कहां है सांवलिया सेठ मंदिर, क्या है महत्व और करोड़ों का आता है चढ़ावा
सांवलिया सेठ मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित एक प्रसिद्ध आस्था स्थल है, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां भगवान श्रीकृष्ण के सांवरे स्वरूप की पूजा की जाती है और मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना यहां अवश्य पूरी होती है।

सांवलिया सेठ मंदिर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित एक प्रसिद्ध आस्था स्थल है, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां भगवान श्रीकृष्ण के सांवरे स्वरूप की पूजा की जाती है और मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना यहां अवश्य पूरी होती है। हर साल लाखों भक्त इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं। साथ ही, हर महीने यहां करोड़ों रुपये का चढ़ावा चढ़ता है, जो इसकी गहरी आस्था और लोकप्रियता को दर्शाता है। सुबह की पहली आरती से लेकर देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। चलिए जानते हैं कि सांवलिया सेठ मंदिर का महत्व और इतिहास क्या है?
सांवलिया सेठ मंदिर का इतिहास
सांवलिया सेठ मंदिर के इतिहास की बात करें, तो यह मंदिर 400 साल पुराना माना जाता है। मंदिर क लेकर पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के मुताबिक एक संत को स्वप्न में भगवान श्रीकृष्ण ने दर्शन देकर जमीन में दबे अपने विग्रह को निकालने का संकेत दिया था। इसके बाद खुदाई करने पर भगवान की मूर्ति प्राप्त हुई, जिसे बाद में मंदिर में विधि-विधान से स्थापित किया गया। समय के साथ इस मंदिर की ख्याति बढ़ती गई और आज यह राजस्थान के सबसे समृद्ध मंदिरों में शामिल है।
हर साल होता है दिव्य मेले का आयोजन
यहां हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की दशमी, एकादशी और द्वादशी को तीन दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता है। विशेष रूप से एकादशी के दिन भादसोड़ा और बागुंड से भगवान के बाल स्वरूप की शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।
सांवरिया सेठ धाम का महत्व
सांवलिया सेठ मंदिर को “सेठ” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां भगवान को व्यापारी स्वरूप में पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन करने से धन, व्यापार और करियर से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं। भक्त अपनी आय का एक हिस्सा श्रद्धा से भगवान को अर्पित करते हैं, जिसके कारण यह मंदिर आर्थिक रूप से भी काफी समृद्ध माना जाता है।
एक महीने में इतने करोड़ का दान
हर महीने यहां करोड़ों का दान आता है। इस अप्रैल 2026 में इतने करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाया गया है जिसमें पुराने सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। इस बार मंदिर में मात्र एक महीने में 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपए का अभूतपूर्व चढ़ावा प्राप्त हुआ है। इस चढ़ावे में करीब 1 करोड़ रुपए मूल्य का 660 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना और लगभग 2 करोड़ रुपए मूल्य की 84 किलो 620 ग्राम चांदी अर्पित की गई है।
कैसे पहुंचे सांवरिया सेठ धाम
सड़क मार्ग: यह मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (NH-27) पर स्थित है, जिससे उदयपुर, कोटा और जयपुर से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 40 किमी दूर है। यहां से टैक्सी या बस की सुविधा उपलब्ध है।
हवाई मार्ग: निकटतम एयरपोर्ट महाराणा प्रताप एयरपोर्ट है, जो मंदिर से करीब 65 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां से भी टैक्सी या अन्य साधनों से मंदिर पहुंचा जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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