रक्षाबंधन कब है : 27 या 28 अगस्त राखी पूर्णिमा कब, भद्राकाल, पंचक कब तक, राखी बांधनें को लेकर पढ़ें ज्योतिर्विद की बात

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Raksha bandhan kab hai: इस साल रक्षा बंधन के दिन चंद्र ग्रहण और भद्रा राहुकाल को लेकर अगर आप भी टेंशन कर रहे हैं तो यहां 3 एस्ट्रोलॉजर आपको इसी की जानकारी देंगे। इसके अलावा राखी पूर्णिमा कब तक है।

 chandra grahan 2026, rakhi bandhne ka shubh muhurt, chandra grahan 2026 in india date and time ,grahan kab hai
रक्षाबंधन कब है रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

इस साल रक्षा बंधन के दिन कई अच्छे और शुभ योग बन रहे हैं, इनमें से एक सौम्य औदायिक योग भी है। अगर आप तारीख को लेकर कंफ्यूज हो रहे हैं, कि 27 और 28 किस दिन राखी बंधेगी, तो आपको बता दें कि 28 अगस्त को इस बार रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा, क्योंकि इस दिन सावन पूर्णिमा उदया तिथि में मिल रही है। इस साल रक्षा बंधन पर अतिगंड योग भी बन रहा है। भद्रा भी इस साल राखी बांधने पर टेंशन नहीं देगी। भाई और बहन के अटूट स्नेह का परिचायक बन चुके इस पर्व के संदर्भ में द्रौपदी और कृष्ण की कथा आधार बन चुकी है। इस त्योहार को सलोना भी कहा जाता है। इसको लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं।

क्या है भद्राकाल, भद्रा और राहुकाल का समय कब है?

ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि भद्रा की स्थिति पर विचार आवश्यक है। यदि वह स्वर्ग लोक या पाताल लोक में हो तो कोई दोष नहीं है, लेकिन यह ध्यातव्य है प्रत्येक वर्ष भद्रा मृत्यु लोक में नहीं रहता है। वह या पाताल या नागलोक में ही रहता है। फिर धर्मशास्त्रियों ने इसको वर्जित माना है। भद्रा की स्थिति कहीं भी हो लेकिन श्रावणी कर्म और रक्षाबंधन में भद्रा सर्वदा ही त्याज्य रहता है। उन्होंने कहा कि यह भ्रामक विचारधारा है कि पाताल लोक या उर्ध्व लोक में होने से भद्रा में रक्षाबंधन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि व्रती को इस दिन वेदोक्त विधि से रक्षाबंधन, पितृतर्पण और ऋषिपूजन करना चाहिए। इस दिन भद्रा 27 तारीख को ही खत्म हो रही है और राहुकाल सुबह 10:54 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक रहेगा।

रक्षा बंधन की विधि, आदि जानने के लिए यहां क्लिक करें

रक्षा बंधन के दिन होती है श्रवण कुमार की पूजा

ज्योतिषाचार्य पं. जितेंद्र नाथ पाठक ने बताया कि उदया तिथि पूर्णिमा है। सौम्या नाम के योग के साथ शुभ दिन भी है। भविष्य पुराण की एक कथा के अनुसार, एक बार देवता और दानवों में बारह वर्ष तक युद्ध हुआ। इस युद्ध में देवता विजयी नहीं हुए, तब बृहस्पति ने देवताओं को सुझाव दिया कि युद्ध रोक देना चाहिए। यह सुनकर इन्द्राणी ने कहा कि मैं कल इंद्र को राखी बांधूंगी। उसके प्रभाव से उनकी रक्षा होगी और वह विजयी होंगे। कहा जाता है कि श्रावण शुक्ल पक्ष के पूर्णिमा को दिन भद्रा वर्जित काल में उन्होंने रक्षा बांधी थी और उस रक्षा के प्रभाव से इंद्र सहित देवगण विजयी हुए थे। इस दिन श्रवण कुमार की पूजा की जाती है। साथ ही, ऋषिपूजन और उपाकर्म सहित श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन, संस्कृत दिवस, सभी कार्य के शुभ मुहूर्त हैं।

चंद्रग्रहण को लेकर कोई टेंशन, इसका असर बेअसर
चंद्र ग्रहण इस साल 28 अगस्त को लग रहा है, लेकिन राखी बांधने को लेकर इस दिन कोई नियम और सूतक काल नहीं माना जाएगा।इस दिन राखी पर चंद्रग्रहण का कोई असर नहीं होगा।

ज्योतिर्विद ने बताया 28 अगस्त को राखी कब बांधें? राखी बांधने के मुहूर्त एवं चौघड़िया

ज्योतिषाचार्य पं. शरद चंद मिश्र ने बताया कि हृषिकेश पंचाग के अनुसार, इस दिन सूर्योदय 5:41 बजे और पूर्णिमा तिथि का मान प्रातः 9:18 बजे तक है। वहीं, शतभिषा सम्पूर्ण दिन और शेष रात्रि 4:01 बजे तक रहेगा। इसलिए प्रातःकाल 05:41 बजे के बाद और दिन में 09:18 बजे के अंतर्गत रक्षाबंधन किया जा सकता है। उनका कहना है कि इसमें अपराह्न तिथि ली जाती है। यदि दो दिन है तो इसमें पूर्वा और परा दोनों ली जाती है। इस दिन सुकर्मा योग सुबह 07:26 से 09:48 बजे तक रहेगा, यह पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है, इस दिनन पूर्णिमा तिथि भी है। इस दिन अमृत मुहूर्त सुबह 09:48 से 10:53 बजे तक शुभ समय । अभिजीत मुहूर्त व शुभ दोपहर 12:28 से 02:03 बजे तक उत्तम एवं मंगलकारी समय है। अगर सुबह राखी नहीं बांध पा रहे हैं तो चर (संध्याकालीन) शाम 05:12 से 06:47 बजे तक शाम के समय राखी बांध सकते हैं।

राखी बांधने के लिए वर्जित समय

यदि उस दिन भद्रा है तो उसका परित्याग करना चाहिए। भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों वर्जित है, क्योंकि श्रावणी से राजा का और फाल्गुनी से प्रजा का अनिष्ट होता है।

Anuradha Pandey

लेखक के बारे में

Anuradha Pandey

शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


परिचय और अनुभव

अनुराधा पांडे पत्रकारिता जगत का एक अनुभवी चेहरा हैं, जिन्हें मीडिया में 16 वर्षों का व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और संस्थान के एस्ट्रोलॉजी और करियर सेक्शन की इंचार्ज हैं। अनुराधा पिछले 10 सालों से लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में लिख रही हैं। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में उन्होंने धर्म जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी लेखनी से करोड़ों पाठकों का भरोसा जीता है। उनके पास खबरों को न केवल प्रस्तुत करने, बल्कि सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और विश्लेषणात्मक कंटेंट देने का लंबा अनुभव है। वह शिव महापुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और कई अन्य शास्त्रों के जटिल तथ्यों को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं।


शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर सफर

अनुराधा ने अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आज समाज अखबार से की। इसके बाद उन्होंने 'आज तक' (Aaj Tak) में एजुकेशन सेक्शन में तीन साल तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2015 से वह लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ी हैं और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन का नेतृत्व कर रही हैं। उनका गहरा अनुभव उन्हें जटिल विषयों पर सरल और प्रभावी ढंग से लिखने में सक्षम बनाता है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, सीसीएसयू से एम.कॉम और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एवं मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।


विजन

अनुराधा का उद्देश्य एस्ट्रोलॉजी (धर्म) के माध्यम से राशियों पर ग्रहों के प्रभाव, कुंडली, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र, भाव और दशा-विश्लेषण को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है। ग्रहों का व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर क्या असर पड़ता है, इन जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को आम पाठकों के लिए सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता है। इसके साथ ही टीम का कुशल मार्गदर्शन और कंटेंट की क्वालिटी सुनिश्चित करना भी उनके विजन का अहम हिस्सा है।


विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र

कुंडली एवं ग्रह-दशा के माध्यम से राशियों पर ग्रहों का प्रभाव, नक्षत्रों का आम लोगों की जिंदगी पर असर और इससे जुड़ी एक्सपर्ट से वेरिफाइड सलाह पाठकों तक पहुंचाना उनका प्रमुख कार्य क्षेत्र है। वे धार्मिक और समसामयिक विषयों पर गहराई से अध्ययन कर तथ्यपरक जानकारी प्रस्तुत करती हैं। उनका अनुभव सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक और निरंतर शोध पर आधारित है। जन्म कुंडली विश्लेषण, ग्रह-नक्षत्रों की चाल और वैदिक ज्योतिष पर उनकी गहरी पकड़ उनके लेखों को विश्वसनीय बनाती है। खबरों की दुनिया से इतर, अनुराधा जी को किताबें पढ़ना पसंद है, जो उनके शोधपरक लेखन को और समृद्ध बनाता है।


विशेषज्ञता

कुंडली एवं ग्रह-दशा
ग्रह नक्षत्रों का लोगों पर असर
धर्म एवं भारतीय परंपराएं
व्रत-त्योहारों का महत्व
ग्रहों की स्थिति और राशियां

और पढ़ें
जानें Navratri 2026, Rashifal और Panchang की सटीक जानकारी। रोजाना पूजा-पाठ के लिए पढ़ें Shiv Chalisa, Shiv Aarti, Shiv Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Stuti, Hanuman Chalisa और Bajrang Baan।
Hindi Newsधर्म न्यूज़रक्षाबंधन कब है : 27 या 28 अगस्त रक्षा बंधन किस दिन, भद्राकाल, पंचक कब तक