रंगभरी या आमलकी एकादशी आज, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय से लेकर सबकुछ

Feb 27, 2026 06:13 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी कहा जाता है, बेहद पुण्यदायी मानी जाती है। साल 2026 में आमलकी एकादशी का पर्व 27 फरवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है।

रंगभरी या आमलकी एकादशी आज, नोट कर लें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, उपाय से लेकर सबकुछ

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान माना गया है, लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी कहा जाता है, बेहद पुण्यदायी मानी जाती है। साल 2026 में आमलकी एकादशी का पर्व 27 फरवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है और जो भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करते हैं, उन्हें सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में आंवले को अत्यंत पवित्र और औषधीय गुणों से भरपूर फल माना गया है। यही वजह है कि आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यह दिन न सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि धार्मिक परंपराओं के लिहाज से भी काफी खास माना जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती की भी आराधना करते हैं, क्योंकि यह पर्व शिव-पार्वती के विवाह और होली उत्सव की शुरुआत से भी जुड़ा है।

आमलकी एकादशी 2026: तिथि और पारण का समय

एकादशी तिथि प्रारंभ: 27 फरवरी 2026, रात 12:33 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026, रात 10:32 बजे तक

मुख्य व्रत का दिन: 27 फरवरी 2026, शुक्रवार

पारण (व्रत तोड़ने) का समय: 28 फरवरी 2026, सुबह 06:48 से 09:07 बजे के बीच

धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सही मुहूर्त देखकर ही करना चाहिए। इससे व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

आमलकी एकादशी का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व- शास्त्रों में बताया गया है कि जब भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया, उसी समय आंवले के वृक्ष की भी उत्पत्ति हुई थी। इसी कारण आंवले को ‘आदि वृक्ष’ कहा जाता है। मान्यता है कि आंवले के वृक्ष के हर हिस्से में देवताओं का वास होता है और विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी इससे प्रसन्न होते हैं।

पद्म पुराण के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत करने से सौ गायों के दान के बराबर पुण्य फल मिलता है। यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी बढ़ाता है।

रंगभरी एकादशी और भगवान शिव का संबंध- काशी (वाराणसी) में आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर पहली बार काशी आए थे। इस अवसर पर शिव-गौरा और भक्तों के बीच गुलाल से होली खेलने की परंपरा है। यही कारण है कि यह दिन होली से पहले उत्सव और उल्लास का प्रतीक माना जाता है।

आमलकी एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि

1. सुबह की तैयारी

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं। इसके बाद साफ और पीले वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग भगवान विष्णु को प्रिय माना जाता है। हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।

2. भगवान विष्णु की पूजा

एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद पीले फूल, चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें।

3. आंवले के वृक्ष की पूजा

किसी आंवले के पेड़ के पास जाकर उसकी पूजा करें। अगर पेड़ उपलब्ध न हो, तो पूजा स्थल पर आंवले का फल रखकर पूजा की जा सकती है। वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं, रोली-अक्षत से तिलक करें और 9, 28 या 108 बार परिक्रमा करें।

4. मंत्र जाप और भोग

भगवान विष्णु को आंवले से बनी मिठाई या फल का भोग लगाएं। इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

5. आरती और दीपदान

शाम के समय भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष के पास घी का दीपक जलाएं और आरती करें। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

सुख-समृद्धि के लिए खास उपाय

आर्थिक उन्नति के लिए: गाय के कच्चे दूध में तुलसी के पत्ते मिलाकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए: आंवले के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं और सात बार कलावा तने पर लपेटें।

पुण्य प्राप्ति के लिए: इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और विशेष रूप से आंवले का दान करें।

पारिवारिक खुशहाली के लिए: घर के मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़कें और लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त पूजा करें।

व्रत के दौरान क्या न करें?

एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।

किसी की निंदा या बुरा बोलने से बचें।

पेड़-पौधों की टहनियां या पत्ते न तोड़ें, खासकर आंवले और तुलसी के।

तामसिक भोजन जैसे प्याज और लहसुन से दूर रहें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


विशेषज्ञता (Areas of Expertise):

राशिफल (डेली एवं वीकली)
ग्रह-गोचर
दशा-महादशा
अंकज्योतिष
सामुद्रिक शास्त्र
वास्तु शास्त्र
फेंगशुई
रत्न-उपाय
व्रत-त्योहार एवं पूजा-विधि

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!