रक्षाबंधन कब है : 27 या 28 अगस्त राखी पूर्णिमा कब, भद्राकाल, पंचक कब तक, राखी बांधनें को लेकर पढ़ें ज्योतिर्विद की बात
Raksha bandhan kab hai: इस साल रक्षा बंधन के दिन चंद्र ग्रहण और भद्रा राहुकाल को लेकर अगर आप भी टेंशन कर रहे हैं तो यहां 3 एस्ट्रोलॉजर आपको इसी की जानकारी देंगे। इसके अलावा राखी पूर्णिमा कब तक है।

इस साल रक्षा बंधन के दिन कई अच्छे और शुभ योग बन रहे हैं, इनमें से एक सौम्य औदायिक योग भी है। अगर आप तारीख को लेकर कंफ्यूज हो रहे हैं, कि 27 और 28 किस दिन राखी बंधेगी, तो आपको बता दें कि 28 अगस्त को इस बार रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन सावन पूर्णिमा उदया तिथि में मिल रही है। इस साल रक्षा बंधन पर अतिगंड योग भी बन रहा है। भद्रा भी इस साल राखी बांधने पर टेंशन नहीं देगी। भाई और बहन के अटूट स्नेह का परिचायक बन चुके इस पर्व के संदर्भ में द्रौपदी और कृष्ण की कथा आधार बन चुकी है। इस त्योहार को सलोना भी कहा जाता है। इसको लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं।
क्या है भद्राकाल, भद्रा और राहुकाल का समय कब है?
ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि भद्रा की स्थिति पर विचार आवश्यक है। यदि वह स्वर्ग लोक या पाताल लोक में हो तो कोई दोष नहीं है, लेकिन यह ध्यातव्य है प्रत्येक वर्ष भद्रा मृत्यु लोक में नहीं रहता है। वह या पाताल या नागलोक में ही रहता है। फिर धर्मशास्त्रियों ने इसको वर्जित माना है। भद्रा की स्थिति कहीं भी हो लेकिन श्रावणी कर्म और रक्षाबंधन में भद्रा सर्वदा ही त्याज्य रहता है। उन्होंने कहा कि यह भ्रामक विचारधारा है कि पाताल लोक या उर्ध्व लोक में होने से भद्रा में रक्षाबंधन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि व्रती को इस दिन वेदोक्त विधि से रक्षाबंधन, पितृतर्पण और ऋषिपूजन करना चाहिए। इस दिन भद्रा 27 तारीख को ही खत्म हो रही है और राहुकाल सुबह 10:54 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा।
रक्षा बंधन के दिन होती है श्रवण कुमार की पूजा
ज्योतिषाचार्य पं. जितेंद्र नाथ पाठक ने बताया कि उदया तिथि पूर्णिमा है। सौम्या नाम के योग के साथ शुभ दिन भी है। भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार, एक बार देवता और दानवों में बारह वर्ष तक युद्ध हुआ। इस युद्ध में देवता विजयी नहीं हुए, तब बृहस्पति ने देवताओं को सुझाव दिया कि युद्ध रोक देना चाहिए। यह सुनकर इन्द्राणी ने कहा कि मैं कल इंद्र को राखी बांधूंगी। उसके प्रभाव से उनकी रक्षा होगी और वह विजयी होंगे। कहा जाता है कि श्रावण शुक्ल पक्ष के पूर्णिमा को दिन भद्रा वर्जित काल में उन्होंने रक्षा बांधी थी और उस रक्षा के प्रभाव से इंद्र सहित देवगण विजयी हुए थे। इस दिन श्रवण कुमार की पूजा की जाती है। साथ ही, ऋषिपूजन और उपाकर्म सहित श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन, संस्कृत दिवस, सभी कार्य के शुभ मुहूर्त हैं।
चंद्रग्रहण को लेकर कोई टेंशन, इसका असर बेअसर
चंद्र ग्रहण इस साल 28 अगस्त को लग रहा है, लेकिन राखी बांधने को लेकर इस दिन कोई नियम और सूतक काल नहीं माना जाएगा।इस दिन राखी पर चंद्रग्रहण का कोई असर नहीं होगा।
ज्योतिर्विद ने बताया 28 अगस्त को राखी कब बांधें? राखी बांधने के मुहूर्त एवं चौघड़िया
ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र ने बताया कि हृषिकेश पंचाग के अनुसार, इस दिन सूर्योदय 5:41 बजे और पूर्णिमा तिथि का मान प्रातः 9:18 बजे तक है। वहीं, शतभिषा सम्पूर्ण दिन और शेष रात्रि 4:01 बजे तक रहेगा। इसलिए प्रातःकाल 05:41 बजे के बाद और दिन में 09:18 बजे के अंतर्गत रक्षाबंधन किया जा सकता है। उनका कहना है कि इसमें अपराह्न तिथि ली जाती है। यदि दो दिन है तो इसमें पूर्वा और परा दोनों ली जाती है। इस दिन सुकर्मा योग सुबह 07:26 से 09:48 बजे तक रहेगा, यह पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है, इस दिनन पूर्णिमा तिथि भी है। इस दिन अमृत मुहूर्त सुबह 09:48 से 10:53 बजे तक शुभ समय । अभिजीत मुहूर्त व शुभ दोपहर 12:28 से 02:03 बजे तक उत्तम एवं मंगलकारी समय है। अगर सुबह राखी नहीं बांध पा रहे हैं तो चर (संध्याकालीन) शाम 05:12 से 06:47 बजे तक शाम के समय राखी बांध सकते हैं।
राखी बांधने के लिए वर्जित समय
यदि उस दिन भद्रा है तो उसका परित्याग करना चाहिए। भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों वर्जित है, क्योंकि श्रावणी से राजा का और फाल्गुनी से प्रजा का अनिष्ट होता है।


