Ramadan dates 2026:दिलों को जोड़ता माहे रमजान, जानें कब से शुरू हो सकते हैं रमजान

Feb 17, 2026 09:58 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान, मुख्तार अहमद
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Ramadan (Ramzan) 2026 Start Date: इस वर्ष, रमजान मंगलवार, 17 फरवरी, 2026 की शाम को शुरू होने की उम्मीद है, अगर आज शाम 6:00 बजे के आसपास चांद दिखाई देता है, तो रमजान की शुरुआत होगी।

Ramadan dates 2026:दिलों को जोड़ता माहे रमजान, जानें कब से शुरू हो सकते हैं रमजान

Ramadan (Ramzan) 2026 Start Date: इस वर्ष, रमजान मंगलवार, 17 फरवरी, 2026 की शाम को शुरू होने की उम्मीद है, अगर आज शाम 6:00 बजे के आसपास चांद दिखाई देता है, तो रमजान की शुरुआत होगी। रोजे अर्थात रमजान इस्लाम के पांच फर्जों में से एक फर्ज। इस्लाम का निर्माण जिन पांच स्तंभों पर किया गया है; रमजान उन स्तंभों में से एक स्तंभ है। रमजान का नाम आते ही सफेद टोपी पहने भूखे-प्यासे और समूह में इबादत करते लोग अक्सर जेहन में आ जाते हैं। जी हां! यह सच भी है, लेकिन पूरा सच नहीं है। पूरा सच इसलिए नहीं कि रमजान केवल भूखे-प्यासे रह कर दिन गुजारने और शाम को जम कर खाने का नाम नहीं है।

रमजान के महीने में भूखे-प्यासे रहकर इबादत करने के अतिरिक्त भी अन्य बहुत सी चीजों का ध्यान रखना होता है। यदि साफ कहें, तो सिर्फ पेट नहीं जुबान का भी रोजा रखना होता है। खाने-पीने की चीजों के साथ कटु वचन, अभद्र भाषा,अनुचित बर्ताव का भी त्याग करना होता है, तभी सच्चे अर्थ में रोजेदार कहलाने का सवाब मिलता है। रमजान को माहे मुबारक भी कहा जाता है, क्योंकि इसी माह में कुरआन नाजिल हुआ। कुरआन इस्लाम का आधार ग्रंथ है।

रमजान के साथ जुड़े हैं, कुछ धार्मिक क्रिया-कलाप तथा आर्थिक त्याग भी। जैसे फितरा और जकात। फितरा और जकात अपनी आमदनी में से निकाले गए एक निश्चित धन के हिस्से को कहा जाता है, जिस पर केवल गरीबों और जरूरतमंदों का हक होता है। जो कि इस माह के मध्य; ईद की नमाज से पहले अदा करना जरूरी होता है। यह बात हर मुस्लिम को मालूम होती है

इस्लाम प्रत्येक मुस्लिम की कमाई में से गरीब व मजलूमों का हिस्सा तय करता है, जिसे अदा करना फर्ज किया है। जैसे रमजान फर्ज है, उसी प्रकार जकात भी फर्ज है।

यहां इस्लाम की एक और खूबसूरती परिलक्षित होती है। इस्लाम कहता है कि पहले अपने पड़ोस में देखो, फिर मुहल्ले में उसके बाद अपने रिश्तेदारों में ढूंढ़कर उनकी मदद करो।

रमजान इबादत का महीना है, इसलिए इस माह में इबादतें बढ़ जाती हैं। पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ तराबियां भी जमात ( सामूहिक) के साथ पढ़ी जाती हैं, जिनका रमजान के महीने में विशेष महत्व है।

रमजान का धार्मिक महत्व तो है ही, मगर वैश्विक दृष्टिकोण से देखें, तो सामाजिक महत्व भी है। रमजान दिलों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। माहे रमजान खुद भूखे-प्यासे रहकर अन्य लोगों की भूख-प्यास को समझने तथा समझाने में आसानी पैदा करता है। एक भूखे-प्यासे इंसान से बेहतर और कौन दूसरे भूखे-प्यासे इंसान को समझ सकता है। ‘भूखे की गत भूखा जाने, प्यासे की प्यासा।’ जो दूसरे की तकलीफ को समझता है, वही जरूरतमंद की मदद भी करता है। यह सहज और स्वाभाविक-सी बात है। ‘अति सुधो स्नेह कौ मारग है।’ कहने का अर्थ यही है कि रमजान भूखे-प्यासे रहकर इबादत करने का ही नाम नहीं है, वरन एक-दूसरे की मदद को तैयार रहना भी माहे रमजान में शामिल है।

रमजान का स्पष्ट संदेश है, स्वयं को समाज के लिए प्रस्तुत करना। विश्व के तमाम जरूरतमंदों से कहना कि तकलीफ में आप अकेले नहीं हैं; हम आपके साथ हैं, आपकी सहायता के लिए।

इस्लाम की खूबसूरती इस प्रकार भी देखी जा सकती है कि इस्लाम कहता है कि जकात-खैरात का पैसा जरूरी नहीं कि किसी मुस्लिम को ही दिया जाए; आप किसी भी जरूरतमंद को दे सकते हैं। बेशक वह किसी भी मजहब को मानने वाला हो। यहां यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि रमजान ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से ओतप्रोत है।

अंत में यही कि रोजे रखिए, इबादत करिए और फिर ईद की खुशियां मनाइए, मगर अपने आस-पास ध्यान रखिए कि कहीं कोई तकलीफ में तो नहीं है। आप सभी को माहे रमजान की बरकतें मुबारक।

Anuradha Pandey

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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