Quote of the day 30 July 2026: गीता के अनुसार, व्यक्ति की ये 3 आदतें बनती हैं कष्ट का कारण
Quote of the day 30 July 2026, Bhagavad Gita Life Lesson: श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए उपदेश वर्णित हैं। यह उपदेश भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के मैदान में अर्जुन को दिए थे। जानें श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार व्यक्ति को किन चीजों का त्याग करना चाहिए।

Bhagavad Gita Quote of the day 30 July 2026: हिंदू धर्म में गीता को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। हजारों वर्षों पुरानी श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि आत्मिक और मानसिक संघर्षों का समाधान प्रदान करने वाला गहरा विज्ञान है। युद्ध के मैदान में जब अर्जुन मानसिक रूप से परेशान हो रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जो ज्ञान दिया, वह आप भी लोगों की तरक्की और उन्नति में काम करता है। श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार व्यक्ति की कुछ आदतें उसकी मुख्य परेशानियों का कारण बनती हैं। अपनी इन आदतों के कारण वह हमेशा असंतुष्ट कहता है और अधर्म के राह पर चला जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 16 के 21वें श्लोक में ऐसी तीन चीजों को बताया गया है जो मनुष्य के लिए नरक के द्वार खोलती है। आइए जानते हैं इनके बारे में।
श्लोक:
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥
श्लोक का अर्थ:
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि काम (अत्यधिक तीव्र इच्छाएं), क्रोध (गुस्सा) और लोभ (लालच)आत्मा का विनाश करने वाले नरक के तीन मुख्य द्वार हैं। इसलिए हर मनुष्य को इन तीन चीजों को पूरी तरह से त्याग करना चाहिए।
श्लोक का सार:
यहां नरक सिर्फ मृत्यु के बाद मिलने वाला कोई स्थान नहीं है बल्कि जीवन में मिलने वाले मानसिक, शारीरिक कष्ट, अशांति, असफलता और दुख भी नरक समान माना जाता है।
कामना:
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि व्यक्ति को अति तीव्र इच्छाएं भी गलत रास्ते पर लेकर जाती हैं। कई बार कामनाएं पूरी नहीं होने पर मनुष्य असंतुष्ट और परेशान हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति झूठ या अधर्म का रास्ता अपना लेता है। साथ ही व्यक्ति के अंदर ईर्ष्या की भावना बढ़ने लगती है। इसलिए व्यक्ति को अपनी इच्छाओं या इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए।
क्रोध:
भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार, क्रोध या गुस्सा व्यक्ति के बुद्धि या विवेक को प्रभावित करता है। अधिक क्रोध में मनुष्य सही फैसले लेने में असमर्थ हो सकता है। कई बार गुस्से में व्यक्ति हिंसा या अपशब्द को अपना लेता है, जिसके कारण परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए व्यक्ति को क्रोध से बचना चाहिए और किसी भी विपरीत परिस्थिति में धैर्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
लालच:
लालच व्यक्ति को बुरे कर्मों की ओर खींच सकता है। कई बार लालच व्यक्ति स्वार्थी भी बन जाता है। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि लालच न सिर्फ व्यक्ति को रिश्तों में दरार ला देता है, बल्कि अनैतिक कार्यों की ओर भी लेकर जाता है। लालच की भावना से व्यक्ति हमेशा असंतुष्ट महसूस करता है। इसलिए व्यक्ति को अपनी मेहनत के बल पर प्राप्त चीजों का उपभोग करना चाहिए।


