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Sarva Pitru Amavasya : सर्वपितृ अमावस्या आज, पितृ होंगे विदा, करें ये खास उपाय, दान

Sarva Pitru Amavasya : सर्वपितृ अमावस्या आज, पितृ होंगे विदा, करें ये खास उपाय, दान

संक्षेप: Sarva Pitru Amavasya 2025 : आश्विन मास की अमावस्या इस बार रविवार, 21 सितंबर 2025 यानी आज है। इसे हिन्दू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह दिन उन सभी पितरों को याद करने का माना जाता है, जिनकी तिथि हमें ज्ञात न हो या जिन्हें हम अनजाने में भूल गए हों। 

Sun, 21 Sep 2025 09:10 AMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Sarva Pitru Amavasya 2025 : आश्विन मास की अमावस्या इस बार रविवार, 21 सितंबर 2025 यानी आज है। इसे हिन्दू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह दिन उन सभी पितरों को याद करने का माना जाता है, जिनकी तिथि हमें ज्ञात न हो या जिन्हें हम अनजाने में भूल गए हों। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान दिवंगत आत्माएं धरती पर आती हैं। इन्हें श्रद्धा और आदर के साथ विदा करने के लिए सर्वपितृ अमावस्या का दिन विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष अमावस्या शनिवार की मध्यरात्रि के बाद 12:07 बजे से शुरू हो चुकी है और 21 सितंबर को मध्यरात्रि के बाद 1:47 बजे तक रहेगी। चूंकि यह उदया तिथि में पड़ रही है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। सर्वपितृ अमावस्या सिर्फ पितरों की श्रद्धांजलि का दिन नहीं है, बल्कि यह पितृपक्ष के समापन का दिन भी है। इस दिन किए गए कार्य न केवल पितरों को शांति देते हैं, बल्कि जीवित परिवारजनों के लिए भी सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का संचार करते हैं।

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सर्वपितृ अमावस्या का महत्व

हिन्दू धर्म में पितरों का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए श्राद्ध और तर्पण से न केवल दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है, बल्कि जीवित व्यक्ति के लिए भी सुख, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। पितृपक्ष के अंत में यह अमावस्या पितरों की विदाई का दिन मानी जाती है। इस दिन पितरों के लिए श्राद्धकर्म और दान करना विशेष फलदायक माना जाता है।

करें ये उपाय-

स्नान और शुद्धिकरण

सुबह प्रातःकाल स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें। स्नान के समय तिलयुक्त जल का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।

दान और भोजन

अमावस्या के दिन 16 भूदेवों को भोजन कराने का विधान है। इसके अलावा गाय, कुत्ते और विशेषकर कौओँ को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायक है। परिवार में किसी ब्राह्मण का भोजन कराना भी बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन दान करते समय वस्त्र, द्रव्य और भोजन का दान करना चाहिए।

श्राद्ध और तर्पण

मुख्य श्राद्धकर्म में पितरों के नाम पर जल और तिल अर्पित करना शामिल है। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हाथ जोड़कर जल अर्पित करना चाहिए। यदि व्यक्ति विधि-विधान से सम्पूर्ण श्राद्ध करने में असमर्थ हो, तो वह प्रातःकाल स्नानादि कर तिलयुक्त जल से दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित कर सकते हैं और इस प्रकार कह सकते हैं: “सूर्यादि दिक् पालो (सभी दिशाओं के देवता सूर्यदेव), मेरे पास धन-धान्य एवं वस्तुओं का अभाव है। इसलिए विधि-विधानपूर्वक आपकी प्रसन्नता के लिए श्राद्ध आदि कृत्य करने में असमर्थ हूं।” इसके पश्चात हाथ जोड़कर पितरों को श्रद्धा और प्रेम के साथ नमन करें।

दीप प्रज्वलन और भोज्यद्रव्य

शाम को मुख्य द्वार पर दीप जलाना और उसके पास भोज्यद्रव्य रखना चाहिए। ऐसा करने से पितृगण को जाते समय प्रकाश मिले और उनका स्वागत सम्मानपूर्वक किया जा सके।

पूजा विधि:

सुबह स्नान करें।

तिलयुक्त जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करें।

दोनों हाथ आकाश की ओर उठाकर जल अर्पित करें और पितरों को नमन करें।

इस सरल विधि से भी पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और आप अपने घर में सुख-समृद्धि और शांति ला सकते हैं।

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Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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