Rang Panchami 2026: कैसे मनाई जाती है रंग पंचमी? जानिए इस दिन क्या करें?

Mar 04, 2026 07:23 pm ISTDheeraj Pal लाइव हिन्दुस्तान
share

Rang Panchami 2026: मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने एक दूसरे को रंग लगाया था और ब्रजभूमि में होली खेली थी। यह पर्व मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात में खासकर धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन रंगों की बौछार, गुलाल उड़ाने और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।

Rang Panchami 2026: कैसे मनाई जाती है रंग पंचमी? जानिए इस दिन क्या करें?

हिंदू धर्म में रंग पंचमी का पर्व का खास महत्व होता है। यह पर्व होली के पांच दिन बाद मनाया जाता है। वैदिक पंचांग के मुताबिक यह पर्व हर साल चैत्र माह की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है। साथ ही धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन देवी-देवता पृथ्वी पर आकर अपने भक्तों के साथ होली खेलते हैं। इसलिए इसे देव होली, श्री होली और देवताओं की होली भी कहा जाता है। चलिए जानते हैं कि रंग पंचमी का पर्व कैसे मनाया जाता है और इस दिन क्या करना चाहिए।

रंग पंचमी का महत्व
हर साल रंग पंचमी का त्योहार भारत के कई हिस्सों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर तो रंग पंचमी का उत्सव होली के उत्सव से भी भव्य होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने एक दूसरे को रंग लगाया था और ब्रजभूमि में होली खेली थी। यह पर्व मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात में खासकर धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन रंगों की बौछार, गुलाल उड़ाने और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।

कैसे मनाएं रंग पंचमी का पर्व
रंग पंचमी के दिन कई जगहों पर गुलाल और फूलों की होली खेली जाती है। साथ ही रंग-गुलाल को आसमान की तरफ उड़ाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन हवा में रंग उड़ाने से देवता आकर्षित होते हैं और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन विशेष रूप से मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाती है और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। मथुरा-वृंदावन, उज्जैन और इंदौर में रंग पंचमी का उत्सव बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन देवी-देवताओं को गुलाल और अबीर अर्पित करने से कुंडली के दोष समाप्त हो जाते हैं। साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही इस दिन धार्मिक अनुष्ठान और हवन करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

रंग पंचमी पूजा विधि
रंग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर साथ-सुथरा वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा का संकल्प लें।
एक चौकी पर गंगाजल छिड़कें। फिर उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-नारायण की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
भगवान को जल और पंचामृत से स्नान कराएं और भगवान को अक्षत, रोली, धूप, बाती, चंदन, फूल और फल अर्पित करें।
भगवान को गुड़-चना, मिश्री या खीर का भोग लगाएं।

गुलाल और अबीर अर्पित करें
भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी को गुलाल और अबीर अर्पित करें। भगवान कृष्ण और राधा रानी के मंत्रों का जाप करें। पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।

रंग पंचमी के उपाय
- रंग पंचमी के दिन, एक लाल कपड़े में थोड़ी सी हल्दी और गुलाल बांधकर भगवान शिव के मंदिर में अर्पित करें। इस उपाय से विवाह के योग जल्दी बनते हैं।
- रंग पंचमी के दिन, गरीब कन्याओं को वस्त्र और मिठाई दान करना बहुत शुभ माना जाता है। यह उपाय विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।
- रंग पंचमी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें और पूजा में एक पीले रंग के वस्त्र में एक सिक्का और हल्दी की एक गांठ डालकर उसे अच्छे से बांधकर उसे रख दें। फिर पूजा के बाद उस पोटली को उठाकर घर की तिजोरी में रख दें। इससे आर्थिक स्थिति सही होती है।

विवाह में देरी के लिए उपाय
अगर विवाह में देरी हो रही है, तो इसके लिए रंग पंचमी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु को पीले वस्त्र और पीले फूल अर्पित करें, और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण
धीरज पाल एक डिटिजल पत्रकार है, जिन्हें इस क्षेत्र में 7 से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वो भारत की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान लाइव हिंदुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का हिस्सा हैं। यहां वह ग्रह गोचर, वास्तु शास्त्र, न्यूमरोलॉजी, रत्न शास्त्र से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव

धीरज पाल डिजिटल मीडिया में उभरता एक ऐसा नाम है, जो पाठक को धर्म से जुड़ी खबरों को प्रमाणिक तौर पर और आमबोल चाल की भाषा परोसते हैं। वो ग्रह नक्षत्रों, वास्तु शास्त्र, अंक ज्योतिष,रत्न शास्त्र जैसे विषयों पर लेख लिखकर पाठक को उसकी अहमियत के बारे में बताते हैं। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़े हैं और पिछले 4 सालों से काम कर रहे हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने समाचार, फीचर, और एक्सप्लेनर कंटेंट में काम करते हुए अब ज्योतिषीय विषयों को डिजिटल पाठकों तक पहुंचाने में विशेष पहचान बनाई है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान संस्थानों से विषयों को तत्थात्मक और प्रभावी तरीके से समझने का सलीका सीखा। यहीं से उन्हें पत्रकारिता की सीढ़ी मिली।

धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वो लाइव हिंदुस्तान की एस्ट्रोलॉजी टीम का हिस्सा बने। अब इनका एकमात्र उद्देश्य ज्योतिषीय जानकारी को रुचिगत, सरल, प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
ग्रह और नक्षत्रों का असर
वास्तु शास्त्र
न्यूमरोलॉजी
रत्न विज्ञान

और पढ़ें
जानें लेटेस्ट Dharm News, Aaj ka Rashifal और सटीक Panchang की जानकारी। अपनी डेली पूजा के लिए यहाँ पढ़ें Shiv Chalisa, Hanuman Chalisa और Bajrang Baanहिंदू कैलेंडर 2026 की शुभ तिथियों के साथ अपने हर दिन को खास बनाएं!