Pradosh Vrat 2026: रवि प्रदोष व्रत की शाम भगवान शिव की इस विधि से करें पूजा, महादेव बरसाएंगे कृपा
प्रदोष व्रत की पूजा शाम में यानी प्रदोष काल में करना बेहद शुभ माना जाता है। प्रदोष का अर्थ है सूर्यास्त के बाद का समय। यही वह शुभ काल होता है जब भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। चलिए जानते हैं कि प्रदोष व्रत की पूजा शाम में किस विधि से करनी चाहिए।

प्रदोष व्रत आज यानी 1 मार्च को रखा जाएगा। यह प्रदोष व्रत रविवार के दिन है, तो इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। साथ ही लोग इस दिन व्रत रखते हैं। मान्यता है कि यदि रवि प्रदोष व्रत रखकर पूरे मन से पूजा-अर्चना की जाए, तो पूरे जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रदोष व्रत की पूजा शाम में यानी प्रदोष काल में करना बेहद शुभ माना जाता है। प्रदोष का अर्थ है सूर्यास्त के बाद का समय। यही वह शुभ काल होता है जब भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। चलिए जानते हैं कि प्रदोष व्रत की पूजा शाम में किस विधि से करनी चाहिए।
रवि प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि 28 फरवरी की रात 8:05 बजे से शुरू होकर 1 मार्च की शाम 6:30 बजे तक रहेगी। ऐसे में 1 मार्च को सुबह 7:40 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक पूजा के लिए शुभ समय रहेगा। वहीं प्रदोष काल की पूजा के लिए शाम 5:51 बजे से रात 8:56 बजे के बीच का समय विशेष फलदायी माना गया है।
शाम में ऐसे करें प्रदोष व्रत की पूजा
- प्रदोष व्रत की पूजा बहुत कठिन नहीं है, बस मन में सच्ची श्रद्धा होनी चाहिए।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शिव जी के सामने हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर को साफ करें और भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें और पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना करें।
- इसके अलावा शाम में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
- शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, फूल और फल अर्पित करें। इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और शिव चालीसा का पाठ करें। यदि संभव हो तो किसी मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं।
- फिर पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
- अंत में घी के दीपक से आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
पूजा का शुभ समय
प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले से लेकर 45 मिनट बाद तक माना जाता है। इसी समय में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ होता है।
कब करें पारण
रवि प्रदोष व्रत का पारण 2 मार्च को किया जाएगा। पारण का पहला शुभ समय सुबह 6:12 बजे से 7:38 बजे तक रहेगा। अगर इस समय संभव न हो, तो सुबह 9:07 बजे से 10:34 बजे के बीच भी पारण किया जा सकता है। मान्यता है कि सही मुहूर्त में पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
रवि प्रदोष व्रत के लाभ
- रवि प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की कृपा होती है।
- इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है
- प्रदोष व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- व्रत रखने से कर्ज और आर्थिक संकट से राहत मिलती है और साथ ही मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- इस व्रत को रखने से ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
- व्रत के दिन सात्विक भोजन करें।
- क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- शिवलिंग पर तुलसी दल न चढ़ाएं।
- पूजा के समय मन को शांत रखें।
- मांस-मदिरा का सेवन ना करें।
- किसी का अपमान ना करें।
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
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शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।
धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
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