रत्न शास्त्र: मोती पहनने से पहले ध्यान में रखें ये 5 बातें, ना करें गलतियां, ये है धारण करने का सही तरीका
रत्न शास्त्र की दुनिया में मोती वो हीरो है जो दिखता काफी सॉफ्ट है लेकिन ये काफी पावरफुल होता है। हालांकि मोती को सही नियम से धारण ना किया जाए तो इसका असर खराब भी हो सकता है।

Gemstone: रत्न शास्त्र के हिसाब से हमारी जिंदगी में चल रही परेशानियों का हल रत्नों के पास है। कुंडली में अगर कोई ग्रह हमारे अनुकूल नहीं है तो उसे ध्यान में रखते हुए खुद को फेवर करने वाले रत्न अगर हम पहन लें तो चीजें सही हो सकती हैं। रत्न शास्त्र की दुनिया में रत्न वो हीरो हैं जो हमारी जिंदगी में सब कुछ वापस ट्रैक पर लाने की कोशिश करता है। इस दुनिया में कई ऐसे रत्न हैं जिनकी काफी मांग होती है। हालांकि इन्हें राशि और कुंडली अनुसार पहनना ही सही माना जाता है। आज बात करेंगे मोती की। मोती ऐसा रत्न है जो दिखने में सौम्य होता है लेकिन इसका काम परफेक्ट और सॉलिड होता है। हालांकि लोग इसे पहनते वक्त कई तरह की गलतियां करते हैं। आज बात करेंगे कि आखिर मोती पहनने से पहले किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है?
मोती पहनने से पहले ध्यान में रखें ये 5 बातें
1. मोती को कभी भी गलत उंगली में नहीं पहनना चाहिए। इसे हमेशा कनिष्ठा उंगली में ही पहनना सही माना जाता है। अगर इसे पंडित की सलाह लेकर पहना जाए तो और भी अच्छा होता है। कई बार लोग शौक के चक्कर में मोती पहन लेते हैं जोकि सही नहीं है। अगर आपकी राशि इसके फेवर में नहीं है तो ये गलत परिणाम भी दे सकता है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मोती को हमेशा चांदी में ही जड़वाना चाहिए। इसे कभी भी सोने की अंगूठी में नहीं जड़वाना चाहिए।
2. जो लोग गोमेद और नीलम ऑलरेडी पहन रहे हैं, उनके लिए मोती पहनना किसी खतरे के खाली नहीं है। अगर ऐसा किया जाए तो इसके कई नुकसान हो सकते हैं। रत्न शास्त्र के हिसाब से गोमेद और नीलम के साथ मोती को कभी भी धारण नहीं करना चाहिए।
3. अगर आप कुंडली दिखाए बिना ही मोती पहन लेंगे तो ये आपके लिए अच्छा नहीं होगा। मोती की बात करें तो इसे कुछ ही लोग धारण कर सकते हैं। मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए मोती फेवरेवल होता है। वहीं अगर मिथुन, मकर, कन्या राशि के लोग इसे पहनते हैं तो ये सही परिणाम नहीं देगा। कुभ और धनु राशि वालों को भी मोती पहनने से बचना चाहिए। अगर बहुत जरूरी लगे तो एक बार कुंडली पंडित को जरूर दिखा लेनी चाहिए।
4. मोती की अंगूठी या फिर माला तो लाकर तुरंत धारण नहीं करना चाहिए। इसके लिए कुछ नियम हैं जिसे फॉलो करना जरूरी होता है। सबसे पहले इसे गंगाजल या फिर दूध से शुद्ध कर लें। इसके बाद ॐ सोमाय नमः या चंद्र मंत्र का जाप करें। नाम जाप आप 108 बार करेंगे तो सही होगा।
5. मोती को आप हर दिन धारण नहीं कर सकते हैं। मोती का संबंध चंद्रमा से है। ऐसे में इसे सोमवार के दिन पहनेंगे तो ज्यादा अच्छा होगा। अगर इन बातों को ध्यान में रखकर मोती को धारण किया जाए तो इसका फल दोगुना मिल सकता है।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए रत्नशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पिछले 8 महीनों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
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गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता
वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, फेंगशुई, डेली और वीकली राशिफल
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