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देशभर में दिखने लगा सकट चौथ का चांद, ऐसे करें पूजा और व्रत पारण, चंद्रमा नहीं दिख रहे हैं तो ऐसे करें पूजन

देशभर में दिखने लगा सकट चौथ का चांद, ऐसे करें पूजा और व्रत पारण, चंद्रमा नहीं दिख रहे हैं तो ऐसे करें पूजन

संक्षेप:

आज यानी 6 जनवरी 2026 को देशभर में सकट चौथ का पावन व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। शाम होते ही अलग-अलग राज्यों में सकट चौथ का चांद दिखाई देना शुरू हो गया है, जिसके बाद व्रती महिलाएं और श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर व्रत का पारण कर रहे हैं। 

Jan 06, 2026 09:49 pm ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Sakat Chauth 2026 : आज यानी 6 जनवरी 2026 को देशभर में सकट चौथ का पावन व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। शाम होते ही अलग-अलग राज्यों में सकट चौथ का चांद दिखाई देना शुरू हो गया है, जिसके बाद व्रती महिलाएं और श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर व्रत का पारण कर रहे हैं। सकट चौथ को कई जगह संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा करने से संतान सुख, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। सकट चौथ के व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। दिनभर निर्जला या फलाहार उपवास रखने के बाद चांद को अर्घ्य देने की परंपरा है। यही वजह है कि पूरे दिन श्रद्धालुओं की नजरें चंद्रोदय के समय पर टिकी रहती हैं। जैसे-जैसे चांद दिखाई देता है, वैसे-वैसे घरों में दीप जलते हैं और पूजा का क्रम शुरू हो जाता है।

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ऐसे करें सकट चौथ की पूजा: चंद्र दर्शन होते ही सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करें और मन को शांत रखें। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान गणेश का स्मरण करें और पूजा की थाली में फूल, अक्षत, दूर्वा, मोदक या लड्डू रखें। फिर एक लोटे में जल या दूध लेकर उसमें थोड़ा सा अक्षत डालें और चंद्रमा की ओर मुख करके श्रद्धा भाव से अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय संतान की लंबी उम्र, परिवार की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें। मान्यता है कि इस विधि से पूजा करने पर भगवान गणेश और चंद्र देव दोनों प्रसन्न होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

अगर चांद साफ नजर न आए तो क्या करें: कई जगहों पर बादल या कोहरे की वजह से चांद साफ नजर नहीं आता। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। शास्त्रों के अनुसार चंद्र दिशा की ओर मुख करके ध्यानपूर्वक अर्घ्य देने से भी व्रत पूर्ण माना जाता है। इस दौरान मन में श्रद्धा और विश्वास होना सबसे जरूरी है।

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Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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