Putrada ekadashi vrat katha: पुत्रदा एकादशी व्रत कथा यहां पढ़ें, मुनि लोमेश ने राजा को करवाया था व्रत

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Putrada Ekadashi Vrat Katha : सावन में शुक्ल पक्ष में पुत्रदा एकादशी है। इस साल 23 अगस्त को तिथि खत्म होगी,कब करें व्रत।  लोमेश मुनि ने राजा को बताया पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व और राजा को हुई संतान

Putrada ekadashi Vrat Katha, पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

पुत्रदा एकादशी इस साल 23 और 24 अगस्त दोनों दिन मनाई जाएगी। ज्योतिर्विदों ने बताया कि यह एकादशी श्रावण शुक्ल पक्ष में आती है। 22 और 23 अगस्त की रात को तिथि लग रही है और 23 और 24 अगस्त दोनों तिथि एकादशी तिथि है। 24 अगस्त को एकादशी व्रत रखना श्रेष्ठ है। विशेष रूप से संतान सुख की कामना रखने वाले दंपति को इस दिन व्रत रखने और कथा पढ़ने के लिए कहा जाता है। यहां पढ़ें संपूर्ण कथा

भगवान्‌ श्रीकृष्ण से युधिष्ठिर ने पूछा--मधुसूदन ! सावन में किस नामकी एकादशी होती है ? कृपया उसका वर्णन कीजिये | भगवान्‌ श्रीकृष्ण बोले--सावन में पुत्रदा एकादशी आती है। यह संतान देने वाली है। इस एकादशी की एक कहानी है। बहुत पहले की बात है। द्वापर युगनें माहिष्पतीपुर में राजा महीजित् अपने राज्यका पालन करते थे, किन्तु उन्हें कोई पुत्र नहीं था; इसलिए वह राज्य के राजा होते हुए भी सुखी नहीं महसूस करते थे। अपनी अवस्था अधिक देख राजा को बड़ी चिन्ता हुई उन्होंने कहा- इस जन्म में मुझसे कोई पाप नहीं हुआ। मैंने कभी भी बेईमानी से धन या अन्यायसे कमाया हुआ धन नहीं जमा किया है । ब्राह्मणों और देवताओंका धन भी मैंने कभी नहीं लिया है। फिर मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। सज्जन पुरुषों का सदा सम्मान किया और किसीको द्वेषका पात्र नहीं समझा । फिर क्या कारण है, जो मेरे घर में आजतक संतान उत्पन्न नहीं हुआ। राजा ने जब ये बात अपने प्रजा और पुरोहितों के सामने रखी तो सभी लोग इधरउधर घूमकर ऋषि सेवित आश्रमोंकी तलाश करने लगे। इतने ही में उन्हें मुनिश्रेष्ठ लोमशका दर्शन हुआ । लोमशजी धर्मके तत्त्वज्ञ, सम्पूर्ण शास्त्रोंके विशिष्ट विद्वान, दीर्घायु ओर महात्मा हैं। उनका शरीर लोमसे भरा हुआ है। वे ब्रह्माजीके समान तेजस्वी हैं।

वे महामुनि तीनों कालोंकी बातें जानते हैं । उन्हें देखकर सब लोगोंको लगा कि ये जरूर राजा की परेशानी के बारे में बता देंगे। जब सब लोग लोमेश ऋषि के बाद गए तो उन्होंने पूछा अपने आगमन का कारण बताओ कि तुमलोगों के लिए जो हितकर कार्य होगा, उसे मैं अवश्य करूंगा। प्रजा ने कहा कि इस समय महीजित नाम के राजा हैं, उन्हें कोई पुत्र नहीं है। हमलोग उन्हीं की प्रजा हैं, जिनका उन्होंने पुत्र की तरह हमारा पालन किया है। उन्हें पुत्रहीन देख, उनके दुःख से दुःखित हो गएहैं, इसलिए हम तपस्या करने का दृढ़ निश्चय करके यहां आए हैं। राजा के भाग्य से इस समय हमें आपका दर्शन मिल गया है। महापुरुषों के दर्शन से ही मनुष्यों के सब कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

मुने हमें इसका उपाय बताएं। महर्षि लोमश दो घड़ी तक ध्यान करते रहे। इसके बाद उन्होंने कहा कि राजा महीजित्‌ पूर्वजन्म में मनुष्यों को चूसनेवाला धनहीन वैद्य था। वह वैद्य गांव-गांव घूमकर व्यापार किया करता था। एक दिन राजा को प्यास लग रही थी। पानीसे भरी हुई बावली देखकर बैद्य ने वहां पानी पीने की सोची, लेकिन तभी एक गाय बछड़े के साथ प्यास से व्याकुल ओर ताप से पीड़ित थी; अतः बावलीमें जाकर जल पीने लगी | बैद्य ने पानी पीती हुई गाय को हांककर दूर हटा दिया और स्वयं पानी पीया। उसी पाप-कर्म के कारण राजा इस समय पुत्रहीन हुए हैं। किसी जन्मके पुण्यसे इन्हें अकण्टक राज्यकी प्राप्ति हुई है।

मुनि ने कहा, पुराणमें सुना जाता है कि प्रायश्चित्तरूप पुण्यसे पाप नष्ट होता है; अतः पुण्यका उपदेश कीजिये, जिससे उस पापका नाश हो जाय। लोमशजी बोले--श्रावण मासके शुकृपक्षमें जो एकादशी होती है, वह पुत्रदा'के नामसे विख्यात है। वह मनोवाज्छित फल प्रदान करनेवाली है। तुमलोग उसीका ब्रत करो। यह सुनकर प्रजाओंने मुनिको नमस्कार किया और नगरमें आकर विधिपूर्वक पुत्रदा एकादशीके ब्रतका अनुष्ठान किया। उन्होंने विधिपूर्वक जागरण भी किया और उसका निर्मल पुण्य राजाको दे द्विया। इसके बाद‌ रानी ने गर्भ धारण किया और प्रसव का समय आनेपर बलवान पुत्रको जन्म दिया। कहा जाता है कि जो भी इस एकादशी का माहात्म्य सुनता है वो पाप से मुक्त हो जाता है तथा इहलोकमें सुख पाकर परलोकमें स्वर्गीय गतिको प्राप्त होता है।

Anuradha Pandey

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शार्ट बायो

अनुराधा पांडेय पिछले 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में एस्ट्रोलॉजी और करियर टीम का नेतृत्व कर रही हैं।


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