सकट चौथ व्रत आज, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय, चांद निकलने का समय से लेकर सबकुछ

Jan 06, 2026 12:11 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान
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सकट चौथ को लोग संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट और माघ चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा संतान के ऊपर आने वाले हर संकट को दूर कर देती है। इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देना बहुत खास माना जाता है।

सकट चौथ व्रत आज, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय, चांद निकलने का समय से लेकर सबकुछ

Sakat Chauth 2026: सकट चौथ को लोग संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट और माघ चतुर्थी के नाम से भी जानते हैं। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा संतान के ऊपर आने वाले हर संकट को दूर कर देती है। इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देना बहुत खास माना जाता है। हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि जो माता इस दिन व्रत रखती हैं, उनकी संतान निरोगी, दीर्घायु और सुखी जीवन पाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए इस दिन उनकी सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन की परेशानियां भी दूर होती हैं। इस साल सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और पूरे परिवार की सुख-समृद्धि के लिए उपवास करती हैं। मान्यता है कि सकट चौथ पर गणपति की कृपा से बच्चों पर आने वाले सभी संकट टल जाते हैं।

मुहूर्त-

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - जनवरी 06, 2026 को 08:01 ए एम बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त - जनवरी 07, 2026 को 06:52 ए एम बजे

सकट चौथ के दिन चन्द्रोदय समय - 08:54 पी एम

ब्रह्म मुहूर्त 05:26 ए एम से 06:21 ए एम

अभिजित मुहूर्त 12:06 पी एम से 12:48 पी एम

विजय मुहूर्त 02:11 पी एम से 02:53 पी एम

गोधूलि मुहूर्त 05:36 पी एम से 06:04 पी एम

अमृत काल 10:46 ए एम से 12:17 पी एम

निशिता मुहूर्त 12:00 पी एम से 12:54 ए एम, जनवरी 07

सर्वार्थ सिद्धि योग 07:15 ए एम से 12:17 पी एम

सकट चौथ की पूजा विधि

सकट चौथ के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें। गणेश जी को फूल, दूर्वा और तिल के लड्डू अर्पित करें। पूजा के दौरान पूरे मन से “ॐ गणपतए नम:” मंत्र का जाप करें, इससे विघ्नहर्ता गणेश की विशेष कृपा मिलती है। संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए सकट चौथ की व्रत कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। शाम को सूर्यास्त के बाद दोबारा स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा की तैयारी करें। गणेश जी के पास एक कलश में जल भरकर रखें, धूप-दीप जलाएं और तिल के लड्डू, शकरकंद, अमरूद, गुड़ और घी का भोग लगाएं। कई स्थानों पर परंपरा के अनुसार तिलकूट का बकरा भी बनाया जाता है। पूजा पूर्ण होने के बाद रात्रि में जब चंद्रमा दिखाई दे, तब दूध और जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और इसके बाद व्रत का पारण करें। कुछ जगहों पर परंपरा अनुसार तिल से बने बकरे की गर्दन घर का कोई सदस्य काटता है। इस तरह श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से भगवान गणेश संतान के सभी संकट दूर करते हैं।

सकट चौथ की पूजा सामग्री लिस्ट- लकड़ी की चौकी, पीला जनेऊ, सुपारी, पान का पत्ता, गंगाजल, लौंग, इलायची, सिंदूर, अक्षत, मौली, रोली, मेहंदी, 21 गांठ दूर्वा, लाल फूल, भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर, दीप-धूप, तिल के लड्डू, फल और व्रत कथा की पुस्तक रखी जाती है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए दूध, गंगाजल, कलश और थोड़ी चीनी रखी जाती है।

करें ये उपाय- शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान गणेश की पूजा में पान चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। माना जाता है कि मां लक्ष्मी को भी पान बहुत प्रिय है। इसलिए सकट चौथ की पूजा में गणेश जी को पान अर्पित करने से धन और समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है।

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लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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