शनि की कुंभ राशि में लगेगा रक्षाबंधन का चंद्रग्रहण, क्या राखी बांधने पर होगा असर?

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इस साल रक्षा बंधन पर चंद्रग्रहण लग रहा है।  चंद्रग्रहण शनि की कुंभ राशि में होगा। ऐसे में क्या होगा इसका राखी बांधने पर असर। यहां पढ़ें 

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रक्षा बंधन पर क्या असर होगा?

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण लग रहा है। जब चंद्र ग्रहण लगेगा तो चंद्रमा शनि की कुंभ राशि में होंगे। ऐसे में इस ग्रहण का रक्षा बंधन पर क्या असर होगा। क्या राखी बांधन के समय में इसके कारण बदलाव किया जाएगा। यहां इसके बारे में जानें। रक्षा बंधन का मतलब होता है सावन मास का समापन, यह 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के साथ होगा। सावन मास भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है।

इस साल सावन में दो ग्रहण?

पहले सावन की बात कर लेते हैं। इस साल सावन का पावन माह 30 जुलाई से शुरू होगा। कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया गया था, तो इससे निकले हलाहल विष से सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। इस साल सावन में दो ग्रहण पड़ रहे हैं। इनमें एक सूर्य ग्रहण और एक चंद्रग्रहण। पहला सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन पड़ रहा है और दूसरा चंद्रग्रहण सावन के अंतिन दिन पूर्णिमा पर पड़ रहा है। सावन अमावस्या 12 अगस्त को है और सावन पूर्णिमा 29 अगस्त को है।

क्या इस बार रक्षाबंधन पर लगेगा चंद्र ग्रहण?

सावन पूर्णिमा- 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 8 मिनट

समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार -प्रातः 9 बजकर 48 मिनट पर

रक्षा बंधन- 28 अगस्त 2026

दूसरा चंद्र ग्रहण -सुबह 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक ग्रहण लगेगा। चंद्रग्रहण ऐसे समय में लग रहा है जब भारत में दिन होगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका धार्मिक तौर पर यह मान्य नहीं होगा। इसलिए इसका सूतक काल भी नहीं माना जाएगा। इसलिए इस दौरान रक्षा बंधन पर राखी बांधने का भी कोई समय का असर नहीं होगा। पूरे दिन किसी भी समय राखी बांध सकते हैं। इसलिए इस ग्रहण का असर ज्योतिषिय दृष्टि से तो होगा, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इस पर कोई असर नहीं माना जाएगा। इसलिए इस ग्रहण का राशियों पर तो असर होगा, लेकिन इस ग्रहण का धार्मिक तौर पर कोई असर मान्य नहीं होगा।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


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अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


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