Quote of the Day: गलती से भी इन 4 लोगों पर लग जाए पैर तो तुरंत मांगे माफी, पढ़ें आचार्य चाणक्य के विचार
आचार्य चाणक्य ने अपने शास्त्र नीतियों में बताया है कि अगर कभी गलती से चार लोगों या फिर चीजों पर पैर लग जाए तो तुरंत माफी मांगनी चाहिए। जानिए इसके बारे में।

आचार्य चाणक्य ने अपनी शास्त्र नीतियों में जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कई सलाह दिए हैं। शास्त्र के अनुसार इंसान की पहचान सिर्फ उसके बड़े कामों से ही नहीं होती है बल्कि उसके संस्कार और व्यवहार से भी होती है। हमारी परंपरा में कुछ चीजों और कुछ लोगों को बहुत सम्मान दिया जाता है। माना जाता है कि अगर कभी अनजाने में उन चीजों पर पैर लग जाए तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चाणक्य नीति के अनुसार ऐसा होने पर तुरंत हाथ जोड़कर या मन ही मन माफी जरुर मांग लेनी चाहिए। चाणक्य के अनुसार ऐसा करने से सामने वाले के प्रति सम्मान भी बना रहता है और खुद को कोई पाप भी नहीं लगता है। जानिए आखिर चाणक्य नीति में किन 4 चीजों पर पैर लगने पर तुरंत माफी मांगने की सलाह दी गई है।
जब अग्नि पर लग जाए पैर
चाणक्य नीति के हिसाब से अग्नि को देवता के रूप में देखा जाता है। पूजा, हवन या फिर कोई भी शुभ काम अग्नि के बिना हमेशा अधूरे ही होते हैं। ऐसे में कभी भी पूजा के दौरान अगर दीए, हवन या फिर चूल्हे वगैरह पर पैर लग जाए तो हाथ जोड़कर माफी मांग लेनी चाहिए। अग्नि के आसपास कभी भी लापरवाही नहीं दिखानी चाहिए। माना जाता है कि अग्नि को सम्मान दिया जाए तो ऐसे घरों में सुख शांति और मान-सम्मान बना रहता है।
बड़े-बुजुर्गों से छू जाए पैर
अपने से बड़ों को सम्मान देना हमें बचपन से सिखाया जाता है। वहीं गुरुओं का सम्मान करना भी हमारी संस्कृति का हिस्सा है। ये सभी लोग अपने एक्सपीरियंस और ज्ञान के जरिए हमें सही रास्ता दिखाते हैं। अगर कभी भी गलती से इन लोगों को पैर छू जाए तो तुरंत माफी मांगकर उनका आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए। चाणक्य नीति के अनुसार जो लोग बड़ों और गुरुओं का सम्मान करते हैं उनकी जिंदगी में मान-सम्मान की कोई भी कमी नहीं होती है। साथ ही ऐसे लोगों को हर कदम पर सफलता ही मिलती है।
गाय को पैर छू जाए तो मांगे माफी
चाणक्य नीति के अनुसार कभी किसी गाय को पैर लग जाए तो भी माफी मांगनी चाहिए। सनातन परंपरा में गाय को मां का दर्जा दिया गया है। ऐसे में अगर कभी भी गलती से गाय से पैर लग जाए तो बिना देरी किए पैर छू लेने चाहिए। ऐसा करने से पाप नहीं लगता है।
कन्या को पैर लगने पर माफी मांगे
छोटी कन्याओं को देवी के रूप में देखा जाता है। अब ऐसे में अगर किसी कन्या को पैर लग जाता है तो माना जाता है कि इससे पाप के भागिदारी बन जाते हैं। ऐसे में कभी भी किसी कन्या के पैर लग जाए तो तुरंत माफी मांगते हुए पैर छू लेने चाहिए। आचार्य चाणक्य के अनुसार इस चीजों को मानने से मन में विनम्रता बनी रहती है। साथ ही दूसरों के प्रति सम्मान का भाव भी बढ़ता है।
डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेखक के बारे में
Garima Singhशॉर्ट बायो:
गरिमा सिंह एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में कार्यरत हैं। वह वास्तु, अंक शास्त्र, रत्न शास्त्र, फेंगशुई और राशिफल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं।
परिचय और अनुभव
गरिमा सिंह डिजिटल मीडिया में लंबे समय से सक्रिय हैं। इस समय वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने करियर में न्यूज, फीचर और एक्सप्लेनर कंटेंट पर काम किया है। अब वह ज्योतिष से जुड़े विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाती हैं। उनके आर्टिकल की खास बात ये है कि वह जटिल ज्योतिषीय बातों को आसान भाषा में समझाने की पूरी कोशिश करती हैं ताकि जिसे एस्ट्रोलॉजी का ए भी नहीं पता है वह भी आसान तरीके से चीजों को समझ सके और उस पर अमल कर सके।
करियर
गरिमा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत रेडियो चैनल रेड एफएम से की। यहां पर उन्होंने रेडियो से जुड़ी बारिकियों को समझने की कोशिश की और मॉर्निंग शो को प्रोड्यूस करने के साथ-साथ कॉपी राइटिंग का भी काम संभाला। साथ में कई विज्ञापनों में वॉइस ओवर भी दिया। इसके अलावा उन्होंने डीडी न्यूज, जी न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में डिजिटल और टीवी पत्रकारिता को करीब से जाना और समझा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का यह अनुभव आज उनके डिजिटल राइटिंग और स्टोरीटेलिंग के तरीके को और भी प्रभावशाली बनाता है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
गरिमा ने साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स और इंग्लिश विषयों में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन दिल्ली और जामिया मिलिया इस्लामिया से टीवी और रेडियो पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इस दौरान उन्होंने इंटर्नशिप भी की। वह जामिया मिलिया इस्लामिया की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं।
एस्ट्रोलॉजी लेखन की सोच
गरिमा का मानना है कि ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि लोगों को सही दिशा और सकारात्मक सोच देना होना चाहिए। उनका फोकस होता है- सरल जानकारी, संतुलित सलाह, भरोसेमंद और उपयोगी कंटेंट। वह शिव पुराण और कई और शास्त्रों की जटिल कथाओं को अपने शब्दों में लिखकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। गरिमा वास्तु शास्त्र और न्यूमरोलॉजी के अलावा फेंगशुई की किताबें पढ़ती रहती हैं और वहां की उपयोगी जानकारियों को पाठकों के साथ समय-समय पर साझा करती हैं।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा गरिमा को गार्डनिंग, कुकिंग और टेबल टेनिस खेलना पसंद है। वह कानपुर से ताल्लुक रखती हैं और एक संतुलित जीवनशैली में विश्वास करती हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
वास्तु शास्त्र
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हस्तरेखा शास्त्र


