साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कब लगेगा, जानिए भारत में कितने समय के लिए दिखेगा

Feb 22, 2026 11:57 am ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को लगेगा। यह दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा और इसकी कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होगी। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो पूरे एशिया समेत ऑस्ट्रेलिया में भी नजर आएगा।

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कब लगेगा, जानिए भारत में कितने समय के लिए दिखेगा

साल 2026 का पहला ग्रहण सूर्य ग्रहण लग चुका है और अब जल्द ही पहला चंद्र ग्रहण लगने वाला है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मुताबिक सूर्य और चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण का खास महत्व होता है। बता दें कि 17 फरवरी को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया था, लेकिन चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। अब सवाल यह है कि चंद्र ग्रहण कब लगेगा और यह भारत में कितने समय के लिए यह दिखाई देगा। भारत में चंद्रग्रहण दिखाई देने की वजह से इसका सूतक काल मान्य भी होगा। क्योंकि ज्योतिष में ग्रहण काल को अशुभ बताया गया है। चलिए साल के पहले चंद्र ग्रहण से जुड़ी कुछ जानकारियां जानते हैं।

भारत में कहां और कितनी देर के लिए दिखेगा चंद्र ग्रहण
साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को लगेगा। यह दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से लेकर शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा और इसकी कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होगी। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो पूरे एशिया समेत ऑस्ट्रेलिया में भी नजर आएगा। भारत की बात करें, तो भारत में ग्रहण का शुरुआती हिस्सा नहीं दिखेगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय के हिसाब से यह ग्रहण दिखाई देगा।

यह चंद्र ग्रहण पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा देर तक दिखाई देगा, जबकि उत्तर और पश्चिम भारत में यह कम समय के लिए नजर आएगा। शहरों की बात करें, तो यह चंद्र ग्रहण ईटानगर में करीब 1 घंटा 40 मिनट तक चंद्रग्रहण देख सकेंगे, जबकि कोलकाता में 1 घंटा 15 मिनट तक दिखाई देगा। वहींस लखनऊ में लगभग 45 मिनट, दिल्ली में चंद्रग्रहण का नजारा करीब 25 मिनट तक ही दिखाई देगा। भोपाल में 26 मिनट, चेन्नई में 29 मिनट और मुंबई में यह चंद्रग्रहण महज करीब 5 मिनट तक ही दिखाई देगा। जबकि पटना में यह चंद्र ग्रहण करीब 1 घंटा 3 मिनट तक ग्रहण नजर आएगा।

कब से होगा सूतक काल मान्य?
3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले से मान्य होता है। ऐसे में चंद्र ग्रहण की सूतक काल की शुरुआत सुबह 6 बजकर 20 मिनट से होगी। ग्रहण में सूतक काल का खास महत्व होता है। इस अवधि में कुछ कार्य करने की मनाही होती है। माना जाता है कि इस समय भगवान की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए और कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। इस दौरान खाना नहीं बनाना चाहिए और खाना भी नहीं चाहिए। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी इस दौरान विशेष ख्याल रखने की सलाह दी जाती है।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

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धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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