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Raksha Bandhan Muhurat : रक्षाबंधन के दिन ग्रह-गोचरों की दृष्टि बेहद शुभ, भद्रा का नहीं है साया, दिनभर है शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan Muhurat : रक्षाबंधन के दिन ग्रह-गोचरों की दृष्टि बेहद शुभ, भद्रा का नहीं है साया, दिनभर है शुभ मुहूर्त

संक्षेप: Raksha Bandhan 2025 Shubh Muhurat : सावन मास की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पावन त्योहार मनाया जाता है। इस साल राखी का त्योहार नौ अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा। इन दिन ग्रह-गोचरों की दृष्टि शुभ है। भद्रा साया भी नहीं हैं। दिनभर शुभ मुहूर्त है।

Fri, 8 Aug 2025 01:41 PMYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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Raksha Bandhan 2025 Shubh Muhurat : सावन मास की पूर्णिमा पर रक्षाबंधन का पावन त्योहार मनाया जाता है। इस साल राखी का त्योहार नौ अगस्त शनिवार को मनाया जाएगा। इन दिन ग्रह-गोचरों की दृष्टि शुभ है। भद्रा साया भी नहीं हैं। दिनभर शुभ मुहूर्त है। खास यह भी कि आयुष्मान, सौभाग्य, सर्वार्थसिद्धि और जयद योग का महामिलन भी हो रहा है। दिनभर पूर्णिमा का मान है। बहनें अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना करेंगी तथा उनसे अपनी रक्षा की सौगंध लेंगी। इस बार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि आठ अगस्त को दोपहर एक बजकर 40 मिनट से प्रारंभ होकर नौ अगस्त को दोपहर एक बजकर 23 मिनट तक है। पंचागों के अनुसार उदयव्यापिनी पूर्णिमा में राखी का त्योहार मनाया जाता है। अच्छी बात यह भी कि इस दिन अशुभ ग्रहों की दृष्टि नहीं है। इसलिए पूरे दिन बहने अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधेंगी।

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रक्षा सूत्र बांधने का शुभ मुहूर्त: 1. सौभाग्य व आुष्यमान योग : प्रात:काल से सुबह 7.12 बजे तक 2. सर्वार्थसिद्धि योग : प्रात:काल 7.13 से मध्याह्न 11.20 तक 3. अभिजीत मुहूत : मध्याह्न 11.24 से 12.36 तक 4. जयद योग : मध्याह्न 12.37 से शाम 6.32 तक

देवताओं ने रक्षासूत्र बांधक असुरों पर पायी थी विजय- प्राचीन काल में एक बार बारह वर्षों तक देवासुर संग्राम हुआ था। इसमें देवताओं की हार और असुरों की विजयी हुई। असुरों ने स्वर्ग पर आधिपत्य कर लिया। निराश और दुखी भगवान इन्द्रदेव गुरु बृहस्पति के पास गए। देवताओं को चिंतित देखकर देवगुरु बृहस्पति ने कहा कि कल श्रावण शुल्क पूर्णिमा है। मैं विधानपूर्वक रक्षा सूत्र तैयार करुंगा, उसे आप स्वस्तिवाचन पूर्वक ब्रह्मणों से बंधवा लीजिएगा। इससे आप अवश्य विजयी होंगे। दूसरे दिन पूर्णिमा को बताये रक्षा विधान को स्वस्तिवाचन पूर्वक देवताओं ने कलाई में बंधाया। फलत: देवराज इन्द्र विजयी हुई। यह प्रचलन राखी के रूप में आज भी प्रचलित है।

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Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi
योगेश जोशी हिंदुस्तान डिजिटल में सीनियर कंटेंट प्रड्यूसर हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मेहला गांव के रहने वाले हैं। पिछले छह सालों से पत्रकरिता कर रहे हैं। एनआरएआई स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेश से जर्नलिज्म में स्नातक किया और उसके बाद 'अमर उजाला डिजिटल' से अपने करियर की शुरुआत की, जहां धर्म और अध्यात्म सेक्शन में काम किया।लाइव हिंदुस्तान में ज्योतिष और धर्म- अध्यात्म से जुड़ी हुई खबरें कवर करते हैं। पिछले तीन सालों से हिंदुस्तान डिजिटल में कार्यरत हैं। अध्यात्म के साथ ही प्रकृति में गहरी रुचि है जिस कारण भारत के विभिन्न मंदिरों का भ्रमण करते रहते हैं। और पढ़ें
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