Hindi Newsधर्म न्यूज़Rath Saptami Kab Hai 2026 Surya Dev naam aditya yun
रथ सप्तमी 2026: माघ मास में रथ पर सवार हुए सूर्य, आदित्य क्यों हुआ नाम

रथ सप्तमी 2026: माघ मास में रथ पर सवार हुए सूर्य, आदित्य क्यों हुआ नाम

संक्षेप:

रथ सप्तमी से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। यह कथा कहती है, जब सूर्य देव को खड़े-खड़े काफी लंबा समय बीत गया, तो उनके पांव दुखने लगे। उन्होंने भगवान विष्णु के सामने अपनी समस्या रखी। 

Jan 20, 2026 10:01 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

रथ सप्तमी से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। यह कथा कहती है, जब सूर्य देव को खड़े-खड़े काफी लंबा समय बीत गया, तो उनके पांव दुखने लगे। उन्होंने भगवान विष्णु के सामने अपनी समस्या रखी। श्रीहरि ने सूर्य देव की समस्या को दूर करने के लिए उन्हें हीरे जड़ित एक स्वर्ण रथ दिया। इस रथ के सारथि अरुण देव थे। जिस दिन यह रथ सूर्य को मिला, उस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि थी। इस दिन इस रथ पर सूर्य के विराजमान होने के कारण इसे ‘रथ सप्तमी’ कहा गया।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

सूर्य के रथ में सात घोड़े होने के कारण भी इसे ‘रथ सप्तमी’ कहा जाता है। सूर्य के रथ में- ‘गायत्री’, ‘भ्राति’, ‘उष्निक’, ‘जगती’, ‘त्रिस्तप’, ‘अनुस्तप’ और ‘पंक्ति’ नाम के सात घोड़े हैं। ये सात घोड़े सप्ताह के सात दिनों, सात किरणों के प्रतीक हैं। सूर्य के रथ का पहिया संवत्सर वर्ष और उसमें लगी बारह तीलियां बारह महीनों को दर्शाती हैं। इस बार रथ सप्तमी का रविवार के दिन होने के कारण विशेष महत्व है। इसके अलावा इस तिथि को ‘माघ सप्तमी’, ‘अचला सप्तमी’, ‘आरोग्य सप्तमी’, ‘विधान सप्तमी’ आदि नाम से भी जाना जाता है।

मार्कंडेय पुराण के अनुसार पहले संपूर्ण विश्व में अंधेरा था। उस अंधकार में ही ब्रह्मा कमलयोनि से प्रकट हुए और उनके मुख से सबसे पहले ‘ओम्’ शब्द का उच्चारण हुआ। यह ओम् सूर्य के तेज का ही सूक्ष्म रूप था। इसके पश्चात ब्रह्मा के मुख से चारों वेद प्रकट हुए। यह चारों वेद ओम् के तेज में समा गए। आकाश में दिखाई देने वाला सूर्य इसी ओम् का स्थूल रूप है। सूर्य का यह तेज इतना प्रचंड था कि सृष्टि के भस्म होने का डर था, इसलिए ब्रह्म की प्रार्थना पर सूर्य देव ने अपने तेज को कम कर लिया। सूर्य के प्रकट होने पर संपूर्ण विश्व का अंधकार ही नहीं मिटा, बल्कि सृष्टि में जीवन का संचार भी हुआ। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा का कारक और नव ग्रहों का राजा माना गया है। व्यवस्था के संचालन में इसे राजा यानी राष्ट्र प्रमुख और उच्च अधिकारी का दर्जा प्राप्त है। संबंधों के निर्वहन में इसे पिता माना गया है।

सूर्य के जन्म के संबंध में एक अन्य कथा है। इस कथा में बताया गया है कि किस प्रकार सूर्य का नाम ‘आदित्य’ हुआ। सृष्टि उत्पत्ति के समय कश्यप ऋषि की पत्नी अदिति ने कठोर तप करके भगवान सूर्य को प्रसन्न किया और वरदान मांगा कि वे उनके पुत्र रूप में जन्म लें। सूर्य ने उन्हें यह वरदान दे दिया और अपनी सात किरणों में से एक ‘सुषुम्ना’ किरण द्वारा उनके गर्भ में प्रवेश किया। अदिति के गर्भ से जब सूर्य का जन्म हुआ, उस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि थी। अदिति के गर्भ से जन्म लेने कारण सूर्य का नाम ‘आदित्य’ हुआ।

इससे जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार भगवान कृष्ण के पुत्र सांब को अपने बल और शारीरिक सुंदरता का बहुत अभिमान हो गया था। एक बार दुर्वासा ऋषि कृष्ण से भेंट करने आए। कठिन तप करने के कारण ऋषि दुर्वासा का शरीर बहुत ही दुर्बल हो गया था। उनके दुबले-पतले और असुंदर शरीर को देखकर सांब को हंसी आ गई। इसे ऋषि ने अपना अपमान समझा। ऋषि दुर्वासा को सांब की इस धृष्टता पर बहुत क्रोध आया और उन्होंने उसे कुष्ठ रोग होने का शाप दे दिया। ऋषि के शाप से सांब को कुष्ठ हो गया। अनेक तरह के उपचार करने पर भी जब यह ठीक नहीं हुआ, तब कृष्ण ने सांब को सूर्योपासना करने की सलाह दी। सूर्य की उपासना करने से सांब को कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली, इसलिए इसे ‘आरोग्य सप्तमी’ भी कहते हैं। इस दिन गंगा स्नान करके सूर्य उपासना और सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान करने से सूर्य संबंधी दोष दूर होते हैं। इस दिन सूर्य के साथ-साथ उनके रथ में जुते सातों घोड़ों की भी पूजा की जाती है।

अश्वनी कुमार

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें धर्म न्यूज़ , Aaj ka Rashifal,Panchang , Numerology से जुडी खबरें हिंदी में हिंदुस्तान पर| हिंदू कैलेंडर से जानें शुभ तिथियां और बनाएं हर दिन को खास!