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राहु-केतु किस हालात में चमकाते हैं भाग्य, कब बढ़ा देते हैं बेचैनी?

राहु-केतु किस हालात में चमकाते हैं भाग्य, कब बढ़ा देते हैं बेचैनी?

संक्षेप:

राहु-केतु को लेकर फैले डर की सच्चाई क्या है? जानिए कुंडली में इनके सही भाव और दशा से कैसे मिलती है अचानक सफलता, शोहरत और उन्नति।

Dec 21, 2025 05:16 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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राहु-केतु का नाम आते ही आमतौर पर लोगों के मन में डर, आशंका और नकारात्मकता भर जाती है। ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि कुंडली में राहु या केतु की मौजूदगी जीवन में अचानक संकट, मानसिक तनाव और अस्थिरता लेकर ही आती है। लेकिन ज्योतिषशास्त्र की गहराई में जाकर देखें, तो यह धारणा अधूरी और कई बार पूरी तरह गलत भी साबित होती है। सच यह है कि राहु-केतु ऐसे ग्रह हैं जो इंसान को गिराते भी हैं और उसी गति से ऊपर उठाने की क्षमता भी रखते हैं।

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राहु अतृप्त इच्छाओं और महत्वाकांक्षा का ग्रह

राहु को छाया ग्रह कहा जाता है, लेकिन इसकी शक्ति किसी भी दृश्य ग्रह से कम नहीं मानी जाती। राहु जिस भी भाव में बैठता है, उस भाव से जुड़े विषयों में इंसान को तीव्र इच्छा, लालसा और असंतोष देता है। व्यक्ति जितना भी हासिल कर ले, मन और ज्यादा पाने को बेचैन रहता है।

यही बेचैनी कई बार इंसान को मेहनत, जोखिम और नए रास्ते अपनाने के लिए प्रेरित करती है। ज्योतिष के अनुसार राहु भ्रम, दिखावे और मायाजाल का ग्रह है, जो व्यक्ति को बाहरी चमक-दमक की ओर खींचता है। गलत दशा में यह छल, गलत फैसले और मानसिक भ्रम का कारण बन सकता है, लेकिन अनुकूल दशा में यही राहु अचानक सफलता, ऊंचा पद, विदेशी संपर्क, तकनीक, मीडिया, राजनीति और ग्लैमर की दुनिया में बड़ा नाम दिला सकता है। कई सफल कारोबारी, नेता और सेलेब्रिटी की कुंडली में मजबूत राहु का प्रभाव साफ देखा जाता है।

केतु अलगाव, वैराग्य और आत्मबोध का मार्ग

जहां राहु भौतिक इच्छाओं को बढ़ाता है, वहीं केतु उनसे विरक्ति पैदा करता है। केतु जिस भाव में बैठता है, वहां व्यक्ति को किसी न किसी रूप में अलगाव, दूरी या अधूरापन महसूस हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, सप्तम भाव में केतु वैवाहिक जीवन में भावनात्मक दूरी, गलतफहमियां या संबंधों में ठंडापन ला सकता है। लेकिन केतु को सिर्फ नकारात्मक ग्रह मानना भी बड़ी भूल है। यह आध्यात्मिक उन्नति, गहरी अंतर्दृष्टि, शोध, तंत्र, ज्योतिष और पूर्वजन्म के कर्मों के फल को उजागर करने वाला ग्रह है। अनुकूल स्थिति में केतु व्यक्ति को भौतिक मोह से ऊपर उठाकर आत्मज्ञान, ध्यान और मोक्ष की ओर ले जाता है।

सूर्य-चंद्र से संबंध क्यों है अहम

राहु-केतु को सूर्य और चंद्र के नोड्स माना जाता है, इसलिए इनका संबंध मन, अहंकार और भावनाओं पर गहरा असर डालता है। सूर्य के साथ राहु-केतु की युति व्यक्ति की पहचान, प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास को प्रभावित करती है, जबकि चंद्र के साथ इनका संबंध मानसिक स्थिति, डर, भ्रम और इमोशनल उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकता है।

किन भावों में बनता है सफलता योग

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार 3, 6 और 11 भाव संघर्ष और उपलब्धियों से जुड़े होते हैं। इन भावों में क्रूर ग्रह भी कई बार शुभ फल देते हैं। ऐसे में राहु-केतु इन भावों में बैठकर शत्रुओं पर विजय, मुकदमों में सफलता, साहस, पराक्रम और बड़े लाभ के योग बना सकते हैं। कई बार यही स्थिति अचानक जीवन बदलने वाली सफलता का कारण बन जाती है।

डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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