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आज कहां है समुद्र मंथन का साक्षी मंदार पर्वत? मकर संक्रांति पर दिखता है अद्भुत चमत्कार

आज कहां है समुद्र मंथन का साक्षी मंदार पर्वत? मकर संक्रांति पर दिखता है अद्भुत चमत्कार

संक्षेप:

makar sankranti 2026: समुद्र मंथन से जुड़ा रहस्यमयी मंदार पर्वत आज भी बिहार में मौजूद है, जहां मकर संक्रांति पर ऐसा चमत्कार होता है, जिसे देखने लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

Jan 12, 2026 12:03 am ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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makar sankranti 2026: हिंदू धर्मग्रंथों में समुद्र मंथन की कथा बेहद प्रसिद्ध है। इसी मंथन से अमृत निकला था, जिससे देवता अमर हुए, और विष निकला जिसे भगवान शिव ने ग्रहण किया। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि समुद्र मंथन के लिए जिस मंदार पर्वत का उपयोग किया गया था, वह आज भी धरती पर मौजूद है। यह रहस्यमयी पर्वत बिहार के बांका जिले में स्थित है और आज भी आस्था, चमत्कार और पौराणिक साक्ष्यों का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यही मंदार पर्वत भगवान विष्णु का विश्राम स्थल भी रहा है और यहीं देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था।

भागलपुर से 50 किमी दूर पौराणिक धरोहर

भागलपुर शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित यह पर्वत करीब 800 फीट ऊंची ग्रेनाइट की पहाड़ी है। दूर से देखने पर यह पहाड़ी जितनी मनोरम लगती है, उतनी ही रहस्यमयी भी है। पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन के दौरान जिन घटनाओं का वर्णन मिलता है, उनके कई निशान आज भी इस पर्वत पर देखे जा सकते हैं।

वासुकी नाग के निशान आज भी मौजूद

मंदार पर्वत पर करीब 10 मीटर से ज्यादा लंबे मोटी रेखा जैसे निशान मौजूद हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान वासुकी नाग को इसी पर्वत के चारों ओर लपेटा गया था और मंथन किया गया था। यही वजह है कि इन निशानों को वासुकी नाग का प्रतीक माना जाता है। यही नहीं, इस पर्वत पर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मधुसूदन मंदिर भी स्थित है, जो अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

मधुसूदन मंदिर से जुड़ी मान्यता

मधुसूदन मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से बनी भगवान श्रीकृष्ण की छोटी लेकिन अत्यंत प्रभावशाली प्रतिमा स्थापित है। मान्यता है कि मधु नामक राक्षस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण इसी मंदार पर्वत पर विश्राम करने आए थे। उसी स्मृति में इस मंदिर की स्थापना की गई।

मकर संक्रांति पर दिखता है अद्भुत चमत्कार

हर साल मकर संक्रांति के दिन मंदार पर्वत और मधुसूदन मंदिर में भव्य मेला लगता है। इस मौके पर लाखों श्रद्धालु दूर दूर से यहां पहुंचते हैं। प्रशासन भी मेले को लेकर विशेष तैयारियां करता है। मंदिर परिसर में स्थित पापहरणी कुंड को लेकर एक अद्भुत मान्यता है। कहा जाता है कि मकर संक्रांति से एक रात पहले इस कुंड का पानी काफी नीचे चला जाता है और भीतर रखे शंख दिखाई देने लगते हैं। लेकिन अगले ही दिन, यानी मकर संक्रांति पर, पानी का स्तर अपने आप बढ़ जाता है। यह दृश्य साल में सिर्फ एक बार ही देखने को मिलता है।

हर साल निकलती है भगवान मधुसूदन की रथ यात्रा

मधुसूदन मंदिर में हर वर्ष भगवान श्रीकृष्ण की भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा में शामिल होने के लिए उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक के श्रद्धालु मंदार पर्वत पहुंचते हैं। भक्त स्वयं भगवान के रथ को खींचते हैं, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति वह दिन होता है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ खरमास समाप्त होता है और शुभ कार्यों की दोबारा शुरुआत होती है। इस दिन से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारंभ होती है, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को मनाया जाएगा।

Himanshu Tiwari

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Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

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