
रक्षाबंधन पर अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से, जानें आज कब तक राखी बांधना होगा शुभ
Rakhi Bandhne Ka Shubh Muhurat : रक्षाबंधन का पावन पर्व आज है। इस अवसर पर बहन अपनी मान-सम्मान, प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए अपने भाइयों के कलाईयों में रक्षा सूत्र बांधती है और उसके दीर्घायु होने की मंगल कामना करती हैं।
Rakhi Bandhne Ka Shubh Muhurat : रक्षाबंधन का पावन पर्व आज है। इस अवसर पर बहन अपनी मान-सम्मान, प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए अपने भाइयों के कलाईयों में रक्षा सूत्र बांधती है और उसके दीर्घायु होने की मंगल कामना करती हैं। वहीं पौराणिक कथा के अनुसार लक्ष्मीजी ने इसी दिन राजा बलि को भाई बनाकर उन्हें राखी बांधी थी और वामन रूप भगवान को उपहार में मांग लिया था। अतः रक्षा सूत्र बांधते समय यह मंत्र बोला जाता है। येन बध्दो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल,तेन त्वां प्रतिबधनामि रक्षे मा चल मा चल। इस परंपरा के अनुसार इस क्षेत्र में ब्राम्हणों द्वारा अपने यजमानों के कल्याण व श्री वृद्धि के लिए रक्षा सूत्र बांधने की भी परंपरा है। बताया जाता है कि राजा बलि और उसके गुरु शुक्राचार्य की कथा को याद कर यजमान ब्राह्मणों से रक्षा सूत्र बंधवाकर सामर्थ अनुसार दान देते है और इसके बदले में दीर्घायु जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

शुभ मुहूर्त-
इस दिन पूर्णिमा तिथि दोपहर 1:24 बजे तक रहेगी। राखी बांधने का अति विशिष्ट शुभ मुहूर्त सुबह सूर्योदय 5:27 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार का दोष नहीं माना जाएगा। इस वर्ष रक्षाबंधन के लिए पूरा दिन और पूरी रात्रि शुभ मानी गई है, हालांकि सबसे श्रेष्ठ समय सुबह 5:27 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक का रहेगा।
राखी बांधने का सबसे अच्छा मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:53 पी एम तक का समय सबसे अच्छा रहेगा। यह अभिजित मुहूर्त है। हिंदू पंचांग के अनुसार अभिजित मुहूर्त को बेहद ही शुभ माना जाता है।
सबसे पहले देवताओं का बांधे राखी : रक्षाबंधन के दिन सबसे पहले गणेश भगवान, भगवान कृष्ण को और फिर भाई को राखी बांधना चाहिए। भाई के दाहिने हाथ में राखी बांधते समय उसके हथेली पर अक्षत और इलायची रख दें और मुट्ठी बंद करें। अब राखी बांधे और राखी बांधने के बाद भाई को अक्षत और इलायची को लॉकर या तिजोरी में रख सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भाई के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।





