रत्न शास्त्र: नीलम रत्न किन लोगों को पहनना चाहिए, जानें कब और कैसे पहनें?

Dheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
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Ratna Shastra: आज हम आपको नीलम रत्न के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका संबंध शनि देव से है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो भी व्यक्ति नीलम रत्न पहनता है, उसको सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही व्यक्ति समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा पाता है।

रत्न शास्त्र: नीलम रत्न किन लोगों को पहनना चाहिए, जानें कब और कैसे पहनें?

रत्न शास्त्र ज्योतिष की एक प्राचीन शाखा है, जिसमें नवग्रहों यानी सूर्य से केतु तक के साथ रत्नों का गहरा संबंध बताया गया है। लेकिन बिना ज्योतिष सलाह के रत्न पहनना जोखिम भरा है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक रत्न किसी न किसी ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं, जैसे माणिक्य रत्न सूर्य देव का प्रतिनिधित्व करता है। आज हम आपको नीलम रत्न के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका संबंध शनि देव से है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो भी व्यक्ति नीलम रत्न पहनता है, उसको सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही व्यक्ति समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा पाता है। चलिए जानते हैं कि नीलम रत्न किसे और कब, कैसे धारण करना चाहिए।

नीलम इन राशियों को शुभ

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि देव उच्च के विराजमान हैं, तो वह नीलम पहन सकता है।
नीलम रत्न कुंभ और मकर राशि के लोग पहन सकते हैं, क्योंकि इन राशियों पर शनि देव का ही आधिपत्य है।
इसके अलावा वृष, मिथुन, कन्या, तुला राशि के लोग भी नीलम कुंडली दिखाकर पहन सकते हैं।
कुंडली में चौथे, पांचवे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शनि हो तो नीलम पहनने से बहुत लाभ मिलता है।
जब शनि छठें और आठवें भाव के स्‍वामी के साथ बैठा हो या वे खुद ही छठे और आठवें भाव में विराजमान हो तो भी नीलम रत्न धारण करना चाहिए।
साथ ही नीलम के साथ मूंगा और माणिक्य पहनने से बचना चाहिए। वर्ना हानिकारक साबित हो सकता है।

नीलम पहनने से मिलते हैं ये लाभ

नीलम धारण करने से व्यक्ति को करियर और कारोबार में अच्छी तरक्की मिलती है।
साथ ही नीलम पहनने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है।
जिन लोगों को रात में नींद नहीं आती है, वो लोग भी नीलम धारण कर सकते हैं।
नीलम रत्न पहनने से मानसिक शांति मिलती है और तनाव कम होता है।
इसके अलावा नीलम शनि की साढ़ेसाती का दुष्प्रभाव दूर करता है।
अनुकूल होने पर धन-धान्य, सुख-सम्पत्ति, यश, आयु, बुद्धि, बल और वंश की वृद्धि कराता है।
नीलम को मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करने वाला माना जाता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।

नीलम पहनने की विधि

नीलम रत्न पहले टेस्टिंग के लिए खरीदकर लाना चाहिए।
नीलम रत्न सवा 7 से सवा 8 रत्ती का खरीदकर लाना चाहिए।
वहीं नीलम को आप अंगूठी या पैंडल के रूप में पहन सकते हैं।
नीलम रत्न पंचधातु या चांदी में पहनना शुभ रहता है।
नीलम को मध्यमा ऊंगली में धारण कर सकते हैं।
शनिवार नीलम पहनना बेहद शुभ फलदायी साबित होता है।

कैसे पहनें और क्या ना करें

वहीं नीलम रत्न को पहनने से पहले उसे गंगाजल औऱ कच्चे दूध से शुद्ध करके पहनना चाहिए। जिससे वो अपना पूरा प्रभाव दिखा सके। शनिदेव न्याय के देवता माने जाते हैं। इसलिए नीलम रत्न धारण करने के बाद भूलकर भी हिंसा न करें। किसी भी व्यक्ति को परेशान न करें। इस दौरान दान करना आपके लिए शुभ है। वहीं नीलम पहने के बाद मांस और मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।

नीलम की असली पहचान

वहीं अगर हम नीलम की पहचान की बात करें, तो वहीं असली नीलम रत्न नीले रंग का, पारदर्शक, चमकने वाला, छूने में मुलायम और इसके अंदर किरणें यानी धारियां निकलती प्रतीत होती हैं। अगर नीलम असली है तो इसे दूध के बर्तन में रखने के बाद दूध का रंग नीला दिखाई देने लगता है। इस रत्न को पानी के गिलास में रखने के बाद पानी में से किरणें निकलती दिखाई देती हैं।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
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