
Ganesh Ji ki Aarti: सकट चौथ के दिन जरूर करें भगवान गणेश की ये आरती
Sakat Chauth Bhagwan Ganesh Ji ki aarti : इस वर्ष सकट चौथ का महापर्व 6 जनवरी, मंगलवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार सकट चौथ तीन शुभ योगों के संयोग में पड़ रही है, जिससे इस दिन भगवान गणेश की पूजा और आरती का महत्व और भी बढ़ गया है।
Ganesh Ji ki Aarti: इस वर्ष सकट चौथ का महापर्व 6 जनवरी, मंगलवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार सकट चौथ तीन शुभ योगों के संयोग में पड़ रही है, जिससे इस दिन भगवान गणेश की पूजा और आरती का महत्व और भी बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन शुभ योगों में की गई पूजा से भक्तों को विशेष पुण्य और मनोकामना पूर्ति का फल प्राप्त होता है। माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 जनवरी को सुबह 8:02 बजे से होगी, जो 7 जनवरी, बुधवार सुबह 6:53 बजे तक रहेगी। इसी अवधि में सकट चौथ का व्रत रखा जाएगा।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ के दिन पूजा के बाद भगवान गणेश की आरती अवश्य करनी चाहिए। कहा जाता है कि आरती के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आगे पढ़ें भगवान श्री गणेश की आरती-
भगवान श्री गणेश की आरती-
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, सन्त करें सेवा।। ..
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया।
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ..
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।
॥ श्री गणपतीची आरती ॥
सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुन्दर उटि शेंदुराची।
कण्ठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चन्दनाची उटि कुंकुमकेशरा।
हिरे जड़ित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥
लम्बोदर पीताम्बर फणिवर बन्धना।
सरळ सोण्ड वक्रतुण्ड त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवन्दना॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
दर्शनमात्रे मनकामना पुरती॥





