Santan Saptami: सितंबर में संतान सप्तमी व्रत कब है? जानिए डेट, पूजन मुहूर्त और व्रत का महत्व

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Santan saptami vrat kis din rakha jayega: हिंदू धर्म में संतान सप्तमी व्रत का खास महत्व है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखती हैं। जानें संतान सप्तमी कब है।

Santan Saptami Vrat 2026
संतान सप्ती व्रत कब है 2026

Santan Saptami Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में संतान सप्तमी व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्रत हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों के सुख, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना से यह व्रत रखती हैं। कुछ जगहों पर यह व्रत पति-पत्नी दोनों मिलकर रखते हैं। हिंदू धर्म में संतान को ईश्वर का आशीर्वाद माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि संतान परिवार और वंश की परंपरा को आगे बढ़ाती है। इस व्रत में मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यह व्रत आमतौर पर अगस्त या सितंबर महीने में आता है। जानें इस बार संतान सप्तमी व्रत कब रखा जाएगा।

संतान सप्तमी व्रत 2026 कब है:

पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 17 सितंबर को सुबह 10 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगी और 18 सितंबर 2026 को दोपहर 01 बजकर 01 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि मान्य होने के कारण संतान सप्तमी का व्रत 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा।

संतान सप्तमी व्रत का धार्मिक महत्व:

मान्यता है कि संतान सप्तमी व्रत करने से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। संतान की रक्षा होती है। और बच्चों को उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस व्रत के प्रभाव से ग्रह दोष और बाधाएं दूर होती हैं।

संतान सप्तमी पूजन मुहूर्त 2026:

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:59 बजे से सुबह 06:45 बजे तक।

अभिजित मुहूर्त- सुबह 01:19 बजे से सुबह 02:09 बजे तक।

विजय मुहूर्त- दोपहर 03:49 बजे से शाम 04:38 बजे तक।

गोधूलि मुहूर्त- रात 07:57 बजे से सुबह 08:20 बजे तक।

सायाह्न सन्ध्या- रात 07:57 बजे से रात 09:07 बजे तक।

अमृत काल- सुबह 09:24 बजे से सुबह 11:11 बजे तक।

संतान सप्तमी पूजा विधि:

संतान सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठें। घर के पूजास्थल की साफ-सफाई करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें। अब एक लोटा जल भरकर सामने रखें और व्रत का संकल्प लें। भगवान शंकर को वस्त्र अर्पित करें और माता लक्ष्मी को सुहाग का सामान और चुनरी आदि अर्पित करें। अब फूल, फल, रोली, अक्षत और मिठाई आदि अर्पित करें। धूप और दीप जलाएं। व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती उतारें। भगवान से संतान सुख की प्रार्थना करें। अंत में भोग लगाएं और प्रसाद वितरित करें। इस व्रत में मीठी पूरी या पुए का भोग लगाया जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Saumya Tiwari

लेखक के बारे में

Saumya Tiwari

संक्षिप्त विवरण

सौम्या तिवारी लाइव हिन्दुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा हैं और इस संस्थान के साथ करीब 5 वर्षों से अधिक समय से जुड़ी हैं। इन्हें डिजिटल पत्रकारिता में करीब 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यहां वह ग्रह राशि परिवर्तन, टैरो, वैदिक ज्योतिष, फेंगशुई, अंकराशि, रत्न शास्त्र और व्रत-त्योहार आदि से जुड़ी खबरें लिखती हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव

सौम्या तिवारी की ग्रह राशि परिवर्तन, व्रत-त्योहार, सामुद्रिक शास्त्र, अंकज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं फेंगशुई, कथा-कहानी जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ है। उन्हें ज्योतिष एवं धार्मिक विषयों में करीब 6 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर डिप्टी कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं और धर्म व ज्योतिष (एस्ट्रोलॉजी) सेक्शन का हिस्सा हैं।


इसके अलावा उन्होंने मनोरंजन (एंटरटेनमेंट) और राजनीतिक (पॉलिटिक्स) विषयों पर भी विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम किया है। लाइव हिन्दुस्तान में सौम्या की टॉप परफॉर्मेंस रही है, जिसके लिए उन्हें कई बार पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। खाली समय में वह धार्मिक ग्रंथों और पुराणों का अध्ययन करना और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना पसंद करती हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

सौम्या तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (बीए) किया है और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से जनसंचार एवं पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा प्राप्त किया है। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें हैदराबाद की लोकल न्यूज वेबसाइट इंडिलिक्स से पहली नौकरी का प्रस्ताव मिला।


इसके बाद वह जनसत्ता (द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप), द क्विंट और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़ी रहीं। साल 2020 में वह लाइव हिन्दुस्तान के धर्म व ज्योतिष सेक्शन का हिस्सा बनीं।


व्यक्तिगत रुचियां

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की रहने वाली सौम्या तिवारी को धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों की जानकारी जुटाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें नई-नई जगहों पर घूमने का भी शौक है।


विशेषज्ञता

ग्रह और नक्षत्रों का राशि पर असर
फेंगशुई
वास्तु शास्त्र
अंक शास्त्र
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें Navratri 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Durga Aarti, Durga Chalisa, Durga Stuti, Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan।
Hindi Newsधर्म न्यूज़सितंबर में संतान सप्तमी व्रत कब है? जान लें डेट, मुहूर्त और व्रत का फल