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Ram mandir dhwajarohan:अयोध्या राम मंदिर में ध्वजारोहण, जानें पुराणों में क्या है इसका महत्व

Ram mandir dhwajarohan:अयोध्या राम मंदिर में ध्वजारोहण, जानें पुराणों में क्या है इसका महत्व

संक्षेप:

Ram mandir dhwajarohan Ayodhya: नारदपुराण में कहा गया है कि जो भी भगवान्‌ विष्णु के मंदिर में ध्वजारोपण करता है, वह ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा पूजित होता है। मंदिर में ध्वजारोपण का फल किसी सुवर्ण का एक हजार भार दान के बराबर ही होता है।

Nov 25, 2025 11:25 am ISTAnuradha Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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Ram mandir dhwajarohan Ayodhya: आज राम जन्म भूमि अयोध्या में अभिजीत मुहूर्त में ध्वजारोहण किया जाएगा। ध्वजारोहण का जिक्र पुराणों में भी मिलता है। इसका महत्व नारद पुराण समेत कई पुराणों में है। कहा गया है कि जो भी भगवान विष्णु के मंदिर में ध्वजारोपण करता है, उसके सभी पाप दूर हो जाते हैं। यह सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला है। आज राम मंदिर के इस ध्वज में सूर्यदेव का निशान और कोविदार का संकेत अंकित है। ध्वज 22 फुट लंबा और 11 फुट चौड़ा है और इसका वजन 2 से 3 किलोग्राम के बीच है। आइए जानें इसके बारे में

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नारदपुराण में लिखा है ध्वजारोपण का महत्व

पुराणों में ध्वजारोपण का बहुत अधिक फल बताया गया है। नारदपुराण में कहा गया है कि जो भी भगवान्‌ विष्णु के मंदिर में ध्वजारोपण करता है, वह ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा पूजित होता है। यह भी कहा जाता है कि मंदिर में ध्वजारोपण का फल किसी को सुवर्ण का एक हजार भार दान देने के बराबर ही माना जाता है। अलावा स्नान, तुलसी की सेवा शिवलिंग का पूजन-ये सब कर्म ही ध्वजारोपण के बराबर ही माने जाते हैं। ध्वजारोपण का कर्म सब पापों को दूर करने वाला है। ध्वज का दण्ड बांस का अथवा साखू आदि का हो तो कहा जाता है कि इससे सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। जो भी ध्वजा को आरोपित करता है वो सभी अनेकों महापातकों से मुक्त हो जाते हैं। ऐसा भी कहा गया है कि भगवान्‌ विष्णु के मंदिर में स्थापित किया हुआ ध्वज जब अपनी पताका फहराने लगता है, उस समय आधे पल में ही वह उसे जो भी इसे लगाता है, उसके सभी पापों को नष्ट कर देता है।

कैसे होती है ध्वजारोहण (dhwajarohan) की पूजा
पुराणों में लिखा है कि प्रातःकाल उठकर विधिपूर्वक स्नान करें फिर भगवान्‌ विष्णु की पूजा करे। चार ब्राह्मणों क साथ स्वस्तिवाचन करके ध्वजारोपण के लिए नान्दीमुख-श्राद्ध करें। इसके बाद ध्वज और स्तंभ का गायत्री-मंत्र से जल से अभिषेक किया जाता है। फिर उस ध्वज के वस्त्र में सूर्य, गरुड और चन्द्रमा की पूजा की जाती है। ध्वज के दण्ड में धाता और विधाता का पूजन किया जाता। हल्दी अक्षत और गंध आदि सामग्रियों से विशेषतः श्वेत पुष्पों से पूजन करना चाहिए।

अभिजीत मुहूर्त में होगा ध्वजारोपण
अभिजीत मुहूर्त का चयन शक्ति और सौभाग्य का माना जाता है। कहा जाता है भगवान श्रीराम का जन्म और भगवान कृष्ण का जन्म भी इसी मुहूर्त में हुआ था, यह भी कहा जाता है कि इस मुहूर्त में किया गया कार्य भगवान विष्णु की कृपा दिलाता है। ध्वजारोपण के लिए यही मुहूर्त चुना गया है। अभिजीत मुहूर्त शुभ और शक्तिशाली समय है, जो दोपहर 12 बजे के आसपास शुरू होता है और लगभग 48 मिनट तक रहता है।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey
अनुराधा पांडे लाइव हिन्दुस्तान में एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन लीड कर रही हैं। इन्हें पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। ज्योतिष और धर्म-अध्यात्म से जुड़े विषयों पर पिछले 10 सालों से लिख रही हैं। इन्होंने हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा भारतीय जनसंचार संस्थान, दिल्ली और ग्रैजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया है। लाइव हिन्दुस्तान में करियर का लंबा हिस्सा बीता और काम करते-करते 9 साल हो गए हैं। एस्ट्रोलॉजी और करियर से जुड़ी खबरों के अलावा हेल्थ पर लिखने शौक है। इससे पहले तीन साल तक आज तक वेबसाइट में एजुकेशन सेक्शन में भी काम किया है। और पढ़ें
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