Sankashti Chaturthi Puja Samagri: संकष्टी चतुर्थी की पूजा सागम्री करें नोट, ये है व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त

Apr 05, 2026 12:16 am ISTGarima Singh लाइव हिन्दुस्तान
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Sankashti Chaturthi Puja Details: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी की पूजा और व्रत का विशेष महत्व होता है। वैशाख के महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी की पूजा से जुड़ी खास डिटेल्स यहां पर लें-

Sankashti Chaturthi Puja Samagri: संकष्टी चतुर्थी की पूजा सागम्री करें नोट, ये है व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त

Sankashti Chaturthi Puja Details: सनातन धर्म में हर महीने कई तीज-त्योहार पड़ते हैं। हर एक व्रत का अपना विशेष महत्व होता है। वैशाख का महीना अब शुरू हो गया है और इसमें कई ऐसे व्रत पड़ने वाले हैं जिन्हें लेकर लोगों की आस्था देखते ही बनती है। इसी महीने में संकष्टी चतुर्थी पड़ेगी। ये हर महीने में पड़ने वाला व्रत है। हिंदू पंचांग के हिसाब से हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत पड़ता है। इस व्रत को विकट संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस व्रत में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है।

माना जाता है कि जो लोग सच्चे मन से इस दिन की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं तो उनकी हर मनोकामना पूरी होती है और साथ ही सारे काम बनने लगते हैं। जिन लोगों के काम में बार-बार खलल पड़ती है, उन्हें इस दिन का व्रत जरूर रखना चाहिए। आइए जानते हैं व्रत से जुड़ी कुछ डिटेल्स के बारे में।

लोगों के मन में संकष्टी चतुर्थी व्रत की सही डेट को लेकर अक्सर कन्फ्यूजन बना रहता है। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि व्रत की सही तारीख क्या है और इसका पारण वगैरह कैसे करना है?

कब है वैशाख संकष्टी चतुर्थी

वैशाख महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को ही संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस साल यह तिथि 5 अप्रैल, रविवार से शुरू हो रही है। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि की शुरुआत सुबह 10 बजकर 40 मिनट से होगी और इसका समापन अगले दिन यानी 6 अप्रैल को दोपहर में होगा। इसलिए व्रत और पूजा इसी तिथि को ध्यान में रखकर की जाएगी।

संकष्टी चतुर्थी पूजा की सामग्री

संकष्टी चतुर्थी की पूजा के लिए सबसे पहले भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर की जरूरत पड़ती है। पूजा घर में सबसे पहले इसे स्थापित करें। इस पूजा में अक्षत, रोली, चंदन और कुमकुम का इस्तेमाल किया जाता है। भगवान गणेश को दूर्वा बहुत प्रिय होती है और इसलिए दूर्वा को पूजा में जरूर शामिल करें। पूजा के लिए धूप, अगरबत्ती और शुद्ध घी का दीया भी जरूरी है। इसके अलावा कलश, मौली, सुपारी और गंगाजल भी पूजा में इस्तेमाल किए जाते हैं। आरती के समय कपूर और आरती की थाली को भी साथ में ही रखें। भगवान गणेश को चढ़ाने के लिए फूल-माला और फल जरूर रखें। प्रसाद के लिए आपको लड्डू और मोदक की जरूरत पड़ेगी।

ये है पारण का समय

व्रत का पारण करना जरूरी है। बता दें पारण का मतलब समापन से है। सिर्फ व्रत रख लेना ही काफी नहीं होता है, उसका पारण भी करना जरूरी होता है। पंचांग के हिसाब से संकष्टी चतुर्थी का पारण 5 अप्रैल की रात 9 बजकर 21 मिनट पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ ही करें। पारण के समय भगवान गणेश की पूजा जरूर करें।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Garima Singh

लेखक के बारे में

Garima Singh

शॉर्ट बायो: गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।

परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।

करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।

एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।

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