होता है। इसमें ही जीवन का वास्तविक आनंद, दिशा और उद्देश्य समाहित है। सत्संग से जहां राग, द्वेष, लोभ, मोह, क्रोध जैसे दुर्गुण विलीन होते हैं, वहीं प्रेम, श्रद्धा, करुणा, त्याग और विनय जैसे श्रेष्ठ गुण विकसित होते हैं।

चित्त काे निर्मल करता सत्संग

सत्संग का लाभ अक्षुण्ण है अर्थात यह कभी समाप्त नहीं होता। अन्य सभी लाभ क्षणिक होते हैं, परंतु सत्संग का प्रभाव आत्मिक उत्कर्ष और भगवत्प्राप्ति तक जाग्रत रहता है।

जीवन के समस्त कष्टों, भ्रमों और क्लेशों का एकमात्र समाधान सत्संग है। यह विचारों का अमृत, भावों का रस और आत्मा का पोषण है। सत्संग से चित्त में कोमलता आती है। मन में स्थिरता आती है। भावों में भगवद्संपृक्ति आती है और आत्मा को परमशांति का अनुभव होता है। सत्संग ही वह महान साधन है, जिसके द्वारा धर्मशास्त्रों का ज्ञान, भगवत्प्रेम, सेवाभाव और चरित्र बल प्राप्त होता है। सत्संग की बहुत महिमा है। जीवन में सत्संग को सदैव बनाए रखना चाहिए। संयम अर्थात धैर्य, सदाचार, स्नेह और सेवा जैसे गुण सत्संग के बिना नहीं आते हैं। सत्संग में ही जीवन का वास्तविक आनंद निहित है। जीवन का सर्वोत्तम लाभ सत्संग है। सत्संग सुगम है और इसके बिना भगवत्प्राप्ति नहीं हो सकती।

भगवान भाष्यकार ने तो सत्संग को आत्मोद्धार का मूल मंत्र बताया है। भगवान गौड़पादाचार्य स्पष्ट कहते हैं कि यदि सत्संग न हो, तो मनुष्य ज्ञान नहीं पा सकता और यदि ज्ञान न हो, तो वह अपने वास्तविक स्वरूप को कभी भी जान नहीं पाएगा।

सत्सत्वं हि मोक्षस्य कारणं परमं स्मृतम्।

असत्स तु नो कुर्यात्बुद्धिमान्सत्यवेधिनीम्।।

अर्थात सत्संग ही मोक्ष का परम कारण है।

विवेक और आत्मज्ञान की जाग्रति

बुद्धिमान व्यक्ति को कभी भी दुःसंग नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह विवेक और सत्य के मार्ग से विचलित कर देता है। ‘विवेकचूड़ामणि’ में सत्संग पर विचार करते हुए आद्यगुरु भगवान भाष्यकार ने तीन वस्तुएं संसार में दुर्लभ बताई हैं, जो केवल ईश्वर अनुग्रह से ही प्राप्त हो सकती है। मनुष्य शरीर, मोक्ष की तीव्र इच्छा (मुमुक्षुता) तथा महापुरुषों की संगति (सत्संग) और यही मोक्ष का द्वार है। अतः यदि दुर्लभ मानव शरीर व सत्संग प्राप्त हो भी जाए, तो उसका सार्थक उपयोग करना उससे भी अधिक दुर्लभ है, क्योंकि सत्संग से ही विवेक और आत्मज्ञान जाग्रत होता है।

सत्संग की महत्ता यज्ञ, दान, तीर्थ आदि से भी कई गुणा अधिक है। सत्संग ही हमें सन्मार्ग की ओर ले जाता है। मनुष्य को इस जीवनकाल में अपने ‘अभीष्ट’ का ज्ञान ही नहीं हो पाता है। वह इस माया रूपी संसार में अपनी अतृप्त कामनाओं की पूर्ति में भागता हुआ मृत्यु को प्राप्त होता है। मनुष्य जीवन का एकमात्र ‘अभीष्ट’ आत्मज्ञान और भगवत्प्राप्ति है। सत्संग से ही हमें इस ‘अभीष्ट’ की सहज अनुभूति होती है और हम भगवत्प्राप्ति के कार्य में प्रवृत्त होते हैं।

आध्यात्मिक शक्ति का विकास

सत्संग ही जीवन की सभी समस्याओं का एकमात्र निदान है। प्रभु के नाम-स्मरण तथा कीर्तन से महान आध्यात्मिक शक्ति का प्रादुर्भाव होता है। अतः प्रत्येक क्षण भगवन्नाम स्मरण करते रहें, क्योंकि प्रभु के नाम का सतत और निर्बाध स्मरण मानसिक शांति, आत्मिक संतृप्ति, अंतःकरण की पवित्रता और सत-चित-आनंद प्रदान करने वाला है।

दिव्य उपलब्धियों की प्राप्ति

जीवन में अलौकिक परिवर्तन लाने हेतु एक ही मुख्य उपाय है- ‘सत्संग,’ जिससे विचार, भावना, स्वभाव, दैनिक जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन आ सकता है। हृदय में नवनीत-सी कोमलता, चित्त की अडोल स्थिरता, अलौकिक एवं रसपूर्ण भगवद्भाव, धर्मशास्त्रों का गूढ़ एवं व्यावहारिक ज्ञान, महापुरुषों के जीवन से प्रेरणाप्रद शिक्षाएं, आत्मस्वरूप का दिव्य साक्षात्कार, सेवा की शास्त्रीय प्रणाली का सुस्पष्ट बोध, संकीर्तन की भावविभोर परंपरा तथा सेवा-शृंगार के माधुर्य में वृद्धि- ये समस्त दिव्य उपलब्धियां केवल और केवल सत्संग रूपी ज्ञान-सरोवर में डुबकी लगाने से ही संभव हैं। सत्संग से ही हमारा विवेक जाग्रत होता है और विवेक से ही मोक्ष का द्वार खुलता है।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
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