रक्षाबंधन 2026: भाई से पहले किसे बांधनी चाहिए राखी? जानें क्या है धार्मिक मान्यता

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश से करने के बाद लड्डू गोपाल और घर के अन्य देवी-देवताओं को राखी अर्पित की जा सकती है। इसके बाद भाई को तिलक, अक्षत और आरती के साथ राखी बांधी जाती है।

Raksha Bandhan
Raksha Bandhan 2026

रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी तो हर घर में होती है, लेकिन क्या आपको पता है कि भाई को राखी बांधने से पहले भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित करने की भी परंपरा है? हिंदू धार्मिक मान्यताओं में किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से करने का विधान बताया गया है। इसी वजह से रक्षाबंधन के दिन भी राखी बांधने का क्रम रखा जाता है। मान्यता के अनुसार, भाई की कलाई पर राखी बांधने से पहले सबसे पहले भगवान गणेश को रक्षा सूत्र अर्पित करना चाहिए। इसके बाद लड्डू गोपाल और घर के मंदिर में विराजमान अन्य देवी-देवताओं को राखी या रक्षा सूत्र अर्पित किया जा सकता है। भगवान को रक्षा सूत्र बांधने के बाद ही भाई की कलाई पर राखी बांधने की परंपरा मानी जाती है।

सबसे पहले गणेश जी को बांधें राखी

रक्षाबंधन के दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहनें। पूजा की जगह पर भगवान गणेश का पूजन करें। उन्हें रोली, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद गणेश जी को रक्षा सूत्र बांधें। गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उनका स्मरण करने की परंपरा है। रक्षाबंधन पर भी इसी भाव से सबसे पहले गणेश जी को राखी अर्पित करना शुभ माना जाता है।

इसके बाद लड्डू गोपाल को अर्पित करें राखी

गणेश जी के बाद घर में विराजमान लड्डू गोपाल को राखी अर्पित कर सकते हैं। भगवान कृष्ण को रक्षा सूत्र बांधते समय परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें। कई घरों में लड्डू गोपाल को छोटे आकार की राखी पहनाने की भी परंपरा है। अगर घर के मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हैं तो उन्हें भी रक्षा सूत्र अर्पित किया जा सकता है।

भगवान को राखी बांधने के बाद भाई को बांधे राखी

देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित करने के बाद भाई को राखी बांधें। भाई को पूजा की चौकी पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर भाई को मिठाई खिलाएं। राखी बांधते समय बहन भाई की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।

क्यों माना जाता है यह क्रम शुभ?

रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं है। इसमें रक्षा, मंगलकामना और पारिवारिक प्रेम का भाव जुड़ा है। भगवान को पहले रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा इसी धार्मिक भाव से जुड़ी मानी जाती है। पहले ईश्वर का आशीर्वाद लेकर फिर भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ माना जाता है।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


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करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
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एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


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काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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