Ashtami navami 2026 date: कब है अष्टमी नवमी, 26 और 27 किस तिथि पर कन्या पूजन शुभ, रामनवमी हवन मुहूर्त भी जानें
Ram navami 2026 Kab hai:चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन कर नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है। कहीं-कहीं नवरात्रि व्रत का पारण दसवीं को होता है। लेकिन किसी के यहां अष्टमी को कन्या पूजन , तो किसी के यहां नवमी को कन्या पूजन होता है।

चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन कर नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है। कहीं-कहीं नवरात्रि व्रत का पारण दसवीं को होता है। लेकिन किसी के यहां अष्टमी को कन्या पूजन , तो किसी के यहां नवमी को कन्या पूजन होता है। ऐसे में दोनों ही तिथि बहुत खास हैं। आपको बता दें कि इस साल दोनों तिथियों में कंफ्यूजन की स्थिति बन रही है। ऐसे में यहां ज्योतिर्विद के जरिए आपको हम बताएंगे कि किस दिन अष्टमी और किस नवमी को कन्या पूजन होगा। ज्योतिषियों के अनुसार, भगवान राम जी का जन्म चैत्र मास की नवमी तिथि पर अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। इसलिए रामनवमी का पर्व इस दिन मनाया जाता है। आपको बता दें कि नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11.30 के बाद से शुरू हो रही है, नवमी तिथि 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 06 मिनट तक रहने वाली है। इसलिए कुछ स्थानों पर उदया तिथि के हिसाब से राम नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। कन्या पूजन भी 27 मार्च को ही किया जाएगा। जिनके यहां अष्टमी पर कन्या पूजन होता है, उनके यहां 26 तारीख को कन्या पूजन श्रेष्ठ रहेगा। इसी के साथ नवरात्रि के व्रत का पारण किया जाएगा।
कब है अष्टमी तिथि 2026
ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार इस साल 26 मार्च दिन गुरुवार अष्टमी तिथि को महागौरी देवी की आराधना की जाएगी। इस दिन मंगला गौरी माता का दर्शन किया जाएगा इसी दिन महानिशा का भी पूजा भी की जाती है। अष्टमी तिथि को कन्या पूजन करने वाले लोग इस दिन ही कन्या पूजन करेंगे। तिथि के अनुसार इस दिन चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि प्रातः 11.49 मिनट तक है, इसलिए इस दिन श्री दुर्गाष्टमी, भवानी उत्पत्ति,अशोकाष्टमी है।
कब है रामनवमी तिथि 2026 ram navami
दो दिन नवमी तिथि होने के कारण लोगों में कंफ्यूजन बढ़ा है। कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि भगवान राम का जन्म दोपहर में हुआथा, तो 26 तारीख को दोपहर में नवमी तिथि मिल रही है, इसलिए रामनवमी 26 को होनी चाहिए। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि भगवान राम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था और ये नक्षत्र 26 को नहीं, 27 तारीख को है, तो रामनवमी 27 को हैं। ज्योतिषियों के अनुसार नवमी तिथि उदयातिथि में 27 को मिल रही है तो इसी दिन रामनवमी मनाना शुभ है। इस दिन माता सिद्धिदात्री की विधि विधान से पूजा की जाती है। साथ ही महालक्ष्मी गौरी का दर्शन भी किया जाता है । इस दिन नवरात्र से संबंधित सभी प्रकार के हवन दिन में 12:02 बजे से पहले कर लिए जाएंगे, क्योंकि 12:02 के बाद इच्छा अनुसार व्रत का पारण भी किया जा सकता है। वैसे उदयकालिक दशमी तिथि 28 मार्च दिन शनिवार को प्राप्त होगी।
कब होगा हवन
महाष्टमी का व्रत 26 मार्च दिन गुरुवार को किया जाएगा । चढ़ती उतरती का व्रत 26 मार्च दिन गुरुवार को ही किया जाएगा।
पारण कब होगा
28 मार्च दिन शनिवार को नौ दिनों तक व्रत करने वाले लोग उदय कालिक दशमी तिथि में व्रत का पारण करेंगे। कुछ लोग रामनवमी का भी व्रत रहते हैं। इस कारण से 28 मार्च दिन शनिवार को पारण करना नवरात्र एवं रामनवमी के व्रत के लिए उत्तम रहेगा। चैत्र शुक्ल दशमी तिथि प्रातः 08.46 मिनट तक है।आपको बता दें कि चैत्र माह में पड़ने के कारण इस नवरात्र को चैत्र कहा जाता है। चैत्र नवरात्र के अतिरिक्त इसे वासंतिक नवरात्र भी कहा जाता हैं। यद्यपि कि इस बार प्रतिपदा तिथि का क्षय हो रहा है फिर भी नवरात्र के लिए 9 दिन मिले हैं।
लेखक के बारे में
Anuradha Pandeyशार्ट बायो
अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।
परिचय और अनुभव
अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।
शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर
अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।
विजन
अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।
विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र
कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।
विशेषज्ञता
कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां


