इन 4 कार्यों में शर्म नहीं साहस दिखाना चाहिए, जानें चाणक्य ने नीति शास्त्र में क्या बताया है?
चाणक्य नीति टुडे, आज का सुविचार 11 सितंबर 2026: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। लोग इन्हें अपनाकर मुश्किल परिस्थितियों को आसानी से पार कर लेते हैं। एक नीति में चाणक्य बताते हैं कि व्यक्ति को कहां शर्म छोड़कर साहस दिखाना चाहिए।

Chanakya Niti 11 September 2026, आज की चाणक्य नीति: आचार्य चाणक्य की नीतियां मनुष्य को कठिन से कठिन समय या परिस्थिति आसानी से पार करने का साहस प्रदान करती हैं। कहा जाता है कि चाणक्य की नीतियों को अपनाना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन जिसने भी इन्हें अपना लिया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सका है। एक नीति में चाणक्य ने बताया है कि व्यक्ति को किन स्थितियों या हालातों में शर्म के बजाय साहस दिखाना चाहिए। चाणक्य का मानना है कि जहां शर्म जरूरी हो वहां व्यक्ति को विनम्र रहना चाहिए और जिस जगह पर साहस की आवश्यकता हो वहां दिखाने में कोई बुराई नहीं है। जानें चाणक्य नीति से व्यक्ति को किन स्थितियों में शर्म छोड़कर साहस दिखाना चाहिए।
श्लोक:
धनधान्यप्रयोगेषु विद्यासंग्रहणेषु च।
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्जः सुखी भवेत्॥
श्लोक का सरल अर्थ:
चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति धन और अनाज के प्रयोग (लेन-देन) में, विद्या (ज्ञान) पाने में, भोजन (आहार) करने में और आपसी व्यवहार में शर्म या संकोच का त्याग कर देता है, वही जीवन में हमेशा सुखी रहता है।
श्लोक का सार:
धन और अनाज के प्रयोग में:
चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को अपने दिए हुए धन को वापस मांगने, व्यापार से जुड़ी किसी भी तरह के लेनदेन, वेतन, या अपने दिए गए पैसों का हिसाब-किताब मांगने में कभी संकोच या शर्म नहीं करनी चाहिए। यहां संकोच या शर्म करने से सीधा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
विद्या प्राप्त करने में:
चाणक्य के अनुसार, अपनी जिज्ञासा या सीखते समय या मन में उठे प्रश्नों का हल पाने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। विद्या किसी से भी प्राप्त की जा सकती है चाहे उम्र में छोटा हो या पद में उच्च हो या नीचे। शिक्षक या ज्ञानी व्यक्ति से खुलकर सवाल पूछने वाला ही ज्ञान प्राप्त कर पाता है। गुरु से प्रश्न नहीं पूछना या शंका का समाधान नहीं करने से तरक्की में बाधा आ सकती है।
आहार (भोजन) करने में:
चाणक्य का मानना है कि मित्र हो, करीबी हो या रिश्तेदार किसी के सामने भोजन करने में संकोच नहीं करना चाहिए। भोजन करते समय कभी अपनी भूख नहीं मारनी चाहिए। लोक-लाज या शर्म में आकर कम खाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
अपनी बातों में और व्यावहारिक संबंधों में:
चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को अपनी बात स्पष्टता और निडरता के साथ कहनी चाहिए। जो व्यक्ति अपने संबंधों और सामाजिक व्यवहार में साफ-सुथरी बात रखता है, वह हमेशा तनाव मुक्त और सुखी रहता है।


