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Sakat Chauth Vrat Katha in Hindi: आज सकट चौथ पर पढ़ें गणेश जी, देवरानी, चौथ माता की पौरणिक कथा, इनके बिना अधूरा है व्रत

Sakat Chauth Vrat Katha in Hindi: आज सकट चौथ पर पढ़ें गणेश जी, देवरानी, चौथ माता की पौरणिक कथा, इनके बिना अधूरा है व्रत

संक्षेप:

 Sakat chauth vrat katha kahani:एक शहर में देवरानी-जेठानी रहती थी। देवरानी गरीब थी और जेठानी अमीर थी। देवरानी हमेशा गणेश जी का पूजन और व्रत करती थी। वह जेठानी के घर पर काम करती थी और जो कुछ बचता था, वो घर लेकर जाती थी

Jan 06, 2026 04:48 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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sakat chauth vrat ki kahani: सकट चौथ पर भगवान श्रीगणेश जी को समर्पित होता है। इस दिन गणेश जी को ध्यान करें, सुबह स्नान करें, पूजा किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा करने से सबसे ज्यादा लाभ होता है। इस दिन व्रत करने वाले पर भगवान की कृपा हमेशा बनी रहती है। संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत किया जाता है। सकट चौथ का व्रत रखने से संतान के लिए फलदायी होता है तथा संतान के सारे दुख खत्म हो जाते हैं। इस बार सकट चौथ आज 6 जनवरी 2026 को मनाई जा रही है। इस दिन गणेश जी कथा के अलावा देवरानी और जेठानी से जुड़ी कथा को पढ़ना चाहिए। पहले पढ़ें गणेश जी से जुड़ी कथा -

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गणेश जी से जुड़ी कथा

एक बार भगवान गणेश बाल रूप में चुटकी भर चावल और चम्मच में दूध लेकर पृथ्वी लोक में निकले। वे सबको अपनी खीर बनाने को कहते जा रहे थे, लेकिन सबने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। इसी दौरान एक गरीब बुढ़िया उनकी खीर बनाने के लिए तैयार हो गई और उसने चूल्हे पर एक भिगोना रख लिया। इस पर गणेश जी ने घर का सबसे बड़ा बर्तन चूल्हे पर चढ़ाने को कहा। बुढ़िया ने बाल लीला समझते हुए घर का बड़ा भगोना उस पर चढ़ा दिया।

गणेशजी के दिए चावल और दूध बढ़ गए और पूरा भगोना उससे भर गया। इसी बीच गणेश जी वहां से चले गए और बोले अम्मा जब खीर बन जाए तो बुला लेना। पीछे से बुढ़िया के बेटे की बहू ने भी चुपके से एक कटोरा खीर खाने के बाद एक कटोरा खीर छिपा दी। अब जब खीर तैयार हो गई तो बुढिया माई ने आवाज लगाई-आजा रे गणेशा खीर खा ले। बोली, आजा रे गणेस्या खीर खा ले। तभी गणेश जी वहां पहुंच गए और बोले कि मैंने तो खीर पहले ही खा ली। तब बुढ़िया ने पूछा कि कब खाई तो वे बोले कि जब तेरी बहू ने खाई तभी मेरा पेट भर गया। बुढ़िया ने इस पर माफी मांगी। इसके बाद जब बुढ़िया ने बाकी बची खीर के इस्तेमाल के बारे में पूछा तो गणेश जी ने उसे नगर में बांटने को कहा। और जो बचें उइसे अपने घर में जमीन के नीचे दबा दें। अगले दिन जब बुढ़िया उठी तो उसे अपनी झोपड़ी महल में बदली हुई और खीर के बर्तन सोने- जवाहरातों से भरे मिले। गणेश जी की कृपा जानकर बुढ़िया काफी प्रसन्न हो गई।

हे गणेश जी महाराज! आपने जैसा फल बुढ़िया को दिया, वैसा सबको देना।

sakat chauth vrat ki kahani -एक शहर में देवरानी-जेठानी रहती थी। देवरानी गरीब थी और जेठानी अमीर थी। देवरानी हमेशा गणेश जी का पूजन और व्रत करती थी। वह जेठानी के घर पर काम करती थी और जो कुछ बचता था, वो घर लेकर जाती थी देवरानी का पति जंगल से लकड़ी काट कर बेचता था। माघ महीने में सकट चौथ गणेश जी का व्रत आया, देवरानी ने रखा, उसके पास पैसे नहीं थे. इसलिए उसने तिल व गुड़ लाकर तिलकुट्टा बनाया। पूजा करके सकट चौथ की कथा सुनी और जेठानी के यहां काम करने चली गई, सोचा शाम को चंद्र को अर्घ्य देकर जेठानी के यहां से लाया खाना और तिलकुट्टा खाएगी।

शाम को जब जेठानी के घर खाना बनाने लगी तो, उसके व्रत होने के कारण सभी ने खाना खाने से मना कर दिया। अब देवरानी ने जेठानी से बोला, आप मुझे खाना दे दो, जिससे मैं घर ले जाऊं। इस पर जेठानी ने मना कर दिया और कहा कि किसी ने भी अभी तक खाना नहीं खाया तुम्हें कैसे दे दूं ? तुम सवेरे ही बचा हुआ ले जाना। देवरानी उदास मन से घर चली आई। र पर पति , बच्चे सब खाने का इंतजार कर रहे थे, आस लगाए बैठे थे की आज कुछ पकवान खाने को मिलेगा, लेकिन जब बच्चो को पता चला कि आज तो रोटी भी नहीं मिलेगी तो बच्चे रोने लगे। सभ

उसका पति भी बहुत क्रोधित हो गया और कहने लगा कि दिन भर काम करने के बाद भी वह दो रोटियां नहीं ला सकती। वह रोने लगी, गणेश जी को याद करती हुई रोते रोते पानी पीकर सो गई। उस दिन सकट माता उसके घर आईं। बुढ़िया माता का रुप धरकर देवरानी के सपने में आईं और कहने लगीं कि जाग रही हैं क्या? वह बोली कि कुछ सो रहे हैं, कुछ जाग रहे हैं। बुढ़िया बोली भूख लगी हैं , खाने के लिए कुछ दे। देवरानी बोली कि क्या दूं , मेरे घर में तो अन्न नहीं हैं, जेठानी के यहां से बचा कुछ भी नहीं मिला। पूजा का बचा हुआ तिलकुटा रखा हैं, वही खा लो। सकट माता ने तिलकुट खाया और उसके बाद कहने लगी शौच लगी है ! कहां निमटे। देवरानी यह खाली झोंपड़ी है आप कहीं भी जा सकती हो, जहां इच्छा हो वहां निमट लो। फिर सकट माता बोलीं अब कहां पोंछू अब देवरानी बोली कि मेरी साड़ी से पोछ लो। देवरानी जब सुबह उठी तो यह देखकर हैरान रह गई कि पूरा घर हीरों और मोतियों से जगमगा उठा।उस दिन देवरानी जेठानी के काम करने नहीं गई। जेठानी ने इंतजार किया और कुछ देर तो राह देखी फिर बच्चो को बुलाने भेज दिया। जेठानी ने सोचा कल खाना नहीं दिया था इसीलिए शायद देवरानी बुरा मान गई होगी। बच्चे बुलाने गए। देवरानी ने कहा कि बेटा बहुत दिन तेरी मां के यहां काम कर लिया। बच्चो ने घर जाकर मां से कहा कि चाची का पूरा घर हीरों और मोतियों से जगमगा उठा है। जेठानी दौड़कर देवरानी के पास आई और पूछा कि यह सब कैसे हो गया?

देवरानी ने उसके साथ जो हुआ वो सब कह डाला। उसने भी वैसा ही करने की सोची। उसने भी सकट चौथ के दिन तिलकुटा बनाया। रात को सकट माता उसके भी सपने में आईं और बोली भूख लगी है कि मैं क्या खाऊं। जेठानी ने कहा कि आपके लिए छींके में रखा हैं, फल और मेवे भी रखे है जो चाहें खा लो, सकट माता बोली कि अब निपटे कहां? जेठानी बोली मेरे इस महल में कहीं भी निपट लो, फिर उन्होंने बोला कि अब पोंछू कहां, जेठानी बोली कि कहीं भी पोछ लो। सुबह जब जेठानी उठी, तो घर में बदबू, गंदगी के अलावा कुछ नहीं थी।

हे सकट माता जैसे आपने देवरानी पर कृपा की वैसी सब पर करना।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey
अनुराधा पांडे लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड कर रही हैं। इन्हें पत्रकारिता में 17 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 10 साल से काम कर रही हैं। इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन और भारतीय जनसंचार संस्थान से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। लाइव हिन्दुस्तान में धर्म में राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, हस्तरेखा, रत्न, व्रत-त्योहार पूजा-विधि और वैदिक ज्योतिष पर गहराई से पिछले 10 सालों से लिख रही हैं, खासकर पुराणों उपनिषदों को पढ़कर जुड़ी सही जानकारी पाठकों तक पहुंचाती रहीं हैं। आज तक में करियर सेक्शन में तीन साल काम किया है। खाली समय में किताबें पढ़ना अच्छा लगता है। और पढ़ें
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