
Saphala Ekadashi 2025: कब है सफला एकादशी? जानें व्रत रखने और पारण करने का सही तरीका
Saphala Ekadashi Vrat Details: हिंदू धर्म में सफला एकादशी का बहुत महत्व होता है। इस व्रत का संबंध भगवान विष्णु से होता है। इस व्रत को सच्चे मन से रखने से कई लाभ मिलते हैं। तो चलिए जानते हैं इसे रखने का सही तरीका…
हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और त्योहार पड़ते हैं, जिनका बहुत महत्व होता है। बात की जाए सफला एकादशी की तो इसे बेहद ही पवित्र और शुभ व्रत माना जाता है। दरअसल ये पौष माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी होती है। इसे साल की अंतिम एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। सफला शब्द का मतलब होता है सफलता देने वाली। इस व्रत को रखने से हर एक मनोकामना पूरी होती है। मान्यता के अनुसार इस व्रत के माध्यम से भगवान विष्णु अपनी कृपा बरसाते हैं और इसके बाद जिंदगी में आने वाली हर बाधा खत्म हो जाती है। इसके अलावा इस व्रत के कई अन्य फायदे भी होते हैं। तो चलिए जानते हैं कि इस साल ये व्रत कब है और इसे रखने का सही तरीका क्या है? इसी के साथ जानेंगे कि इस व्रत को रखने से क्या-क्या फायदे मिलते हैं?
कब है सफला एकादशी?
हिंदू कैलेंडर के मुताबिक पौष का महीना काफी शुभ माना जाता है। इसी महीने में सफला एकादशी का व्रत होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल सफला एकादशी 15 दिसंबर को है। इस दिन सोमवार पड़ेगा। पंचांग के अनुसार एकादशी की शुरुआत 14 दिसंबर को शाम 6:49 बजे होगी और ये अगले दिन यानी 15 दिसंबर को रात 9:19 बजे इसका समापन होगा। बता दें कि इस व्रत के कई नियम होते हैं, जिसे सही से पूरा करना जरूरी होता है। सही विधि-विधान से की गई सफला एकादशी को ही सफल माना जाता है।
सफला एकादशी व्रत के लाभ
इस व्रत का सही तरीका जान लेने से पहले जानते हैं कि इससे मिलने वाले लाभ के बारे में। सफला एकादशी की गिनती उन व्रतों में होती है, जिसे रखने मात्र से जिंदगी से आधी मुश्किलें दूर हो सकती हैं। साथ ही व्रती के सारे पाप भी मिट जाते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि सफला एकादशी का व्रत रखने से मोक्ष भी मिल जाता है। इस व्रत को सच्चे मन से रखने से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही इसे रखने से जिंदगी से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति मिलती है।
सफला एकादशी रखने का सही तरीका
हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार इस व्रत से एक दिन पहले से ही सात्विक भोजन करना शुरू कर देना चाहिए। साथ ही सूरज ढलने के बाद भोजन करने से बचना चाहिए। एकादशी वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान इत्यादि कर लेना चाहिए। इसके बाद साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। सबसे पहले इस व्रत के लिए संकल्प लें कि सब कुछ सही से पूरा हो जाए। ध्यान रखें कि इस दौरान भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर आपके सामने हो। इसके बाद भगवान की मूर्ति को गंगाजल से शुद्ध करें। बाद में उन्हें हल्दी, पीले फूल, तुलसी, फल, तिल और पीला चंदन अर्पित करें। इसके बाद दीप और धूप इत्यादि जलाएं। बाद में भगवान विष्णु के लिए भोग लगाएं। भोग में आप मिठाई ओर फल चढ़ाएं। इसी के साथ सफला एकादशी व्रत का पाठ जरूर करें। बता दें कि ये व्रत निर्जला होता है। इस व्रत के दौरान फल का सेवन किया जा सकता है। इस दौरान अनाज और नमक का सेवन गलती से भी नहीं करना चाहिए।
ऐसे करें सफला एकादशी का पारण
सफला एकदाशी व्रत के अगले दिन पारण करना होता है। इस व्रत के पारण के लिए भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद दान दक्षिणा करें और गाय को भोजन करवाएंगे तो और भी अच्छा होगा। पारण करने के बाद आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।





