
Ram Mandir Dhwajarohan: राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के लिए शुक्रवार से पंच दिवसीय अनुष्ठान शुरू
राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के लिए शुक्रवार से पंच दिवसीय अनुष्ठान प्रारम्भ होगा। इस अवसर पर चतुर्वेदों के साथ अलग-अलग देवी-देवताओं के सूक्तों समेत विविध ग्रंथों का पारायण भी शुरू होगा।
राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के लिए शुक्रवार से पंच दिवसीय अनुष्ठान प्रारम्भ होगा। इस अवसर पर चतुर्वेदों के साथ अलग-अलग देवी-देवताओं के सूक्तों समेत विविध ग्रंथों का पारायण भी शुरू होगा। पंचायतन देवी-देवताओं के मंत्रों से दस लाख आहुतियां दी जाएंगी। नासिक महाराष्ट्र से आए वैदिक आचार्य रवीन्द्र पैठाढ़े ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि के प्रधान देवता रामलला है, इसलिए श्रीराम नाम मंत्रों से सवा लाख आहुतियां दी जाएंगी। यह सभी अनुष्ठान प्रातः काल पंचांग पूजन, मंडप प्रवेश, वेदी पूजन और आचार्य वरण के उपरांत शुरू होगा। बताया गया कि इस मौके पर अरणि मंथन से यज्ञकुंड में अग्नि देव का प्राकट्य भी होगा और इसके साथ आहुतियां डालने का क्रम भी शुरू हो जाएगा। उधर इस अनुष्ठान के पहले गुरुवार को दोपहर तीन बजे मुख्य यजमान व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डा अनिल मिश्र का क्षौर कर्म के साथ प्रायश्चित कर्म पूर्ण कराया गया।

राम मंदिर परिसर ध्वजारोहण की भव्य तैयारियों के बीच दिव्यता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत संगम बन गया है। गुरुवार की शाम के समय प्रकाश की सतरंगी किरणों से नहाया ‘जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य द्वार नं 11’ ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अयोध्या स्वयं एक नए स्वर्णिम युग का स्वागत कर रही हो। रोशनी और सूक्ष्म शिल्प वाली यह भव्य संरचना रामनगरी की आध्यात्मिक शान को और ऊंचाई दे रही है।
शोभा यात्रा निकाली
राममंदिर में ध्वजारोहण के अनुष्ठान के पहले गुरुवार को 501 कलशों के साथ भव्य शोभायात्रा ने अयोध्या धाम को राम के रंग में रंग दिया। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अब अयोध्या एक और ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। 25 नवंबर का ध्वजारोहण का क्षण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि करोड़ों सनातन भक्तों की भावनाओं और रामायणकालीन परंपरा का पुनर्जागरण होगा।





