Quote of the day: चाणक्य नीति के अनुसार इन 6 लोगों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए
Aaj ki chanakya niti: आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रंथ नीति शास्त्र में मानव जीवन के तमाम पहलुओं जैसे मित्रता, शत्रुता, भरोसा और विश्वासघात समेत कई का विस्तार से वर्णन किया है। एक नीति में उन्होंने बताया है कि किन लोगों पर भरोसा कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।

Quote of the day 3 July 2026, आज का सुविचार चाणक्य नीति: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। कहा जाता है कि चाणक्य की नीतियां अपनाना मुश्किल होता है, लेकिन इनका पालन करने वालों को सफलता अवश्य मिलती है। अपनी नीतियों में चाणक्य ने मानव जीवन को सरल बनाने की कई नीतियां बताई हैं। कई बार लोग हर किसी पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पछतावा होता है। क्योंकि जिस पर व्यक्ति भरोसा करता है, वही अपने स्वार्थ के कारण धोखा दे देता है। आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक में बताया है कि व्यक्ति को किन लोगों पर भरोसा कभी नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं आज की चाणक्य नीति।
श्लोक:
नदीनां शस्त्रपाणीनां नखीनां शृङ्गिणां तथा।
विश्वासो नैव कर्तव्यः स्त्रीषु राजकुलेषु च॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य के अनुसार, नदियों, हथियारों से लैस लोगों, बड़े-बड़े नाखून या पंजे वाले जानवरों (जैसे चीता, शेर), सींग वाले जानवरों (जैसे सांड, बैल), महिलाओं और राजघराने (सत्ता पक्ष) पर कभी भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
श्लोक का सार:
आचार्य चाणक्य के अनुसार, बड़े-बड़े नाखूनों वाले हिंसक प्राणी से बचकर रहना चाहिए। पता नहीं वह कब किस पर हमला कर दें। चाणक्य कहते हैं कि जिन नदियों के पुश्ते या किनारे पक्के नहीं हैं, उन पर इसलिए विश्वास नहीं किया जा सकता कि वे पता नहीं कब अपना रूप प्रचंड कर लें और कब उनकी दिशा बदल जाए। नदी के बहाव का भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसलिए नदी किनारे रहने वाले लोग हमेशा उजड़ते रहते हैं।
चाणक्य के अनुसार, बड़े-बड़े सींग वाले साड़ आदि पशुओं पर विश्वास नहीं किया जा सकता है, पता नहीं उनका मिजाज कब बिगड़ जाए। जिनके पास तलवार आदि कोई हथियार है, उसका भी भरोसा करना मुश्किल होता है क्योंकि वह छोटी बात पर गुस्से में आकर आक्रामक भी हो सकता है। चाणक्य कहते हैं कि चंचल स्वभाव वाली स्त्री पर भरोसा नहीं करना चाहिए। वह अपनी चंचलता से कभी भी विपरीत परिस्थितियां खड़ी कर सकती है। चाणक्य नीति के अनुसार, राजा से जुड़े राज सेवकों और राजकुल के व्यक्तियों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। वह कभी भी राजा के काम भरकर अहित करा सकते हैं। चाणक्य का मानना है कि उनके लिए रिश्तों या संबंधों से ज्यादा राजा के नियम प्रमुख होते हैं। वह राज नियमों के प्रति निष्ठावान और समर्पित होते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


